फीस नियंत्रण कानून बनाने विस का विशेष सत्र बुलाए सरकार : कविता

हैदराबाद, तेलंगाना जागृति की संस्थापक व पूर्व विधान परिषद सदस्य के. कविता ने निजी कॉर्पोरेट स्कूलों में मनमानी फीस वसूलकर गरीब व मध्यवर्ग से आने वाले अभिभावकों से जबरन वसूली किए जाने का आरोप लगाते हुए सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर फीस नियंत्रण कानून बनाने की माँग की।

बंजारा हिल्स स्थित अपने आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए पूर्व एमएलसी कविता ने सरकार से विधानसभा के विशेष सत्र में फीस नियंत्रण कानून बनाने के साथ ही फीस नियंत्रण कमेटी का गठन कर प्रतिवर्ष केवल 8 से 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने का नियम बनाने की माँग की। उन्होंने कहा कि गत तिरुपति राव कमीशन ने प्रतिवर्ष केवल 8 से 10 प्रतिशत मात्र फीस बढ़ाने संबंधी सिफारिश की थी, वर्तमान कांग्रेस की गठित विद्या कमीशन ने भी केवल 7 से 9 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने के साथ ही सिफारिश करते हुए सरकार को रिपोर्ट सौंपी है।

कॉर्पोरेट स्कूलों में प्रति वर्ष 30% फीस वृद्धि जारी

कविता ने नारायणा, चैतन्या आदि स्कूलों के नाम लिए और कहा कि इन जैसे अनेक कॉर्पोरेट स्कूलों द्वारा प्रति वर्ष 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ाई जा रही है, यह बोझ अभिभावक झेल नहीं पा रहे हैं, जिसके चलते स्कूलों के समक्ष आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन सरकार के कानों पर जूँ तक नहीं रेंग रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि तेलंगाना में जब पूर्व केसीआर सरकार थी तब मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी फीस नियंत्रण को लेकर आलोचनाएँ किया करते थे, लेकिन कांग्रेस के सत्ता में आए 3 साल में 3 बजट पेश कर दिए गए, किंतु अभिभावकों की समस्या व फीस नियंत्रण कानून पर कोई चर्चा तक नहीं की गई न ही कानून बनाया गया है।

कविता ने चिंता जताते हुए कहा कि हाल के बजट सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच भ्रष्टाचार कर किसने कितना खाया है, इसी पर हो-हल्ला किया गया, लेकिन गरीब व मध्यवर्ग से आने वाले अभिभावकों की समस्या का किसी ने विचार तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि गृह विभाग व शिक्षा विभाग रेवंत रेड्डी के पास है, लेकिन मुख्यमंत्री को विद्यार्थियों की याद केवल चुनाव से पहले ही आती है, चुनाव जीतने के बाद विद्यार्थियों को भूल चुके हैं।

टीचरों को वेतन व पीएफ जैसी सुविधाएँ नहीं मिल रही

कविता ने मुख्यमंत्री पर बड़े निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों व निजी स्कूलों को प्रोत्साहन देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन स्कूलों व अस्पातलों की ओपनिंग कर मुख्यमंत्री आखिरकार क्या संदेश दे रहे हैं, क्या वे निजी कॉर्पोरेट संस्थाओं को प्रोत्साहन दे रहे हैं? उन्होंने कहा कि नारायणा, चैतन्या जैसे कॉर्पोरेट स्कूलों की लूट जारी है प्रतिवर्ष 30 प्रतिशत फीस तो ब़ढ़ाते ही हैं, परंतु टीचरों को उसके अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है, न ही टीचरों को पीएफ की सुविधा दी जाती है।

कविता ने बताया कि नारायणा, चैतन्या जैसे करीब 1,500 कार्पोरेट स्कूलों के लिए इनके पास पाठ्य पुस्तकें प्रिंट करने के लिए खुद की प्रिंटिंग मशीनें हैं और उसमें प्रिंट की गई 2 हजार रुपये की पुस्तकों को 15 हजार रुपये में लेने पर अभिभावकों को मजबूर किया जाता हैं, लेकिन इस पर सरकार अंजान बनी हुई है। कविता ने कहा कि इन कार्पोरेट स्कूलों में करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं, इनसे प्रतिवर्ष यह संस्थाएँ 1 से 2 हजार करोड़ रुपये कमाई करती हैं, लेकिन सरकार को 1 रुपया टैक्स नहीं दिया जाता हैं।

कविता ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में 236 प्राईवेट बजट स्कूल हैं, इनमें पढ़ने वाले 30 हजार विद्यार्थियों में से एससी, एसटी विद्यार्थियों की शिक्षा पर सरकार प्रति विद्यार्थी 42 हजार रुपये देती है। उन्होंने सरकार से माँग करते हुए कहा कि एससी, एसटी विद्यार्थीयों की तर्ज पर सरकार बीसी विद्यार्थियों को भी राशि दे। उन्होंने कहा कि बजट स्कूलों के 212 करोड़ रुपये सरकार बकाया है, इसे नहीं दिए जाने के कारण इन स्कूलों में भी फीस बढ़ाकर वसूली जा रही है।

