परमार्थ सेवा का परचम थामने वाले राजेंद्र प्रसाद दायमा

हैदराबाद को दिलदार लोगों की नगरी कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा। यहाँ के चप्पे-चप्पे पर पर-सेवी, समाज-सेवी, पशु-प्रेमी, दया और करुणा से लबरेज लोग मिल ही जाते हैं। किसी जरूरतमंद का हाथ थामकर उसकी पीड़ा को अपनी कसक समझकर करुणामयी हाथ बढ़ाने वाले लोगों की आज समाज को सख्त जरूरत है। इसी कड़ी में शहर के लोग वयोवृद्ध राजेंद्र प्रसाद दायमा का नाम बड़ी श्रद्धा व स्नेह के साथ लेते हैं।
यूँ तो राजेंद्र प्रसाद दायमा पिछले पचास से भी अधिक वर्षों से विभिन्न क्षेत्रों में सािढय रूप से योगदान दे रहे हैं। 1955 में हैदराबाद में जन्मे स्वर्गीय रामनिवास दायमा के इस लाडले ने बी.कॉम. तक की शिक्षा हासिल की और इन दिनों श्रीमती सरोज दायमा के साथ सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आप युवावस्था में अपने पारिवारिक व्यापार में सहयोग देते हुए कई सामाजिक संगठनों से जुड़कर जनमानस की विभिन्न क्षेत्रों में सेवा करने लगे।
मारवाड़ी युवा मंच के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान
इसी क्रम में कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर कार्य भी किया है, जैसे- अग्रवाल जूनियर कॉलेज स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, एस.डी. सिग्नोडिया कॉलेज स्टूडेंट्स एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष, दाहिमा समाज हैदराबाद के उपाध्यक्ष (2 कार्यकाल), ए.पी. जर्दा एवं पान मसाला मैन्युफैक्चरर्स एंड मर्चेंट्स एसोसिएशन के संस्थापक सचिव, आंध्रप्रदेश मारवाड़ी युवा मंच के सचिव, अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच-1992-1996, दक्षिण क्षेत्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (2 कार्यकाल) रहे। उन्होंने अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के पाँच राष्ट्रीय अध्यक्षों के साथ कार्य किया तथा आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक एवं महाराष्ट्र सहित अनेक राज्यों में मंच की शाखाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अतिरिक्त सन् 1983 में लायंस क्लब से जुड़े और समय-समय पर अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, ज़ोन चेयरमैन, डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन आदि पदों पर कार्य किया। इनकी सेवा भावना व समाज के विकास में योगदान को देखते हुए अनेक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया। इन दिनों राजेंद्र प्रसाद दायमा का मुख्य उद्देश्य कैंसर रोगियों को अधिकाधिक सहायता प्रदान करना है। इसके लिए किसी जाति, लिंग या भाषा का भेद नहीं किया जाता है। इन्होंने अब तक 6 माह से 12 वर्ष तक के लगभग 150 बाल कैंसर रोगियों को विशेष सहयोग प्रदान किया है।
एमएनजे अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं के लिए सहयोग
वैसे तो सभी प्रकार के जरूरतमंद कैंसर रोगियों की सहायता करते हैं, लेकिन ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं को विशेष रूप से सहयोग प्रदान करने की इच्छा रखते हैं। इनका मानना है कि वर्तमान में इस रोग से पीड़ितों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यदि इस रोग के प्रथम चरण से ही चिकित्सा शुरु की जाए तो खतरा टल सकता है। एक महिला के स्वास्थ्य की रक्षा करके हम उस परिवार को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। अपने इसी उद्देश्य को पूरा करते हुए हैदराबाद के सरकारी एम.एन.जे. कैंसर अस्पताल से सािढय रूप से जुड़े हैं।

इस अस्पताल में दानदाताओं के सहयोग से इन्होंने लगभग 25 लाख की लागत से आपातकालीन लैब उपकरण एवं मशीनरी की व्यवस्था की है। लगभग 10 लाख की लागत से आर.ओ. वाटर प्लांट दान किया है। शहर में स्थित देवनार स्कूल फॉर द ब्लाइंड के 550 नेत्रहीन छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु भी कार्य कर रहे हैं। इनकी मंशा नेत्रहीनों के लिए शहर में स्नातकोत्तर विश्वविद्यालय की स्थापना करना है। दायमा वैदिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति भी विशेष रुचि रखते हैं। इन्होंने चारों वेदों की 2500 से अधिक अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियाँ तिरुपति वैदिक विश्वविद्यालय को दान स्वरूप भेंट की, जिन पर शोध कार्य किया जा रहा है।
रक्तदान व स्वास्थ्य शिविरों से जनसेवा की मिसाल
शहर की अन्य संस्थाओं से जुड़कर इनके द्वारा समय-समय पर अन्य सामाजिक सेवा कार्य भी किए गए हैं, जैसे- 35 से अधिक बार स्वयं रक्तदान, 110 से अधिक मेगा स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, महिलाओं के लिए विशेष कैंसर जाँच शिविर, हृदय रोग, नेत्र जाँच, रक्तदान शिविर, अन्न दान की व्यवस्था, प्राकृतिक आपदाओं (भूकंप, बाढ़) के समय जन-मानस को सहायता, रेल दुर्घटना पीड़ितों की सहायता, सामूहिक विवाह कार्पाम आदि।
यह भी पढे़: मानवता के अग्रदूत आचार्य श्रीराजेंद्र सुरीश्वर म.सा.

कर्मफल को प्रधानता देने वाले वयोवृद्ध राजेन्द्र अपने सुस्वास्थ्य का रहस्य लोगों की दुआएँ मानते हैं। सभी कंपनियों में सेवा-सहायता के लिए राशि निर्धारित रहती है, जिसका उपयोग वाजिब सदस्य एवं वाजिब कार्य में होना आवश्यक है। यही कार्य अपनी मध्यस्थता के द्वारा राजेन्द्र दायमा करते हैं। उनका कहना है कि लोगों की दुआओं ने मुझे अब तक दवाओं से दूर रखा है। सेवा और सहायता दिल से की जाती है। इसके लिए आपकी जेब गर्म हो, आवश्यक नहीं है।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



