कृत्रिम मेधा, डेटा विश्लेषण के बढ़ते उपयोग से बिजली क्षेत्र हो रहा है मजबूत : कैग मूर्ति
नयी दिल्ली, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के. संजय मूर्ति ने सोमवार को कहा कि बिजली क्षेत्र में कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा विश्लेषण के बढ़ते उपयोग के साथ क्षेत्र में जटिलताओं से निपटने की क्षमता मजबूत हो रही है। बिजली क्षेत्र पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कैग मूर्ति ने यह भी कहा कि पूरे बिजली क्षेत्र के लिए यह आवश्यक है कि बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिरता को केंद्रित और सतत प्रयासों के माध्यम से बढ़ाया और मजबूत किया जाए।
मूर्ति ने कहा कि पिछले दशक में बिजली क्षेत्र ने काफी प्रगति की है, क्योंकि बिजली उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में 1,824 अरब यूनिट हो गया, जो 2015-16 में 1,168 अरब यूनिट था। मूर्ति ने यह भी बताया कि पारेषण नेटवर्क में 70 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है और यह पांच लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक के स्तर को पार कर चुका है।
मूर्ति ने कहा कि बिजली उत्पादन के स्रोतों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी छह प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है, जो हरित ऊर्जा पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है। कैग द्वारा आयोजित इस एक दिन के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण क्षेत्र में हालिया विकास पर सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम मेधा और डेटा विश्लेषण के बढ़ते उपयोग से क्षेत्र की जटिलताओं से निपटने की क्षमता मजबूत हो रही है।’ (भाषा)
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