पत्नी की पैतृक संपत्ति पर पति का अधिकार नहीं

हैदराबाद, आंध्र-प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा कि हिन्दू महिला के पति का उसके माता-पिता से विरासत में मिली संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी फैसला सुनाया कि यदि महिला की संतान नहीं है, तो उसके पति का संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा। यह भी स्पष्ट हुआ है कि यदि महिला का निसंतान निधन हो जाता है, तो संपत्ति उसके पिता के वारिसों को मिलेगी।

उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि बहन श्रीविरिता की मृत्यु के कारण अपनी नानी से विरासत में मिली जमीन पर राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराने की माँग करने वाली देविका मनसा की अपील याचिका को स्वीकार करते हुए आरडीओ द्वारा दिया गया आदेश वैध है। अदालत ने फैसला सुनाया कि संयुक्त ज़िलाधीश द्वारा आरडीओ के आदेश को रद्द करना अनुचित है और कहा कि देविका मनसा का नाम अभिलेखों में दर्ज किया जाना चाहिए। आंध्र-प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस तरलाडा राजशेखर ने हाल ही में इस संबंध में अपना फैसला सुनाया।

अनकापल्ली ज़िले के पायकराव मंडल के पेंटाकोटा गाँव निवासी चिक्काला वेंकायम्मा ने वर्ष 2002 के दौरान अपनी पोती श्री विरिता को 1.5 एकड़ जमीन गिफ्ट डीड के रूप में दी थी। राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज था। वर्ष 2005 में श्री विरिता के निधन के बाद वेंकायम्मा ने वर्ष 2007 में गिफ्ट डीड रद्द कर दिया। उन्होंने यह जमीन अपनी दूसरी पोती देविका मनसा को गिफ्ट डीड कर दी। वेंकयम्मा का निधन वर्ष 2012 में हुआ।

यह भी पढ़ें… कालेश्वरम पर मिल गये हैं भाजपा और कांग्रेस : हरीश राव

तहसीलदार ने पति के अधिकार के तर्क को किया स्वीकार

देविका ने तहसीलदार से राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया, जिस पर श्री विरिता के पति बदीरेड्डी नागावीरा वेंकट श्रीरामा दोरा ने आपत्ति जताई। तहसीलदार ने श्रीरामा दोरा के इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि पत्नी की संपत्ति पर उनका एकमात्र अधिकार है। देविका ने इन आदेशों को आरडीओ के समक्ष चुनौती दी। आरडीओ ने वर्ष 2017 में देविका का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने का आदेश दिया। इन आदेशों को श्रीरामा दोरा ने संयुक्त ज़िलाधीश के समक्ष चुनौती दी। संयुक्त ज़िलाधीश ने आरडीओ के आदेशों को रद्द करते हुए अपना फैसला सुनाया कि गिफ्ट डीड विवाद का निपटारा सिविल कोर्ट में ही किया जाना चाहिए।

संयुक्त ज़िलाधीश के आदेशों को चुनौती देते हुए देविका और उसके पिता चिक्कला दत्तात्रेय (वेंकायम्मा के पुत्र) ने वर्ष 2023 में उच्च न्यायालय में अपील की। उच्च न्यायालय ने माना कि संयुक्त ज़िलाधीश के आदेश हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15(2)(ए) के विपरीत थे। संयुक्त ज़िलाधीश के आदेशों को उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया और कहा कि देविका का नाम राजस्व अभिलेखों में शामिल किया जाना चाहिए। यह कहा गया कि एक हिन्दू महिला को अपने माता-पिता से विरासत में मिली संपत्ति पर उसके पति का कोई अधिकार नहीं है। फैसले में यह कहा गया कि यदि उनकी संतान न होने पर भी इस संपत्ति पर पति का कोई अधिकार नहीं होगा और संपत्ति उसके पिता की होगी।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button