दो गारंटियों को पूरा करने में लगेगा समय : रेवंत रेड्डी

नई दिल्ली/ हैदराबाद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भाजपा नीत मोदी सरकार पर उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुनर्सीमांकन के बहाने दक्षिण भारत को राजनीतिक रूप से समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरा दक्षिण भारत इसके खिलाफ खड़ा होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि वे 2034 तक तेलंगाना के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उसके बाद पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उसका निर्वाह करेंगे।

दिल्ली समिट में परिसीमन पर बोलते रेवंत रेड्डी

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी दिल्ली में टीवी9 द्वारा आयोजित एक समिट में भाग ले रहे थे। उन्होंने कहा कि वे नेताओं के नेता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के नेता हैं। कार्यकर्ताओं और जनता ने उन्हें अपना नेता बनाया है। इसलिए हमेशा कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को आगे लाने की कोशिश करते हैं। जनता के लिए अच्छे और कल्याणकारी काम होंगे तो जनता खुद साथ खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि तेलंगाना की भावनाओं को समझना जरूरी है। केवल यह सोचकर काम नहीं करना चाहिए कि क्या मिलेगा, बल्कि भावना से काम करना चाहिए। यहाँ भरोसे और अपनत्व की भावना बहुत मजबूत है।

परिसीमन मुद्दे पर दक्षिण को एकजुट होने की अपील

यहाँ के लोग भावुक हैं। लोगों ने उन्हें भाई, दोस्त और परिवार समझकर समर्थन दिया है। लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और 50 प्रतिशत वृद्धि से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में रेवंत ने कहा कि परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण भारत को एकजुट होना होगा। दक्षिण के साथ राजनीतिक भेदभाव हो रहा है। केंद्र में प्रमुख मंत्रालयों में दक्षिण की भागीदारी कम है। वेंकैया नायडू को राष्ट्रपति बनने का मौका नहीं दिया गया। भाजपा कहती कुछ और है और करती कुछ और है।

कर्नाटक और तेलंगाना से नेता जीतकर आए, लेकिन उन्हें बड़े पद नहीं मिले। दूसरी ओर कांग्रेस ने हमेशा दक्षिण भारत को उचित प्रतिनिधित्व दिया है, लेकिन पिछले 12 वर्षों में दक्षिण को न्याय नहीं मिला। भाजपा के भीतर भी अपने नेताओं पर भरोसा नहीं है, जो देश के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों में वृद्धि से उत्तर और दक्षिण के बीच अंतर और बढ़ेगा। उत्तर भारत अपने दम पर सरकार बना सकता है और दक्षिण की भूमिका कम हो जाएगी। यह स्थिति दक्षिण भारत के लिए चिंता की बात है। इसलिए सभी दक्षिणी राज्यों को एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।

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केसीआर से निजी दुश्मनी नहीं, सिर्फ राजनीतिक मुकाबला

रेवंत ने कहा कि कांग्रेस की सोच देश, जनता और पार्टी के क्रम में है, जबकि भाजपा पहले पार्टी, फिर कार्यकर्ता और अंत में देश को रखती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को पूरे देश का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, न कि केवल एक राज्य का। रेवंत ने कहा कि केसीआर से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, वे केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। केसीआर की समस्याएँ उनके परिवार से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि रामायण और महाभारत में भी देखा गया है कि जब खलनायक ताकतवर होता है, तो नायक उभरकर सामने आता है। उसी तरह जनता ने मुझे आगे बढ़ाया है और मुझे हीरो बनाया है।

रेवंत ने कहा कि कांग्रेस ने हाल के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि बीआरएस और भाजपा फेवीकॉल के जोड़ की तरह मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस उनका मुकाबला करने के लिए तैयार है। अहमदाबाद मॉडल की कॉपी करने के विषय पर उन्होंने कहा कि अगर कोई अच्छा काम होता है तो उसकी सराहना की जा रही है और अगर गलत होता है तो आलोचना भी की जाएगी। अहमदाबाद में साबरमती के विकास को ध्यान में रखते हुए मूसी का विकास किया जा रहा है, लेकिन भाजपा उसका विरोध कर रही है।

कांग्रेस द्वारा दिये गये आश्वासन के अनुसार छह गारंटियों में से 2 गारंटियों की अमलावरी में देरी होने को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने राज्य पर भारी कर्ज छोड़ा। यहाँ तक कि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी कर्ज लेना पड़ा। वर्तमान युद्ध की परिस्थिति पर पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर मेंन रेवंत ने कहा कि विदेश नीति में पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध जरूरी हैं। जरूरत पड़ने पर व्यावहारिक निर्णय लेने चाहिए ताकि देश के हित सुरक्षित रहें।

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