हॉवर्थ इंडिया की महिला लीडरशिप राउंडटेबल में लक्ष्य समर्पण पर चर्चा
हैदराबाद, हॉवर्थ इंडिया ने भविष्य को आकार देने वाली महिलाओं का सम्मान करने से उद्देश्य से हैदराबाद में ‘गिव टू गेन’ दिया थीम के तहत एक विशेष लीडरशिप राउंडटेबल का आयोजन किया।
आर्किटेक्चर और डिजाइन फर्मों, कॉर्पोरेट्स और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी से जुड़ी वरिष्ठ महिला नेताओं ने भाग लिया। सत्र के दौरान पैनल चर्चा और दर्शकों के साथ संवाद कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें महिलाओं के नेतृत्व के व्यावसायिक प्रभाव पर विशेष चर्चा की गयी। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे सोच-समझकर तैयार किए गए कार्यस्थल, मेंटरशिप, सहयोग और समर्थन महिलाओं को आगे बढ़ने में मदद करते हैं, और समावेशन को केवल सामाजिक पहल के बजाय संगठनात्मक प्रदर्शन का महत्वपूर्ण कारक माना जाना चाहिए।
हॉवर्थ इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष खंडेलवाल ने कहा कि जब महिलाएं उद्देश्य के साथ नेतृत्व करती हैं, तो प्रगति तेज होती है। लक्ष्य के लिए समर्पण उद्योगों के दृष्टिकोण को समझने के साथ साथ समावेशी नेतृत्व और कार्यस्थल को सही आकार देकर सामाजिक उद्देश्य से संगठनों के प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है। मेंटरशिप, सहयोग और बार बार कार्यों की समीक्षा जैसे पहलुओं पर संवाद कार्यस्थलों को अधिक सक्षम बनाने के लिए जरूरी है।
हाइटेक सिटी में स्थित हॉवर्थ इंडिया के एक्सपीरियंस सेंटर में आयोजित इस पैनल में टर्नर और टाउनसेंड की महाप्रबंधक हरिप्रिया अश्विन, निदेशक सृजना नलम, वर्कप्लेस डिजाइन एंड बिल्ड लीडर प्रियंका भट्ट और एम मोसर एसोसिएट्स की निदेशक सबीना रेड्डी शामिल रहीं।
चर्चा की शुरुआत व्यक्तिगत यात्राएँ और निर्णायक मोड़ विषय से हुई, जिसमें वक्ताओं ने अपने करियर के शुरुआती प्रभावों, महत्वपूर्ण मोड़ और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। इसके बाद कार्यस्थल में जीत हासिल करने सत्र में मेंटरशिप, सहयोग, नेटवर्किंग आदि पर कार्यक्रम आयोजित किये गये। बताया गया कि किस तरह समावेशी नीतियों, नेतृत्व संस्कृति और सहायक कार्यस्थल समाधान महिलाओं को रचनात्मकता, विश्वास और नवाचार के लिए सक्षम बनाते हैं।
चर्चा के दौरान हरिप्रिया अश्विन ने कहा कि वह नेतृत्व को हमेशा सामूहिक दृष्टिकोण से देखती हैं। महिलाओं का अपने व्यक्तिगत अनुभवों और महत्वपूर्ण क्षणों को साझा करना दूसरों के लिए प्रेरक होता है। अपने संघर्ष से उन्होंने सीखा है कि सबसे मजबूत संरचनाएं वही होती हैं, जो बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालती हैं। जब कार्यस्थलों को सहानुभूति और स्पष्टता के साथ आकार दिया जाता है, तो महिलाओं को न केवल स्थान देने बल्कि उन्हें बदलने की क्षमता भी प्रदान की जा सकती है।
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