इस्लामाबाद में आज ईरान-अमेरिका सुलह वार्ता

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में आज अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाने के साथ साथ शांति वार्ता पर एतिहासिक बैठक होने वाली है। ईरानी प्रतिनिधि मंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है और कुछ देर में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी पहुंच जाएगा। हालांकि ईरान ने बातचीत शुरू करने से पहले लेबनान में युद्धविराम की शर्त रखी थी लेकिन फिलहाल वो विवाद साइड रख दिया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने टीवी पर दिए अपने भाषण में कहा कि अमेरिका और ईरान दोनों देशों के नेता शनिवार को बातचीत के लिए इस्लामाबाद में मौजूद रहेंगे। उन्होंने इसे शांति की दिशा में आगे बढ़ने का एक बहुत ही अहम मौका बताया।
ईरानी टीम का नेतृत्व संसद के स्पीकर बाकेर गालिबफ़ और शरीफ कर रहे हैं और ये प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने किया है। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं।
अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल में कौन कौन
- जेडी वेंस- अमेरिका के वर्तमान उपराष्ट्रपति हैं और इस वार्ता में अमेरिकी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वेंस पूर्व मरीन हैं और विदेश नीति में सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं। जेडी वेंस ने युद्धविराम में अहम भूमिका निभाई थी। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उन्होंने ही डोनाल्ड ट्रंप को युद्धविराम पर तैयार होने के लिए राजी किया था। ये अनावश्यक रूप से सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ रहते हैं।
- स्टीव विटकॉफ- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत हैं। विटकॉफ एक अनुभवी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। वे पेशे से एक रियल एस्टेट दिग्गज हैं और राष्ट्रपति के बेहद भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं। उन्हें जटिल सौदों को सुलझाने में महारत हासिल है जिसे वे अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में लागू कर रहे हैं। हालांकि ईरान के साथ शुरूआती वार्ता के दौरान इनपर नाकामी के आरोप लगे थे।
- जेरेड कुशनर- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान उनके सलाहकार के रूप में कुशनर ने इजरायल और अरब देशों के बीच ‘अब्राहम एकॉर्ड्स’ कराने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। हालांकि वे आधिकारिक तौर पर सरकार में नहीं हैं लेकिन मध्य-पूर्व के नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों के कारण उन्हें इस वार्ता में शामिल किया गया है।
- ब्रैड कूपर- एडमिरल ब्रैड कूपर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर के रूप में सैन्य रणनीति के प्रमुख विशेषज्ञ हैं। उन्होंने लाल सागर और खाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व किया है जिससे उन्हें ईरान की सैन्य क्षमताओं की गहरी समझ है।
ईरान की तरफ से प्रतिनिधिमंडल में कौन कौन
- मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़- ईरान की संसद जिसे मजलिस कहा जाता है उसके स्पीकर हैं। फिलहाल ईरान के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक हैं। वे ईरान-इराक युद्ध के दौरान एक प्रमुख कमांडर रहे थे और बाद में तेहरान के मेयर के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित की। ग़ालिबफ़ को ईरान के कट्टरपंथी और व्यावहारिक गुटों के बीच एक सेतु माना जाता है। उनकी जिम्मेदारी ईरान की संप्रुभता से किसी भी तरह का समझौता करना नहीं होगा।
- सैय्यद अब्बास अराघची- ईरान के विदेश मंत्री अरागची एक माहिर डिप्लोमेट माने जाते हैं। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) की लंबी बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी जिससे उन्हें पश्चिमी वार्ताकारों के काम करने के तरीके की बारीकी से समझ है। वे अंग्रेजी और अंतरराष्ट्रीय कानून के अच्छे जानकार हैं। इस वार्ता में वे ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग को प्रमुखता से कर सकते हैं।
- माजिद तख्त रवांची- ईरान के उप-विदेश मंत्री हैं। वो संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि भी रह चुके हैं। उन्हें पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका की राजनीति और कूटनीति का जानकार माना जाता है। वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संधियों के मसौदे तैयार करने में माहिर हैं। वार्ता की मेज पर वे कानूनी पहलुओं और तकनीकी बारीकियों को स्पष्ट करने का जिम्मा होगा।
- मोहम्मद बाकिर जोलगद्र- ये ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव हैं जो ईरान की सुरक्षा नीतियों को निर्धारित करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। वे पूर्व में IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) के उप-प्रमुख रह चुके हैं। जिसका मतलब है कि उनके पास ईरान की सैन्य और खुफिया रणनीतियों का पूरा नियंत्रण है।
पाकिस्तान की तरफ से कौन कौन
- शहबाज शरीफ- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं और ये पाकिस्तान की तरफ से बातचीत में शामिल होंगे। शरीफ प्रशासन इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की छवि सुधारने के लिए इसे एक बड़े कूटनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है। वे अमेरिका और ईरान, दोनों के साथ पाकिस्तान के संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मकसद पाकिस्तान को इस क्षेत्र में शांति के एक मुख्य केंद्र के रूप में पेश करना है।
- असीम मुनीर- पाकिस्तान के सेना प्रमुख हैं और फिलहाल पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली शख्स हैं। वो आईएसआई के भी प्रमुख रह चुके हैं। असीम मुनीर को बेहत चालाक शख्स माना जाता है और वो पाकिस्तान के उन पूर्व जनरलों जैसे ही हैं जिन्होंनें अफगानिस्तान युद्ध के समय अमेरिका को बेवकूफ बनाया था। उन्होंने इस वक्त उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस को अपने झांसे में ले रखा है।
- इशाक डार- पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप-प्रधानमंत्री हैं। उन्हें नवाज शरीफ परिवार का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। डार कूटनीति के साथ-साथ आर्थिक पहलुओं को भी समझते हैं जो इस वार्ता के लिए महत्वपूर्ण है।
- मोहम्मद असीम मलिक- पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) हैं और हाल ही में ISI के महानिदेशक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मलिक को रणनीतिक योजना बनाने और खुफिया जानकारी का विश्लेषण करने में विशेषज्ञता हासिल है। इस वार्ता में उनकी भूमिका सबसे संवेदनशील है क्योंकि वे अमेरिका और ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के बीच विश्वास बहाली का काम कर रहे हैं। (भाषा)
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