225 करोड़ से होगा ज्ञान सरस्वती मंदिर का पुनर्निर्माण
हैदराबाद, दक्षिण भारत का एकमात्र ज्ञान सरस्वती मंदिर, जो अक्षराभ्यास के लिए प्रसिद्ध है, पुनर्निर्माण के साथ नई शोभा प्राप्त करने जा रहा है। महर्षि वेदव्यास द्वारा प्रतिष्ठित तीन देवियों का यह मंदिर परंपराओं के अनुरूप भव्य राजगोपुरम, कोनेरु, उत्तर द्वार एवं ध्यान मंदिरों के साथ और अधिक भक्तों को आकर्षित करेगा। हजारों वर्षों के गौरवशाली इतिहास वाले बासर ज्ञान सरस्वती मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 225 करोड़ रुपये आवंटित किए है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सोमवार, 6 अप्रैल को पुनर्निर्माण कार्यों के लिए भूमि पूजन करेंगे।
दक्षिण गंगा के रूप में प्रसिद्ध पवित्र गोदावरी नदी के तट पर स्थित बासर क्षेत्र में ज्ञान सरस्वती देवी विराजमान हैं। स्थल पुराण के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद शांति की तलाश में वेदव्यास महर्षि ने गोदावरी तट पर आकर बासर में निवास किया। उसी समय उन्होंने स्वयं गोदावरी की रेत से ज्ञान सरस्वती के साथ महालक्ष्मी और महाकाली की मूर्तियों की स्थापना की थी। इस प्रकार तीन देवियों के निवास के रूप में बासर प्रसिद्ध हुआ। ज्ञान सरस्वती का निवास स्थान होने के कारण बासर में हर वर्ष बड़ी संख्या में बच्चों का अक्षराभ्यास कराया जाता है।
गर्भगृह और अर्ध मंडप का विस्तार 2 हजार से 5 हजार वर्ग फुट
बसंत पंचमी और अन्य पर्वों पर अक्षराभ्यास के लिए आने वाले बच्चों, माता-पिता, उनके रिश्तेदारों और भक्तों से मंदिर खचाखच भर जाता है। प्राचीन मंदिर होने और हर वर्ष बढ़ती भक्तों की संख्या के अनुरूप विकास कार्य न होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने मंदिर के विकास का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को परंपराओं के अनुरूप मंदिर के विकास कार्यों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है।
बासर मंदिर के पुनर्निर्माण कार्यों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने से पहले अधिकारियों ने श्रृंगेरी पीठाधीशों से परामर्श किया। गर्भगृह, राजगोपुरम व अन्य गोपुरम, माड़ा सड़कें, कोनेरु, उत्तर द्वार निर्माण आदि से संबंधित अनुमति प्राप्त की गई। पीठाधीशों के सुझावों के अनुसार मास्टर प्लान तैयार किया गया। भक्तों की संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में 2 हजार वर्ग फुट में स्थित गर्भगृह और अर्ध मंडप को 5 हजार वर्ग फुट तक बढ़ाया जाएगा। उत्तर दिशा में 9 मंजिला राजगोपुरम, अन्य तीन दिशाओं में 7 मंजिला गोपुरम, चारों दिशाओं में 33 फीट चौड़ी माड़ा सड़कें, उत्तर द्वार का निर्माण आदि विकास कार्यों में शामिल हैं।
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मंदिर का क्षेत्रफल 20 हजार से बढ़कर 62 हजार वर्ग फुट होगा
कुल मिलाकर मंदिर का क्षेत्रफल 20 हजार वर्ग फुट से बढ़ाकर 62 हजार वर्ग फुट किया जा रहा है। मंदिर में प्रत्येक निर्माण पत्थरों से किया जाएगा। कुल 6 हजार भक्तों के लिए सभी सुविधाओं के साथ 70 हजार वर्ग फुट में क्यू कॉम्प्लेक्स, 200 लोगों के एक साथ बैठकर ध्यान करने के लिए ध्यान मंदिर, 20 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में रसोईघर, भोजनशालाएं, प्रसाद वितरण केंद्र, ईशान्य दिशा में कोनेरु, पूर्व दिशा में आध्यात्मिकता को बढ़ाने वाले भव्य तोरण, सूचना केंद्र, मंदिर के उत्तर और पूर्व दिशा में सड़कों का विकास, मंदिर से दूसरी ओर जाने के लिए अंडरपास, सोलर रूफटॉप के साथ वाहन पार्किंग, मंदिर परिसर में सुंदर पौधों के साथ पुष्प वन आदि कार्य किए जाएंगे।
मंदिर परिसर के बाहर स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। भविष्य में मंदिर के पीछे बड़े वृक्षों के साथ हरियाली विकसित की जाएगी। गोदावरी नदी के पुष्कर अगले वर्ष जून में शुरू होने वाले हैं। पुष्कर के समय लाखों भक्त पुण्य स्नान के लिए बासर गोदावरी तट पर पहुंचते हैं। उनके लिए आवश्यक सभी सुविधाएं वर्तमान मास्टर प्लान में शामिल की जाएँगी। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो और पुनर्निर्माण कार्य मंदिर की परंपराओं तथा श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप ही किया जाए।
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