आत्मा को विकार मुक्त करने का संदेश देती है होली : निर्मलाजी

हैदराबाद होली चातुर्मास हमें यह सिखाता है कि हम केवल बाहर की ही सफाई न करें, बल्कि भीतर की भी सफाई करें, अर्थात आत्मा को विकारों से मुक्त कर विचारों को परखते हुए वाणी में मधुरता लाएँ और व्यवहार में विनम्रता को अपनाएँ। यदि हम ऐसा करते हैं, तो होली चातुर्मास को मनाना सार्थक माना जाएगा। आडम्बरों के बजाए सात्विकता और शुद्ध आचार विचार के साथ पर्व को मनाना ही सार्थक माना जाएगा।

उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद काचीगुड़ा के तत्वावधान में पूनमचंद गांधी जैन स्थानक में होली चातुर्मास हेतु विराजित महासती निर्मलाजी म.सा. ने प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। संघ के महामंत्री पवन कटारिया ने आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि महासतीजी के सान्निध्य में होली चातुर्मास धर्म आराधना, तप, त्याग व तपस्या के साथ सम्पन्न हुआ। म.सा. ने कहा कि मनुष्य जन्म अनंत योनियों में भटकने के पश्चात प्राप्त होता है और यह अत्यंत दुर्लभ है। यदि मनुष्य जीवन केवल भोग विलास और संग्रह में ही व्यतीत हो जाए, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

संतों का सान्निध्य जीवन परिवर्तन का अवसर

चातुर्मास का यह पावन काल संयम, तप, स्वाध्याय और आत्मनिरीक्षण का समय है। संतों का सान्निध्य केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को बदलने के लिए होता है। जैन धर्म का मूल संदेश अहिंसा और आत्मसंयम है। होली चातुर्मास हमें यह सिखाता है कि केवल बाहर की सफाई न करें, बल्कि भीतर की भी सफाई करें। यदि हम प्रतिदिन अपने विचारों को परखे, वाणी में मधुरता लाएँ और व्यवहार में विनम्रता अपनाएँ, तो यह सच्ची धर्माराधना है।

प्रवचन के सारांश के रूप में तीन शब्दों पर ध्यान आकर्षित किया गया, आलोचना, निंदा और गृहा अर्थात् मन में राग द्वेष या कटु भावों को पकड़कर रखना। यह तीनों आत्मा की शांति के शत्रु हैं। जब तक व्यक्ति इन प्रवृत्तियों का त्याग नहीं करता, तब तक चातुर्मास की साधना अधूरी रहती है। म.सा. ने आह्वान किया कि इस होली चातुर्मास में हम संकल्प लें कि न अनावश्यक आलोचना करेंगे, न निंदा करेंगे और न ही मन में द्वेष का गृह रखेंगे।

क्षमा, करुणा और संयम को अपनाकर ही जीवन को वास्तविक अर्थों में रंगीन बनाया जा सकता है। इसके पूर्व साध्वी उपासनाजी म.सा. ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा को विकारों से मुक्त करने का आध्यात्मिक संदेश है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में प्रत्येक पर्व का उद्देश्य आत्म जागरण है और होली चातुर्मास विशेष रूप से अंतर्मन की शुद्धि का काल है।

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जालना संघ ने 2026 चातुर्मास की विनती की

प्रवचन सभा में जालना से संघ के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल चातुर्मास विनती के लिए गुरुवर्या के चरणों में उपस्थित हुआ। संघ के महामंत्री धर्मचंद गादिया ने 2026 के चातुर्मास के लिए विनती की, जिसे महासती निर्मलाजी म.सा. ने द्रव्य क्षेत्र काल भाव के संपूर्ण आगारों से साथ स्वीकृति प्रदान की। ग्रेटर हैदराबाद संघ की ओर से जालना से पधारे पदाधिकारियों का स्वागत और अभिनंदन किया गया।

महामंत्री पवन कटारिया ने प्रवचन सभा का संचालन करते हुए त्रय नगर के विभिन्न संघों के पदाधिकारियों का अभिनंदन किया। महासाध्वी मंडल शुक्रवार, 6 मार्च तक काचीगुड़ा स्थानक भवन में विराजमान रहेगा। प्रतिदिन सुबह 9.15 से 10.15 तक प्रवचन रहेगा। 7 मार्च को गुरुवर्या काचीगुड़ा स्थानक से विहार कर गुरु गणेश भवन, रामकोट में पदार्पण करेंगी। पवन कटारिया ने संघ की गतिविधियों का विवरण देते हुए कहा कि आगामी 22 मार्च को श्री जैन स्वाध्यायी संघ की आमसभा स्थानक भवन में आयोजित की जाएगा।

आगामी 5 जुलाई को बोर्ड परीक्षा काचीगुड़ा, सिकंदराबाद, कृष्णानगर, मल्काजगिरी, ताड़बन केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। प्रति रविवार को बच्चों की पाठशाला और बुधवार को महिला कक्षा दोपहर 2 से 3 बजे तक रहेगी। आगामी 29 मार्च को महावीर जयंती पर प्रश्न मंच व अन्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। आज कार्यक्रम के पश्चात संघ की ओर से गौतम प्रसादी का आयोजन किया गया।

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