जल है तो कल है

हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि जल ही जीवन है। जीवन को बनाए रखने के लिए अपरिहार्य जल की उपलब्धता निरंतर आवश्यक है, किन्तु पिछले कुछ वर्षों में मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किए गए विभिन्न अनुसंधान के अनुसार वर्तमान विश्व में भारी जल-संकट की परिस्थिति निर्मित हो गई है जिसका सीधा असर मनुष्यों के सामान्य जन-जीवन पर दिख रहा है। वैज्ञानिकों के मतानुसार बढ़ती जनसंख्या एवं शहरीकरण का प्रसार जल-संकट को गहराने का काम कर रहे है।

भारत में विश्व की लगभग 17-18 प्रतिशत आबादी निवास करती है। भारत के लिए आने वाला समय जल की उपलब्धता की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। विश्व का केवल चार प्रतिशत नवीकरणीय जल-संसाधन भारत में उपलब्ध है। यदि हम जीवित रहना चाहते हैं, तो जल-संरक्षण के बिना यह संभव नहीं होगा। आग, अपने संपर्क में आने वाली हर वस्तु का संपूर्ण नाश कर देती है, उससे बिल्कुल विपरीत जल घुलनशील अशुद्धियों के साथ संपर्क में आने से प्रदूषित हो जाता है।

पानी के मसले पर विवाद और भविष्य में संभावित संघर्ष

अत: सभी पांच तत्वों में से पानी मानव जीवन के लिए सबसे करीबी रूपक है, क्योंकि पानी की ही तरह, मनुष्य आत्माएं बहुत संस्कार ग्राही एवं अपामित होती हैं। कहते हैं, मनुष्य अपने संस्कारों के कारण कभी कल्याणकारी देवता बन जाते हैं तो कभी विनाशकारी असुर। वर्तमान विश्व में मंडरा रहा जल-संकट मनुष्य के प्रदूषित मन की ही देन हैं। आज स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि देश के विभिन्न हिस्सों में भूजल तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है जिस वजह से कई जगहों पर लोगों को प्रदूषित जल ही पीना पड़ रहा है।

वहीं दूसरी तरफ जहां मीठे जल की उपलब्धता है, उन क्षेत्रों में पानी की खपत इतनी अधिक है कि जलस्तर निरंतर गिरावट की ओर जा रहा है। ऐसे हालातों में पानी को लेकर कहीं लोगों में दंगे हो रहे हैं तो कहीं जल निकायों के नियंत्रण को लेकर राज्य सरकारों के बीच विवाद हो रहा है। वो दिन अब दूर नहीं है कि जब पानी के मसले पर दो देशों के बीच युद्ध की परिस्थिति का निर्माण हो जाएगा।

प्रकृति का संकेत समझें और जीवन शैली में बदलाव लाएँ

इसलिए बेहतर यही होगा कि हम मनुष्य प्रकृति द्वारा दिए गये इस संकेत को समझें और अपने जीने के तौर-तरीके में बड़ा परिवर्तन लाएँ, अन्यथा प्रकृति तो अपना कार्य अपने हिसाब से कर ही लेगी, फिर चाहे हम उसका सहयोग करें या ना करें। स्मरण रखें! जल वह तत्व है, जो महान चिकित्सा और अलौकिक मूल्य के साथ संपन्न है। अत उसे अपने मूल स्वरूप में स्वच्छ और स्वस्थ रखा जाना चाहिए, अन्यथा हम उसके अनेक गुणों से लाभान्वित नहीं हो पाएंगे।

राजयोगी ब्रह्माकुमार निकुंज

ठीक उसी प्रकार से जब हमारा मन सभी प्रकार की अशुद्धियों एवं नकारात्मकता से मुक्त होकर शुद्ध होगा, तब बाहरी वातावरण भी सकारात्मक, पौष्टिक एवं अनुकूल हो जाएगा और विश्व के अंदर सुख और शांति का राज्य फिर से स्थापित हो जाएगा। तो आइए, अपने मन को शुद्ध कर दुनिया को सुंदर एवं जीने लायक बनाएं।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button