फेफड़ों के कैंसर की एआई क्रीनिंग हेतु सरकार तथा एस्ट्राजेनेका में करार

हैदराबाद, विश्व स्वास्थ्य दिवस पर एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया लिमिटेड द्वारा तेलंगाना सरकार के साथ राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में फेफड़ों के कैंसर की एआई-आधारित जाँच शुरू करने के लिए समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। तेलंगाना में इस पहल को शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणालियों को कवर करते हुए बीस सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में लागू किया जाएगा।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, समझौते के तहत एस्ट्राजेनेका तेलंगाना के सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में क्यूरे.एआई के एआई-संचालित चेस्ट एक्स-रे समाधान को एकीकृत करने में सहायता करेगी। यह तकनीक फेफड़ों में मौजूद उन सूक्ष्म गांठों यानी पल्मोनरी नोड्यूल्स की पहचान करेगी, जो भविष्य में कैंसर का रूप ले सकती हैं। इसके अलावा यह सॉफ्टवेयर फेफड़ों की 29 अन्य बीमारियों की पहचान में भी सक्षम है।

एमओयू तहत उच्च जोखिम वाले रोगियों को फेफड़ों के कैंसर की पुष्टि या भविष्य में आगे की जाँच तथा उपचार के लिए वर्गीकृत किया जाएगा। एमओयू में प्रभावी और स्थायी रूप से अपनाने में सहायता के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों का प्रशिक्षण और कौशल विकास, साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में सुचारू एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढाँचे में सुधार शामिल है। बताया गया कि गोवा, तमिलनाडु और कर्नाटक के बाद तेलंगाना इस मॉडल को अपनाने वाला राज्य बना है।

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फेफड़ों का कैंसर बना गंभीर खतरा, 60 हजार मौतें प्रतिवर्ष

गौरतलब है कि फेफड़ों का कैंसर भारत में सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। आँकड़ों के अनुसार, 80 से 85 प्रतिशत मरीजों में इस बीमारी का पता उन्नत स्तर पर चलता है। देश में प्रतिवर्ष लगभग 60,000 लोगों की फेफड़ों के कैंसर से मृत्यु हो जाती है। यह बीमारी अब केवल धूम्रपान करने वालों तक ही सीमित नहीं है, धूम्रपान न करने वालों में भी इसके मामले 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ रहे हैं। इस स्वास्थ्य समस्या को लेकर तेलंगाना में भी स्थिति गंभीर है, जहाँ 2026 तक कैंसर के नए मामलों की संख्या 46,762 तक पहुँचने का अनुमान है। महिलाओं में इस कैंसर प्रकार के मामले पुरुषों की तुलना में अधिक हैं।

तेलंगाना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आयुक्त डॉ. एस. संगीता सत्यनारायण ने कहा कि फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान करने से जीवित रहने की दर में सुधार होता है और स्वास्थ्य प्रणाली पर समग्र बोझ कम होता है। सीमित क्रीनिंग तथा देर से पहचान निदान की एक बड़ी चुनौती है। इस प्रकार के सहयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करते हुए क्षमता में मौजूद कमियों को दूर करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया लिमिटेड के कंट्री प्रेसिडेंट और प्रबंध निदेशक प्रवीण राव अक्किनेपल्ली ने कहा कि शुरुआती पहचान कैंसर के उपचार परिणामों को बेहतर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। हम तेलंगाना सरकार के साथ मिलकर नवाचार को उन समुदायों तक पहुँचाएँगे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

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