मनुष्य तृष्णा से बचे, इसका कोई अंत नहीं : चन्द्रयशविजयजी
हैदराबाद, ‘मनुष्य को जरूरत के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए, लेकिन तृष्णा रूपी लोभ लालच से बचना चाहिए, तृष्णा का कोई अंत नहीं है।’
श्री लब्धि शांतिनाथ जैन संघ के महासचिव जवाहरलाल भंसाली द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चन्द्रयशविजयजी म.सा. आदि ठाणा-2 का श्री लब्धि शांतिनाथ जैन संघ, जामबाग में गाजे-बाजे के साथ प्रवेश हुआ। तत्पश्चात आयोजित प्रवचन में उक्त उद्गार म.सा. ने व्यक्त किए।

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म.सा. ने कहा कि मनुष्य को एक मिला, तो दस चाहिए, दस मिला, तो सौ चाहिए, सौ मिला, तो हजार चाहिए, हजार मिला, तो लाख और लाख मिला, तो करोड़। इस लोभ का अंत नहीं है। मनुष्य जन्म मिला है, उसे व्यर्थ नहीं गंवाना है। इसे पुण्य उपार्जन कर सार्थक बनाना है।
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