आमरण अनशन पर पुनः बैठीं कविता

हैदराबाद, तेलंगाना जागृति की नेता के. कविता ने खम्मम जिले के वेलुगुमटला में घरों को गिराए जाने के पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करते हुए बंजारा हिल्स स्थित तेलंगाना जागृति केंद्रीय कार्यालय में अपना अनिश्चितकालीन आमरण अनशन जारी रखा है।

कविता ने सोमवार रात खम्मम में विस्थापित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आमरण अनशन शुरू किया था, लेकिन मंगलवार तड़के करीब 600 पुलिसकर्मी ने उन्हें गिरफ्तार कर हैदराबाद ले आये। गिरफ्तारी के बावजूद उन्होंने घोषणा की कि जब तक सरकार पीड़ितों को न्याय नहीं देती, तब तक वह तेलंगाना जागृति कार्यालय से ही अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखेंगी। कविता ने मांग की कि वेलुगुमटला में जिन लोगों के घर गिराए गए हैं, उनके लिए उसी स्थान पर तुरंत नए मकान बनाने की घोषणा की जाए। जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।

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भूदान भूमि पर कब्जे का आरोप, गरीबों को हटाने की साजिश

कविता ने कहा कि भूदान की ज़मीनें गरीबों के कल्याण के लिए दान में दी गई थीं। वेलुगुमटला में जमीन की कीमत बढ़ने के बाद गरीब परिवारों को हटाकर इस जमीन को प्रभावशाली और धनवान लोगों को सौंपने की साजिश के तहत अचानक यह ध्वस्तीकरण किया गया। सरकार ग़रीब-विरोधी और जनविरोधी तरीके से काम कर रही है। उनके अनुसार, सिर्फ खम्मम ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में ग़रीबों के घरों को बेरहमी से गिराया जा रहा है।

कविता ने कहा कि आधी रात को बुलडोजरों की मदद से करीब 750 घरों को गिरा दिया गया, जबकि उसी समय दसवीं और इंटरमीडिएट की परीक्षाएँ चल रही थीं। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों के पास परीक्षा के हॉल टिकट थे, उनके घर भी गिरा दिए गए, जिससे उनके भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवारों को अंबेडकर भवन में ठहराया गया है, जहाँ वे बेहद दयनीय परिस्थितियों में रह रहे हैं। उनके अनुसार वहाँ हालात चिंताजनक हैं बच्चे त्वचा संक्रमण से पीड़ित हैं और परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

अधिकांश पीड़ित दिहाड़ी मजदूर हैं, जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में वे मलबे में तब्दील हो गए। कविता ने खम्मम जिले के तीन मंत्रियों की चुप्पी की भी आलोचना की और कहा कि यदि इन ध्वस्तीकरणों में उनकी कोई भूमिका नहीं है, तो उन्हें आगे आकर पीड़ितों को न्याय दिलाना चाहिए। हालाँकि इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने उनके कार्यालय पहुँचकर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया।

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