भारत की पहली आतंकवाद-रोधी नीति ‘प्रहार’ जारी

नई दिल्ली, सरकार ने सोमवार को देश की पहली आतंकवाद-रोधी नीति प्रहार को जारी किया। इसमें कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर आधारित एक बहुस्तरीय रणनीति तय की गई है, जो खुफिया जानकारी के आधार पर चरमपंथी हिंसा की रोकथाम और उसे निष्क्रिय करने पर केंद्रित है।

इसका उद्देश्य आतंकवादियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थकों को धन, हथियार और सुरक्षित ठिकानों तक पहुँच से वंचित करना है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई नीति भारत या विदेश से उत्पन्न होने वाले आतंकी खतरों का मुकाबला करने के लिए सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। ये सात स्तंभ रोकथाम, प्रतिक्रिया, आंतरिक क्षमताओं को एकीकृत करना, मानवाधिकार और कानून के शासन पर आधारित प्रक्रियाएँ, कट्टरता सहित आतंकवाद में सहायता करने वाली परिस्थितियों को दूर करना, आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को संरेखित और आकार देना और समग्र समाज दृष्टिकोण को अपनाना शामिल है।

आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल पर कड़ा संकेत

नीति दस्तावेज में पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा गया कि भारत के निकटवर्ती इलाकों में अस्थिरता का इतिहास रहा है, जिसके कारण अक्सर अराजक क्षेत्र उत्पन्न हुए हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र के कुछ देशों ने कभी-कभी आतंकवाद को राज्य नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया है। इसमें कहा गया कि इसके बावजूद, भारत आतंकवाद को किसी विशिष्ट धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता है। भारत ने हमेशा आतंकवाद और किसी भी तत्व द्वारा किसी भी घोषित या अघोषित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इसके उपयोग की स्पष्ट और निर्विवाद रूप से निंदा की है।

नीति दस्तावेज में कहा गया है कि भारत आतंकवाद के पीड़ितों के साथ लगातार खड़ा रहा है और इस पर अडिग है कि दुनिया में हिंसा का कोई औचित्य नहीं हो सकता। यही सैद्धांतिक दृष्टिकोण आतंकवाद के खिलाफ नई दिल्ली की कतई बर्दाश्त नहीं नीति का आधार है। दस्तावेज में कहा गया कि भारत लंबे समय से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित रहा है, जिसमें जेहादी आतंकवादी संगठन और उनके सहयोगी संगठन भारत में आतंकी हमलों की योजना बनाने, समन्वय करने, सुविधा प्रदान करने और उन्हें अंजाम देने में संलिप्त हैं।

भारत अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) जैसे वैश्विक आतंकवादी समूहों के निशाने पर रहा है, जो स्लीपर सेल के माध्यम से देश में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। नीति में कहा गया है कि विदेशी धरती से संचालित आतंकवादियों ने भारत में हिंसा को बढ़ावा देने की साजिशें रची हैं, और उनके लिए काम करने वाले पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और हमलों को अंजाम देने के लिए ड्रोन सहित नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।

आतंकी समूहों के आपराधिक नेटवर्क से बढ़ते संपर्क का खुलासा

इसमें कहा गया कि आतंकवादी समूह भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने की सहूलियत के लिए साजो समान प्राप्त करने और भर्ती के वास्ते संगठित आपराधिक नेटवर्क से संपर्क कर रहे हैं। प्रचार, संचार, वित्तपोषण और आतंकी हमलों को निर्देशित करने के लिए ये आतंकी समूह सोशल मीडिया मंचों के साथ-साथ इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन का भी उपयोग करते हैं। इस नीति में तकनीकी विकास का उल्लेख किया गया है, जो आतंकवादियों को छिपने में मदद करते हैं, जिससे उनकी नापाक योजनाओं का पता लगाना या उनके धन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

दस्तावेज में कहा गया कि कूट संदेश, डार्क वेब, क्रिप्टो वॉलेट आदि जैसी तकनीकी प्रगति से इन समूहों को छिपकर काम करने की सहूलियत होती है। सीबीआरएनईडी (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक, डिजिटल) सामग्री तक पहुँचने और उसका उपयोग करने के आतंकवादी प्रयासों को बाधित करना/रोकना आतंकवाद विरोधी (सीटी) एजेंसियों के लिए एक चुनौती बना हुआ है।

सरकारी और गैर सरकारी अभिकर्ताओं द्वारा घातक उद्देश्यों के लिए ड्रोन और रोबोट तकनीक के दुरुपयोग का खतरा भी चिंता का एक अन्य क्षेत्र बना हुआ है, जबकि आपराधिक हैकर और देशों की ओर से किए जाने वाले साइबर हमलों के माध्यम से भारत को निशाना बनाना जारी रखे हुए हैं। इसमें खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने के लिए भारत के दृष्टिकोण को सक्रिय और खुफिया जानकारी पर आधारित बताया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि देश को वायु, भूमि और जल तीनों क्षेत्रों में जोखिमों का सामना करना पड़ता है। नीति में आतंकवादी घटनाओं को रोकने के लिए कार्यकारी एजेंसियों द्वारा खुफिया जानकारी जुटाने और प्रसारित करने को प्राथमिकता दी गई है। इसमें भारतीय कानूनों के तहत आतंकवाद-वित्तपोषण नेटवर्क को निष्क्रिय करने पर विशेष जोर दिया गया है। (भाषा)

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