भारत ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों से देश छोड़ने को कहा
ईरान, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को अपने नागरिकों के लिए एक एडवाइज़री जारी की। इसमें ईरान में मौजूद अपने सभी भारतीय नागरिकों से किसी भी उपलब्ध ट्रांसपोर्ट के जरिए जल्द से जल्द ईरान छोड़ने को कहा गया है। इससे पहले 5 जनवरी की भी भारत सरकार ने ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के दौरान भारतीय नागरिकों से देश छोड़ने को कहा था। अब ताजा एडवाइजरी में कहा गया है कि हालात को देखते हुए ईरान में मौजूद छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक उपलब्ध साधनों के जरिए ईरान छोड़ दें।
नई एडवाइजरी में लिखा है, “भारत सरकार की 5 जनवरी 2026 को जारी एडवाइज़री को जारी रखते हुए और ईरान में बदलते हालात को देखते हुए जो भारतीय नागरिक अभी ईरान में हैं…स्टूडेंट, तीर्थयात्री, बिज़नेस करने वाले और टूरिस्ट उन्हें सलाह दी जाती है कि वे कमर्शियल फ़्लाइट्स समेत ट्रांसपोर्ट के मौजूद किसी भी साधनों से ईरान से निकल जाएं।” बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ईरान पर अमेरिका कभी भी हमला कर सकता है। हालांकि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच न्यूक्लियर डील के लिए बातचीत चल रही है। अगले राउंड की बातचीत गुरुवार को जेनेवा में होनी है।
ओमानी विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने रविवार को कहा कि अमेरिका-ईरान बातचीत का अगला राउंड गुरुवार को जिनेवा में होगा। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म x पर कहा, “यह पुष्टि करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका-ईरान बातचीत अब इस गुरुवार को जिनेवा में तय है, जिसमें डील को फाइनल करने की दिशा में और आगे बढ़ने की सकारात्मक कोशिश की जाएगी।”
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने रविवार को फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने एक सस्टेनेबल न्यूक्लियर एग्रीमेंट हासिल करने के लिए कंस्ट्रक्टिव एंगेजमेंट और बातचीत का रास्ता अपनाने के महत्व पर जोर दिया।
इससे पहले शुक्रवार को एक अमेरिकी मीडिया आउटलेट के साथ एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा था कि तेहरान दो से तीन दिनों के अंदर अमेरिका के साथ एक संभावित न्यूक्लियर डील का ड्राफ्ट तैयार करेगा। फिर इसे अमेरिकी डेलीगेशन को सौंपेगा। सीबीएस न्यूज के एक इंटरव्यू में अराघची ने बातचीत के जरिए वॉशिंगटन के साथ अपने मतभेदों को सुलझाने की तेहरान की इच्छा दोहराई। अराघची ने कहा कि वह गुरुवार को जिनेवा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ से मिल सकते हैं।
संकेत दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच अभी भी डिप्लोमैटिक हल निकालना मुमकिन है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक संभावित डील के हिस्सों पर काम कर रहे हैं। गुरुवार को डील के शुरुआती ड्राफ्ट पर चर्चा कर सकते हैं। अराघची ने कहा कि डील में ईरान का शांतिपूर्ण न्यूक्लियर प्रोग्राम शामिल होना चाहिए और साथ ही ईरान के खिलाफ अमेरिका के बैन हटाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका 2015 में तेहरान और दुनिया की ताकतों के बीच हस्ताक्षर किए गए न्यूक्लियर डील से बेहतर परमाणु समझौता कर सकते हैं।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि पिछली बातचीत में शामिल पार्टियों ने बहुत विस्तार में बात की थी। इस बार इतनी डिटेल्स की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हम आधारभूत चीजों पर सहमत हो सकते हैं। साथ ही यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम शांतिपूर्ण हो और हमेशा शांतिपूर्ण रहे। साथ ही और बैन हटाए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो तेहरान को अपनी रक्षा करने का अधिकार है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “ईरान इस इलाके में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। हाल की बातचीत में व्यवहारिक प्रस्ताव का लेन-देन हुआ और इससे अच्छे संकेत मिले। हालांकि हम अमेरिका के एक्शन पर करीब से नजर रख रहे हैं। किसी भी संभावित स्थिति के लिए सभी जरूरी तैयारी कर ली है।” ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिना नाम बताए कहा कि दोनों पक्षों को प्रतिबंध हटाने के लिए एक लॉजिकल टाइमटेबल पर पहुंचने की जरूरत है।(भाषा)
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