आखिरकार जीवन रेड्डी ने खत्म किया कांग्रेस से रिश्ता

हैदराबाद, बीते छह महीने से अधिक समय से चली आ रही नाराज़गी के बाद आखिरकार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री टी. जीवन रेड्डी ने बुधवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उनका पार्टी से 42 साल पुराना संबंध खत्म हो गया।

जीवन रेड्डी ने अपना इस्तीफा एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा और अपने फैसले के कारण भी बताए। साथ ही खड़गे और गांधी परिवार को पार्टी व सरकार में दिए गए अवसरों के लिए धन्यवाद दिया। हालांकि उन्होंने अभी यह नहीं बताया कि वह किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे या अपनी नई पार्टी बनाएंगे। उनके समर्थकों का कहना है कि आगे की योजना पर जल्द फैसला लिया जाएगा।

जीवन रेड्डी ने यह घोषणा जग्तियाल में अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद की। उन्होंने बताया कि अब वे मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ लड़ाई शुरू करेंगे, जैसे उन्होंने पहले एन. चंद्रबाबू नायुडू और के. चंद्रशेखर राव के खिलाफ की थी। जग्तियाल से छह बार विधायक रह चुके जीवन रेड्डी 2023 के चुनाव में बीआरएस के संजय कुमार से हार गए थे। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि पार्टी में दल-बदल को बढ़ावा देते हुए बीआरएस के नेता संजय कुमार को पार्टी में शामिल किया गया।

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छह बार विधायक रह चुके हैं जीवन रेड्डी

इसके अलावा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने उनके एक करीबी समर्थक की हत्या पर न तो प्रतिक्रिया दी और न ही उसके परिवार से मिलने गए। पार्टी में उन्हें लगातार अपमान और अनदेखी का सामना करना पड़ा। जीवन रेड्डी छह बार विधायक रहे हैं। एक बार टीडीपी और पांच बार कांग्रेस से चुने गए। वे संयुक्त आंध्र प्रदेश में वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की सरकार में सड़क एवं भवन मंत्री और एन.टी. रामाराव की सरकार में आबकारी मंत्री रह चुके हैं।

जीवन रेड्डी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की 10 साल की मेहनत से कांग्रेस सत्ता में आई, लेकिन अब उन्हीं वफादार कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बहुमत होने के बावजूद बीआरएस विधायकों को पार्टी में शामिल करना गलत है। इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। जीवन रेड्डी खास तौर पर बीआरएस विधायक संजय कुमार को कांग्रेस में शामिल करने के फैसले से नाराज हुए। टीपीसीसी अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ और एआईसीसी सचिव सचिन सावंत ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि जो पार्टी अपने वफादारों का सम्मान नहीं करती है, उसमें वह नहीं रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए सम्मान पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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