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अवैध सरोगेसी व बच्चा बेचने के रैकेट का भंडाफोड़

हैदराबाद, गोपालपुरम पुलिस ने चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ अवैध सरोगेसी और शिशु बिक्री रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए महिला डॉक्टर सहित 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया। संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नॉर्थ जोन के पुलिस उपायुक्त एस. रश्मि पेरुमल ने बताया कि अवैध रूप से सरोगेसी और शिशु बिक्री के मामले में यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर चलाने वाली डॉ. ए. नम्रता (64), सिकंदराबाद में रहने वाले पी. जयंत कृष्णा (25), विशाखापट्टनम सेंटर की प्रबंधक सी. कल्याणी (40), लैब टेक्निशियन जी. चिन्ना राव (37), गांधी अस्पताल के चिकित्सक एन. सदानंदम (41) असम की डी. संतोषी (38), असम के दंपत्ति मोहम्मद अली अदिक (38) व नसरीन बेगम (25) को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि डॉ. नम्रता यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर की संचालिका है। वह हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापट्टनम और कोंडापुर में अपनी शाखाओं के माध्यम से यह अवैध कारोबार चला रही थी। वह 1995 से चिकित्सकीय कार्य में सक्रिय है और 1998 से फर्टिलिटी व आईवीएफ के नाम पर सरोगेसी की आड़ में नवजात शिशुओं की बिक्री कर रही थी। डीसीपी रश्मि पेरुमल ने बताया कि अगस्त 2024 में एक दंपत्ति संतान प्राप्ति के सिलसिले में सेंटर की गोपालपुरम स्थित शाखा पहुंचा था।

परीक्षण करने के बाद दंपत्ति को सरोगेसी का प्रस्ताव देकर विशाखापट्टनम भेजा गया। सेंटर द्वारा पीड़ितों को नौ महीनों तक भ्रूण विकास और जून 2025 में बच्चे का जन्म होने की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि बच्चा सौंपते समय क्लिनिक ने उसका झूठा जन्म प्रमाण पत्र भी दे दिया, जिसमें उसे दंपत्ति का जैविक पुत्र दर्शाया गया था, लेकिन बाद में डीएनए जांच में सच्चाई सामने आई कि बच्चे का दंपत्ति से कोई जैविक संबंध नहीं है। जब दंपत्ति ने क्लिनिक से सवाल किए, तो उन्हें धमकाया गया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस का रुख किया।

असम की महिला से कराया गया था बच्चा, माता-पिता भी गिरफ्तार

डीसीपी ने बताया कि मामले की जांच के तहत उक्त बच्चा असम मूल की महिला से होने का पता लगा, जिसे कुछ रुपये देकर हैदराबाद से विशाखापट्टनम भेजा गया था। इस सरोगेसी रैकेट में शामिल अन्य आरोपियों में डॉ. नम्रता का बेटा पेशे से वकील जयंत कृष्णा अस्पताल के भीतर ही अपना कार्यालय चलाते हुए विरोध करने वाले दंपत्तियों से निपट रहा था। उन्होंने बताया कि गोपालपुरम और विशाखापट्टनम की क्लीनिकों पर छापेमारी में आईवीएफ से जुड़ी मशीनें, दवाइयां, फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।

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डीसीपी ने बताया कि डॉ. नम्रता बेहद ही शातिर थी, पूर्व में रद्द हो चुके रजिस्ट्रेशन के बावजूद वह फर्जी डॉक्टर के नाम से क्लिनिक संचालित कर रही थी। डॉ. नम्रता के खिलाफ पूर्व में भी विशाखापट्टनम और गुंटूर के विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत करने वाले दंपत्ति ने बच्चा प्राप्त करने के बदले में लगभग 35 लाख रुपए खर्च किए थे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा गोपालपुरम सेंटर को सीज कर दिया गया। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई चल रही है।

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