इस्लामाबाद वार्ता से पहले ईरान की अमेरिका के सामने शर्तें

नई दिल्ली। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच आज शांति वार्ता होने वाली है। दो हफ्ते के सीजफायर के एलान के बाद इसे अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान में मुलाकात करेंगे। इस बातचीत में ईरान और अमेरिका, दोनों के लक्ष्य अलग-अलग हैं।
तेहरान चाहता है कि शांति समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाए और होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी उसका नियंत्रण बना रहे। वहीं वॉशिंगटन, तेहरान के परमाणु संवर्धन और सैन्य क्षमताओं को सीमित करना चाहता है।
यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक अस्थाई संघर्ष विराम पर सहमति के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है।
शांति वार्ता से पहले दोनों पक्षों की अपनी-अपनी मांग
क्या हैं ईरान की मांगें?
- ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, संघर्ष विराम वार्ता के मामले में दोनों देशों के लक्ष्य अलग-अलग हैं। ईरान चाहता है कि अमेरिका अपने सभी सैन्य ठिकानों से अपनी सेना हटा ले। वह अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को जारी भी रखना चाहता है।
- ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर प्रति बैरल 1 डॉलर का शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। कई देशों ने इस शर्त का विरोध किया है, लेकिन यह शर्त लागू होती है तो इससे इस क्षेत्र में ईरान को काफी आर्थिक और रणनीतिक बढ़त मिल जाएगी।
- इसके अलावा, ईरान एक ‘अनाक्रमण संधि’ भी चाहता है, ताकि, अमेरिका की ओर से भविष्य में होने वाले हमलों को रोका जा सके। साथ ही, वह चाहता है कि इस क्षेत्र से अमेरिका की सेना पूरी तरह हट जाए और लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी लड़ाई समाप्त हो जाए।
- ईरान चाहता है कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए जाएं और वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण बनाए रखे, जिसमें संवर्धन और आर्थिक नीति शामिल है।
- तेहरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखने पर अड़ा है और इसे गैर-समझौता योग्य बताता है। वह सभी अमेरिकी प्रतिबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को भी हटवाना चाहता है। साथ ही, वह पुनर्निमाण सहायता और हमलों के लिए हर्जाना भी चाहता है।
क्या हैं अमेरिका की मांगे?
- अमेरिका, ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं पर अंकुश लगाना चाहता है। वॉशिंगटन ने तेहरान से यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से बंद करने और संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को छोड़ने पर जोर दिया है।
- वॉशिंगटन यह भी चाहता है कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को कम करे और क्षेत्र में सहयोगी आतंकवादी ग्रुप्स का समर्थन बंद करे।
- अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध वैश्विक पहुंच भी चाहता है। अमेरिका एक स्थिर समझौते पर पहुंचने तक क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखना चाहता है।
अब, समस्या यह है कि दोनों देशों के रुख एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं, यही कारण है कि युद्धविराम नाजुक बना हुआ है और एक स्थायी समझौता हासिल करना मुश्किल होगा।(भाषा)
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