गोदावरी पुष्कर के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर कार्रवाई शुरू करें : डीजीपी
हैदराबाद, पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने कहा कि गोदावरी पुष्कर को भव्य रूप से आयोजित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर सही कदम उठाए जाने चाहिए। इस संबंध में आज तेलंगाना पुलिस मुख्यालय में अलग-अलग जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस सम्पन्न हुई, जिसमें धर्मस्व विभाग की प्रधान सचिव शैलजा रामअय्यर और अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।
वीडियो कॉन्फ्रेंस को संबोधित हुए, पुलिस महानिदेशक ने अधिकारियों को इस बड़े आयोजन के संबंध में सुरक्षा, यातायात कंट्रोल और भक्तों की सुविधाओं के बारे में निर्देश दिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगले साल 26 जून से 7 जुलाई तक होने वाले गोदावरी पुष्कर हेतु कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में गोदावरी नदी बहती है, वहाँ के पुलिस अधिकारी अभी से पुष्कर के कार्यों पर ध्यान देकर व्यवस्थाओं को तेज करें।
बड़े पुष्कर आयोजनों में सुरक्षा के लिए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेक्नोलॉजी
तेलंगाना राज्य बनने के बाद हुए पहले गोदावरी पुष्कर के दौरान संयुक्त जिले थे, अब जिलों की संख्या बढ़ने को देखते हुए अधिकारियों को फील्ड लेवल स्तर के कार्यों की पूरी रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हाल ही में हुए मेडाराम जातरा में इस्तेमाल की गई टेक्निकल स्किल और अनुभव का इस्तेमाल पुष्कर में भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन पुष्कर के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों के आने की संभावना है। इस भीड़ को ध्यान में रखते हुए राज्य में पुष्करों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े पैमाने पर स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
महानिदेशक ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम, गाड़ी नंबर पहचानने वाले एएनपीआर कैमरे और ड्रोन सर्विलांस जैसी सुविधाएँ लगाई जानी चाहिए। भीड़ पर नज़र रखने के लिए वीडियो एनालिटिक्स और हीट मैप जैसी टेक्नोलॉजी जोड़ी जानी चाहिए, राज्य-स्तरीय रियल-टाइम कमांड और कंट्रोल सेंटर के ज़रिए लगातार निगरानी रखी जानी चाहिए और प्रयागराज ताथ नासिक कुंभ मेले की तरह हज़ारों कैमरों से मजबूत सुरक्षा दी जानी चाहिए। भक्तों के लिए खास तौर पर एक यूनिफाइड मोबाइल ऐप और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
नदी की पानी गुणवत्ता और प्रदूषण की ऑनलाइन निगरानी होगी लागू
आपातकालीन सेवाओं के लिए एम्बुलेंस और फायर वाहन ट्रैकिंग सिस्टम जैसी सुविधाएँ तैयार की जानी चाहिए। शैलजा रामअय्यर ने कहा कि अधिकारियों को निजामाबाद, निर्मल, मंचीरियाल, जग्तियाल, पेद्दापल्ली जयशंकर भूपलपल्ली, मुलुगु, भद्राद्री कोत्तागुडेम और अन्य जिलों में काम शुरू करना चाहिए, जहाँ गोदावरी नदी बहती है। समय-समय पर नदी के पानी की गुणवत्ता, वायु और ध्वनि प्रदूषण की ऑनलाइन निगरानी के लिए सिस्टम स्थापित किए जाने चाहिए।
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महानिदेशक ने कहा कि पीने के पानी की गुणवत्ता की निगरानी, स्मार्ट डिब्बे, आरएफआईडी टैग वाले स्वच्छता वाहन और अस्थायी सौर ग्रिड पुष्कर की विशेषताएँ होंगी। उन्होंने सुझाव दिया कि भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उचित योजना तैयार की जानी चाहिए। अवसर पर कानून और व्यवस्था के अतिरिक्त डीजीपी महेश एम. भागवत, आईजीपी एस. चंद्रशेखर रेड्डी, गजराव भूपाल उपस्थित थे।
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