सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामले में सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट करते हुए सभी सरकारी विभागों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके लाभ का भुगतान करने के मामले को लेकर राज्य सरकार द्वारा अपनाई जा रही टालने की नीति की कड़ी आलोचना की। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कानून के अनुसार, पेंशन, जीपीएफ, कम्युटेशन, ग्रैचुएटी, अर्जित अवकाश, सरेंडर लीव, ग्रुप इंश्यूरेंस आदि से संबंधित लाभ जारी करने के लिए उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश दिए।
अदालत ने 9 अप्रैल तक भुगतान के संबंध में दिए गए आदेश को पूर्ण स्तरीय अमल में न लाने पर भी असंतोष जताया और सरकार को चेताया कि अदालत के आदेश को हल्के में न लें। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कानून के तहत सभी लाभों का भुगतान करना ही होगा। सरकार द्वारा आंशिक भुगतान किए जाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के बकाया का भुगतान करने की स्थिति न रहने के कारण वित्त विभाग के मुख्य सचिव को स्वयं अदालत में हाजिर होकर विवरण देने के लिए आदेश जारी किए।
लाभ आंकलन प्रक्रिया पर अदालत ने जताया असंतोष
अदालत ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति संबंधी प्रयोजन के आंकलन की प्रक्रिया पूर्ण करने पर भी असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि वर्तमान समय तक 737 सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लाभ प्रयोजन का आंकलन करने की सरकार बात कह रही है, लेकिन अदालत में दायर याचिकाओं की सुनवाई के बाद भी भुगतान न करने पर गुस्सा जाहिर किया। सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि 737 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भुगतान किया गया, लेकिन 221 याचिकाओं की सुनवाई पूर्ण की गई। अधिकारी भुगतान करने के लिए टोकन जारी कर रहे हैं, लेकिन पूर्ण स्तरीय भुगतान नहीं किया जा रहा है।
अदालत ने सरकार पर झल्लाते हुए कहा कि पुनः एक बार आखिरी अवसर दिया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई तक पूर्ण स्तरीय भुगतान किया जाना ही होगा। अगली सुनवाई तक आंशिक भुगतान को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके पूर्व अदालत ने आदेश दिया था कि एक भी सेवानिवृत्त कर्मी का भुगतान बकाया रहेगा, तो वित्त विभाग के मुख्य सचिव संदीप सुल्तानिया को स्वयं अदालत में हाजिर होकर विवरण देना होगा। अदालत ने चेताया कि बार-बार समय देने पर सरकार इसे हल्के में न ले। अदालत ने सरकार से कहा कि अदालत के साथ खिलवाड़ न करें।
अदालत ने आगे कहा कि नियमित कर्मचारी का एक माह का वेतन रोका जाता है, तो इस पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, लेकिन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनकी मेहनत की कमाई का भुगतान न करने पर इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। जो रकम दी जा रही है, वह सरकार की नहीं है, इसे ध्यान में रखना चाहिए। कर्मचारियों ने अपने सेवाकाल के दौरान जो कुछ भी जमा किया है, उसका भुगतान सेवानिवृत्ति के समय सरकार करती है, इस महत्वपूर्ण विषय को भुलाया नहीं जा सकता।
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सेवानिवृत्ति राशि जीवन के अहम कार्यों में सहायक
सेवानिवृत्ति के पश्चात बच्चों की पढ़ाई, विवाह, मकान खरीदना आदि महत्वपूर्ण कार्यों के लिए कर्मचारियों द्वारा बचाई गई यह रकम काम आती है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक एक भी सेवानिवृत्त कर्मचारी का भुगतान बकाया नहीं रहना चाहिए। सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान न करने के कारण दायर याचिकाओं पर सरकार की ओर से किए गए भुगतान के संबंध में एक रिपोर्ट पेश करने के लिए सरकार को अदालत ने आदेश जारी किए।
पिछले वर्ष भुगतान के संबंध में जारी आदेश का पालन न करने के कारण अदालत की अवमानना को लेकर दायर 572 याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नामावरपु राजेश्वर राव ने आज सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाओं की बारिकी से जाँच की गई और इस जाँच से स्पष्ट हुआ है कि 221 याचिकाओं के संबंध में आदेश को अमल में लाया गया। 3,656 याचिकाकर्ताओं को अधिकारियों ने टोकन जारी किए, लेकिन इनमें से 1,056 याचिकाकर्ताओं को ही भुगतान किया गया। अभी और 2,600 टोकन जारी किए जाने का उल्लेख किया।
न्यायाधीश ने कहा कि इन सभी टोकनों के संबंध में गत 3 अप्रैल के भीतर भुगतान करने का सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया, लेकिन इसे पूरा नहीं किया गया। दिए गए आश्वासन के अनुसार पूर्ण स्तरीय भुगतान न करने के कारण न्यायाधीश ने सरकार को खरीखोटी सुनाई। न्यायाधीश ने कहा कि एक बार फिर से अवसर दिया जा रहा है और आगामी 10 जून के भीतर सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया लाभ का भुगतान करने के आदेश दिए। एक भी सेवानिवृत्त कर्मचारी का भुगतान बकाया रहने पर वित्त विभाग के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में स्वयं हाजिर होकर विवरण देने के आदेश देते हुए न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई 10 जून तक स्थगित कर दी।
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