बकाया राशि न मिलने से कॉलेज सर्टिफिकेट नहीं दे रहे

कविता ने कहा कि फीस रीअंबर्समेंट के तहत इंजीनियरिंग कॉलेजों के 7,500 करोड़ रुपये बकाए सरकार अदा नहीं कर रही है, जिसके कारण कॉलेजों द्वारा विद्यार्थियों के सर्टिफिकेट नहीं दिए जा रहे हैं। के. कविता ने आंध्र महिला सभा कॉलेज का उदाहरण देते हुए बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थी को पंजाब नेशनल बैंक में नौकरी मिलने की जानकारी देकर सर्टिफिकेट पूछने पर कॉलेज प्रबंधन ने विद्यार्थियों को फीस रीअंबर्समेंट आने तक इसे नहीं देने की बात कही है। इसी प्रकार कई कॉलेजों में विद्यार्थी परेशान हैं।

एक प्रश्न के उत्तर में कविता ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव सरकार के समय उन्हें केवल निज़ामाबाद तक ही सीमित कर दिया गया था और जब तक वे रहीं तब तक निज़ामाबाद व जग्तियाल में कभी नारायणा, चैतन्या जैसे कॉर्पोरेट स्कूलों को प्रवेश नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आते ही इन कॉर्पोरेट स्कूलों को वहाँ घुसने का मौका दे दिया गया।

कविता ने कहा कि सरकार ने फूड सिक्योरीटी टास्क फोर्स का गठन तो कर दिया, लेकिन कॉर्पोरेट कॉलेजों में बच्चों को कैसा भोजन परोसा जा रहा है, इसकी जाँच के तहत अभी तक सैम्पल तक नहीं लिए गए। उन्होंने कहा कि निजी कार्पोरेट कॉलेजों में 10 हजार बच्चों का भोजन एक ही जगह बनाया जाता है, यदि भोजन में कुछ भी गलत हुआ, तो इतने बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने माँग की कि फूड सिक्योरीटी टास्क फोर्स यथाशीघ्र ऐसे कॉलेजों की जाँच करें।

नार्थ इंडियन लॉबी को प्रोत्साहन दे रही है सरकार …

के. कविता ने कहा कि उत्तर भारतीय द्वारा तेलंगाना में कई इंटरमीडिएट कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं, लेकिन इन कॉलेजों में लेक्चरर्स से लेकर सफाई कर्मचारियों तक सभी उत्तर भारतीयों को ही नौकरियाँ दी जा रही हैं, तेलंगाना के लोगों को नहीं। फिर भी एलेन, एक्सिलेंसी व फिजिक्सवाला आदि जैसे कॉलेजों को अनुमतियाँ देकर सरकार नार्थ इंडियन लॉबी को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही ऐसे कॉलेजों की सूची जारी करेंगीं।

कविता ने कहा कि तेलंगाना के लोगों को नौकरी तक नहीं देने वाले ऐसे कॉलेजों को सरकार क्यों अनुमति दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन माँगों को हल्के में लेगी, तो तेलंगाना जागृति की नई बनने जा रही राजनीतिक पार्टी राज्य में व्यापक आंदोलन छेड़ेगी। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देते हुए लोकसभा में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तेलंगाना जागृति की नई पार्टी के लिए शुभ अवसर बताते हुए कविता ने कहा कि प्रकृति जागृति के लिए सुनहरा अवसर लेकर आ रही है, यदि सिद्दिपेट या गजवेल निर्वाचन क्षेत्र महिला आरक्षित हुए तो इन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों से वे चुनाव लडेंगीं। मीडिया के साथ औपचारिक बातचीत में कविता ने बीआरएस विधायक दल उपनेता टी. हरीश राव के लिए गुंटा नक्का (चालाक) लोमड़ी शब्द का उपयोग करते हुए कहा कि सिद्दिपेट में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का गुंटा नक्का के साथ समझौता हो चुका है।

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नई पार्टी में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी

कविता ने सिद्दिपेट या गजवेल निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की जानकारी देते हुए कहा कि फिलहाल कहाँ से लड़ना है, यह निर्णय तो नहीं लिया है, फिर भी यदि उक्त क्षेत्र महिला आरक्षित हुए तो अवश्य लडेंगीं। कविता ने कहा कि नई राजनीतिक पार्टी में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी वहीं विदेश में रहने वाले युवा जागृति पार्टी में शामिल होने के लिए बेताब हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही पार्टी का एडेंडा घोषित किया जाएगा, तब बड़े पैमाने पर पार्टी में शामिल होने वालों की होड़ लगेगी। उन्होंने भारास के बारे में पूछने पर कहा बीआरएस अब स्लिपिंग मोड में है।केरलम चुनाव प्रचार में भाग ले रहे मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को आयरन लेग बताते हुए कविता ने कहा कि गत में हुए महाराष्ट्र व बिहार चुनाव प्रचार में रेवंत रेड्डी ने भाग लिया था लेकिन वहाँ कांग्रेस हार गई।

अब केरलम में फिर कांग्रेस के लिए वही परिणाम जनता दोहराएगी। उन्होंने कहा कि तेलंगाना की जनता को दी गई 6 गारंटियों को लेकर मुख्यमंत्री ने केरलम चुनाव प्रचार में जो कहा, वह विचित्र बयान है। निर्वाचन क्षेत्रों के डिलिमिटेशन को लेकर पूछे गए प्रश्न पर कविता ने कहा कि वित्तीय अनुशासन का पालन करने वाले राज्यों को डिलिमिटेशन के समय प्राथमिकता देना चाहिए। निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि गोवा में 25 हजार लोगों पर एक विधायक है, तो तेलंगाना में 7 लाख लोगों पर एक विधायक है। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप व असम में 50 हजार जनसंख्या पर एक सांसद है, तो तेलंगाना में 16 लाख जनसंख्या पर एक सांसद है, यह असंतुलन दूर होना चाहिए।

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