भारतीय नौसेना दिवस : भारतीय नौसेना समुद्री सीमाओं के अटल प्रहरी

हर साल 4 दिसंबर को पूरा देश गर्व से भारतीय नौसेना दिवस मनाता है। यह दिन केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि हमारे नौसैनिकों के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति को सलाम करने का अवसर है। भारतीय नौसेना की स्थापना 1934 ई में रॉयल इंडिया नेवी के नाम से ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा की गई थी। बाद में, भारत की आजादी के नौसेना का पुर्नगठन कर भारतीय नौसेना नाम दिया गया।

जब 4 दिसंबर 1971 की रात को भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत कराची बंदरगाह पर इतना करारा हमला किया कि पाकिस्तानी नौसेना को भारी क्षति हुई। यह न केवल युद्ध का निर्णायक मोड़ था, बल्कि विश्व की नौसेनाओं में भारत की ताकत का पहला बड़ा प्रदर्शन भी था। इसके बाद ऑपरेशन पायथन ने भी पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया। इन दोनों सफल अभियानों की स्मृति में 4 दिसंबर को नौसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है।

आज भारतीय सेना विश्व की चौथी सबसे बड़ी और एशिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना में शुमार है। हमारे देश का 95 प्रतिशत व्यापार और 90 प्रतिशत से अधिक तेल आयात समुद्र के रास्ते ही आता है। ये समुद्री जल मार्ग भारत की अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा हैं। इन्हीं जल मार्गों की रक्षा करने वाली शक्ति है हमारी भारतीय नौसेना।

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आपदा राहत अभियानों में नौसेना ने मानवता की सेवा और जीवन बचाया

हिंद महासागर में हर साल लाखों जहाज गुजरते है और इनमें से अधिकतर भारत के जल क्षेत्र से होकर गुजरते है, जिस पर भारतीय नौसेना की कड़ी निगरानी रहती है। आईएनएस पांत, आईएनएस पामादित्य जैसे विमानवाहक पोत और परमाणु पनडुब्बियाँ दिन-रात गश्त करती हैं ताकि कोई दुश्मन या आतंकवादी प्रवेश न कर सके।

सोमालिया के तट से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक समुद्री लुटेरे जहाज़ों को लूटते थे। भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल होकर इस खतरे को लगभग खत्म कर दिया। आज हिंद महासागर दुनिया के सबसे सुरक्षित समुद्री क्षेत्रों में से एक है। इसका पूरा श्रेय हमारी नौसेना को जाता है।

अम्बिका कुशवाहा अम्बी

आज भी हमारी नौसेना के पास इतनी ताकत है कि जरूरत पड़ी तो हिंद महासागर में किसी भी दुश्मन देश की नौसेना को महीनों तक घेरकर रख सकती है। आईनएस अरिहंत और आईनएस पा जैसी परमाणु पनडुब्बियाँ दुश्मन को दूर से ही चेतावनी देती हैं। हमारी नौसेना सुरक्षा के साथ ही मानवता के लिए भी तैयार रही है। 2004 की सुनामी हो, 2018 की केरल बाढ़ हो या 2024 में बांग्लादेश में पावात, सबसे पहले राहत सामग्री लेकर भारतीय नौसेना के जहाज़ पहुँचे। समुद्र सेतु और ऑपरेशन राहत जैसे अभियानों में हमारी नौसेना ने लाखों लोगों की जान बचाई। नौसेना हमारे देश की रीढ़ है, जिसकी समुद्री शक्ति के बिना न तो आर्थिक संप्रभुता संभव है और न ही सामरिक स्वतंत्रता।

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