प्रीस्कूल जाने से डर रहे बच्चे? ऐसे करें मदद

मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में प्रीस्कूल जाने वाले बच्चों के एक समूह पर किये गये नये शोध से संकेत मिलता है कि 40 प्रतिशत से अधिक बच्चे घबराहट संबंधी विकार का सामना कर रहे हैं। मोनाश यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में किये गये और ‘क्लिनिकल चाइल्ड साइकोलॉजी एंड साइकियाट्री’ पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में तीन और चार वर्ष के 545 बच्चों की माताओं से बातचीत के आधार पर निष्कर्ष निकाले गये।

अध्ययन में इस समूह के 48 प्रतिशत बच्चे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार से पीड़ित पाए गए जबकि 43 प्रतिशत बच्चे घबराहट या चिंता संबंधी विकार से ग्रस्त पाए गए। इनमें अभिभावकों से अलग होने की घबराहट, समाज में नए लोगों के साथ रहने का भय, विशिष्ट भय (उदाहरण के लिए अंधेरे से डर) और सामान्य चिंता शामिल हैं।

हालांकि, ये नतीजे चौंकाने वाले लगते हैं लेकिन शोधकर्ताओं ने कहा है कि इन्हें ‘‘प्रारंभिक’’ मानते हुए ‘‘सावधानी के साथ’’ देखा जाना चाहिए। अन्य शोध हमें बताते हैं कि छोटे बच्चों में कुछ हद तक इस प्रकार की घबराहट होना काफी सामान्य है। माता-पिता अपने बच्चों को इस घबराहट से कैसे बचा सकते हैं और आप यह कैसे समझ सकते हैं कि उन्हें और आपको बच्चे की मानसिक सेहत को दुरुस्त रखने के लिए अधिक मदद की जरूरत है?

कुछ घबराहट समय के साथ अपने-आप समाप्त हो सकती हैं

घबराहट किसी संभावित खतरे, अनिश्चितता या तनाव के प्रति स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। इसमें आम तौर पर घबराहट या बेचैनी की भावना शामिल होती है, साथ ही हृदय गति बढ़ने, मांसपेशियों में तनाव होने और पेट से जुड़ी दिक्कतें आदि हो सकती हैं।प्रीस्कूल जाने की आयु वाले बच्चों में कुछ हद तक घबराहट और फिक्र होना पूरी तरह अपेक्षित है। शोध बताते हैं कि हल्की चिंता या घबराहट सुरक्षात्मक भूमिका भी निभा सकती है। यह हमें संभावित खतरों की पहचान करना और उन्हें लेकर प्रतिक्रिया देना सिखाती है। प्रीस्कूल जाने वाले कुछ बच्चों की कुछ घबराहट समय के साथ अपने-आप समाप्त हो सकती हैं।

बच्चों में चिंता और घबराहट दिखने पर माता-पिता बहुत-सी चीजें कर सकते हैं। बच्चों की भावनाओं को लेकर उसने शांत माहौल में बात करें। जब आप देखें कि आपका बच्चा चिंतित है तो यह समझने में उनकी मदद करें कि उसके भीतर क्या चल रहा हो सकता है। उदाहरण के लिए, आप कह सकते हैं : ऐसा लगता है कि तुम आज तैराकी के लिए जाने को लेकर घबराहट महसूस कर रहे हो। यह स्वाभाविक है, नयी या मुश्किल चीजों को लेकर चिंतित महसूस करना गलत नहीं है।

धीमी गति से सांस लेना, बाहर समय बिताना या किसी पालतू पशु को सहलाना जैसी रणनीतियां घबराहट से निपटने में मदद कर सकती हैं। बच्चों को उनकी घबराहट बहुत बढ़ने से पहले ही इन रणनीतियों के बारे में बताएं। घबराहट अक्सर उस काम से बचने की प्रवृत्ति पैदा करती है जिसके कारण घबराहट होती है। हालांकि, बचने से उस समय घबराहट के लक्षण बहुत जल्दी कम हो जाते हैं लेकिन लंबे समय में यह उसे और बढ़ा देता है।

वेबसाइट ‘इमर्जिंग माइंड्स’ पर भी निशुल्क संसाधन उपलब्ध

कोशिश करें कि आप अपने बच्चे को उन चीजों में धीरे-धीरे शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें, जिनसे वह घबराता है। हालांकि, घबराहट और फिक्र ऐसी भावनाएं हैं जिनका अनुभव सभी बच्चे करते हैं, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिनसे पता चल सकता है कि आपके बच्चे को इनसे निपटने के लिए अतिरिक्त मदद की आवश्यकता है:

1. घबराहट आपके बच्चे को किंडरगार्डन, प्रीस्कूल, डे-केयर या अन्य जगह जाने या उनका आनंद लेने से रोक रही हो।

2. घबराहट आपके बच्चे की नींद या खानपान समेत उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही हो।

3. घबराहट आपके बच्चे या व्यापक रूप से परिवार के लिए गंभीर एवं लगातार तनाव और भावनात्मक बोझ का कारण बन रही हो।

4. घबराहट आपके बच्चे में बार-बार दिखाई दे रही हो और कुछ सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहती हो।

आपके बच्चे के चिकित्सक से बात करना अच्छा कदम है। वह सहायता दे सकते हैं और आपको उचित शिशु रोग विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक या किसी अन्य प्रकार के थेरेपिस्ट के पास भेज सकते हैं।

आप अपनी स्थानीय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य नर्स से भी बात कर सकते हैं। वह यह समझने में आपकी मदद कर सकती हैं कि आपके बच्चे को अतिरिक्त सहयोग से लाभ होगा या नहीं ।

माता-पिता के लिए ‘रेजिंग चिल्ड्रेन नेटवर्क’ (बच्चों के पालन-पोषण संबंधी संघीय सरकार की वेबसाइट) और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए समर्पित वेबसाइट ‘इमर्जिंग माइंड्स’ पर भी निशुल्क संसाधन उपलब्ध हैं।

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