इंडियन बैंक का राजभाषा सम्मेलन संपन्न
हैदराबाद, इंडियन बैंक द्वारा लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में प्रौद्योगिकी-संचालित परिवर्तन की भावी संकल्पनाएँ विषयक अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। आज जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री मालिनी अवस्थी, विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह एवं डॉ. छबिल कुमार मेहेर, उप निदेशक (कार्यान्वयन), क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, उत्तर-2, भारत सरकार की उपस्थिति रही।
सम्मेलन की अध्यक्षता ब्रजेश कुमार सिंह, कार्यपालक निदेशक, इंडियन बैंक द्वारा की गई। अवसर पर वी.एन. माया, मुख्य महाप्रबंधक, कॉर्पोरेट कार्यालय सुधीर कुमार गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, एफजीएमओ, लखनऊ, पंकज कुमार सिंह, उप महाप्रबंधक व अंचल प्रबंधक, लखनऊ, बीना कुमारी एमपी, प्राचार्य, स्टाफ कॉलेज, लखनऊ, राजेश कुमार सिंह, सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा) कॉर्पोरेट कार्यालय एवं देश के अन्य बैंकों के प्रतिभागी, अखिल भारतीय हिन्दी निबंध प्रतियोगिता के प्रतिभागी, पुरस्कार विजेताओं एवं इंडियन बैंक के राजभाषा अधिकारियों की उपस्थिति रही।
हिंदी को संस्कृति जोड़ने वाली सशक्त भाषा बताया, बैंकिंग में बढ़ रही भूमिका
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि भाषा संस्कृति की वाहिका होती है। उन्होंने कहा कि हिन्दी में एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति को जोड़ने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि राजभाषा के प्रचार-प्रसार में इंडियन बैंक अपनी भूमिका गंभीरता से निभा रहा है। पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह ने कहा कि राजभाषा में आंकड़ों के बजाय व्यवहार्यता पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञापन एवं व्यापार के लिए आज हिंदी भाषा को सबसे सशक्त भाषा माना जाता है।

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए श्री ब्रजेश कुमार सिंह जी ने कहा कि स्वराज, स्वभाषा के साथ ही हमारे देश की अन्य भाषाएँ भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारा बैंक भारत सरकार की राजभाषा नीति के अनुपालन एवं कार्यान्वयन हेतु सदैव प्रतिबद्ध एवं तत्पर रहा है। भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. छबिल कुमार मेहेर जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भाषा सभी को जोड़ने का काम करती है। इसी के साथ उन्होंने लोगों को अपनी संस्कृति की ओर लौटने का संदेश दिया।
इंडियन बैंक कॉर्पोरेट कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक सुश्री वी. एन. माया ने कहा कि इंडियन बैंक का उद्देश्य केवल वित्तीय सेवा प्रदान करना नहीं है, बल्कि, ग्राहकों के साथ आत्मीय संबंध बनाना भी है। उन्होंने कहा कि भाषा, संस्कृति और परम्पराओं में भिन्नता होते हुए भी हिंदी हमें साझा पहचान देती है। श्री सुधीर कुमार गुप्ता जी ने कहा कि आईटी के आधुनिक साधनों ने भाषायी दीवार को बहुत हद तक कम किया है।
चार सत्रों में सम्मेलन, विजेताओं को सम्मान
इन साधनों के प्रयोग ने हिंदी को न केवल सरल एवं त्वरित बनाया है, बल्कि, कार्यालयीन उत्पादकता एवं व्यावहारिकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। इस सम्मेलन में अखिल भारतीय अंतर-बैंक हिन्दी निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं सहित राजभाषा कार्यान्वयन में उत्कृष्ट कार्यनिष्पादन एवं उत्कृष्ट गृह पत्रिका के प्रकाशन के लिए विभिन्न अंचल कार्यालयों को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मेलन में इंडियन बैंक द्वारा लगाई गई राजभाषा संबंधी प्रदर्शनी की अतिथियों ने विशेष रूप से सराहना की।
सम्मेलन चार सत्रों में सम्पन्न हुआ। इसके अंतर्गत प्रथम सत्र में अतिथियों द्वारा पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। द्वितीय सत्र में डॉ. छबिल कुमार मेहेर, उप निदेशक (कार्यान्वयन), क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, उत्तर-2, भारत सरकार द्वारा राजभाषा कार्यान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। साथ ही राजभाषा कार्यान्वयन में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया गया।
तृतीय सत्र में विजेताओं द्वारा पीपीटी के माध्यम से भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में प्रौद्योगिकी-संचालित परिवर्तन की भावी संकल्पनाएँ विषय पर प्रस्तुति दी गई। अंतिम सत्र में राजेंद्र वर्मा, उप निदेशक (सेवानिवृत) भारत सरकार द्वारा राजभाषा अधिकारियों को राजभाषा कार्यान्वयन में डिजिटल टूल्स की उपयोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। राजेश कुमार सिंह, सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा) कॉर्पोरेट कार्यालय, चेन्नई द्वारा सम्मेलन का सफल संचालन एवं समन्वय किया गया।
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