भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र को नुकसान : महेश कुमार गौड़

हैदराबाद, तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से तेलंगाना के कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि देश में कृषि क्षेत्र पहले से ही कठिन स्थिति में है। किसान अपनी फसलों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से 30 से 40 प्रतिशत कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में यदि भारतीय बाजार को पूरी तरह खोल दिया गया तो भारी सब्सिडी प्राप्त करने वाले सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में भर जाएँगे और इससे किसानों की आजीविका पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।

गांधी भवन में आज तेलंगाना किसान कांग्रेस की बैठक में टीपीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़, मंत्री अनुसूया सीताक्का एवं अन्य नेताओं ने भाग लिया। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के कृषि और व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव, किसानों की समस्याओं, कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों के लिए सरकार द्वारा लागू की जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

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औसतन 66,314 डॉलर की वार्षिक सब्सिडी का दावा

बैठक में बताया गया कि कृषि संसाधन प्रबंधन सर्वे के अनुसार अमेरिकी किसानों को हर वर्ष भारी सब्सिडी दी जाती है। एक अमेरिकी किसान को औसतन प्रति वर्ष लगभग 66,314 डॉलर की सब्सिडी मिलती है, जिससे उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से सुरक्षा मिलती है। वहीं ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट के अनुसार 2000-2001 से 2024-25 के बीच भारतीय किसानों को लगभग 111 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

महेश कुमार गौड़ ने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में दालों का आयात भी बढ़ाया है। वर्ष 2024-25 में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की दालें आयात की गईं, जिनमें से 812 करोड़ रुपये की दालें अमेरिका से आयीं। भारत मुख्य रूप से कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से दालों का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों के कारण अमेरिका के सोयाबीन, मक्का और कपास जैसे कृषि उत्पादों से संबंधित निर्णय वैश्विक बाजार कीमतों को प्रभावित करते हैं।

आयात शुल्क हटने से किसानों को भारी नुकसान

इससे भारत और विशेष रूप से तेलंगाना में फसलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। यदि अमेरिका से कपास का निर्यात बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतें गिर सकती हैं। तेलंगाना में कपास एक प्रमुख व्यावसायिक फसल है, इसलिए बाजार मूल्य से नीचे जाने पर किसानों की आय कम हो जाएगी। पिछले वर्ष सितंबर से दिसंबर के बीच कपास आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क हटाने के कारण सस्ते कपास की बड़ी मात्रा में आवक हुई, जिससे स्थानीय किसानों को प्रति क्विंटल 1000 से 1500 रुपये तक का नुकसान हुआ।

बैठक में बताया गया कि भारत अपनी फसलों को अमेरिका निर्यात करता है तो कई कारणों से उन्हें अस्वीकार कर दिया जाता है, जबकि अमेरिकी उत्पाद बिना कठोर नियमों के भारत में आ रहे हैं। वर्तमान में भी तेलंगाना के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने के कारण नुकसान झेल रहे हैं। केवल कपास, मक्का, सोयाबीन और ज्वार जैसी फसलों में एमएसपी न मिलने से किसानों को लगभग 5286 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

बैठक में मांग की गई कि भारत-अमेरिका समझौते के तहत कपास, मक्का, सोयाबीन और ज्वार की आयात व्यवस्था को रद्द किया जाए। साथ ही जीन परिवर्तित खाद्य उत्पादों के आयात को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। कांग्रेस किसान संगठन ने घोषणा की कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ उगादि के बाद इंदिरा पार्क के पास बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

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