कविता ने तोड़ा अनशन, भूदान बोर्ड की भूमि पर श्वेत पत्र की माँग

हैदराबाद, तेलंगाना जागृति की संस्थापक के. कविता ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार से राज्यभर में स्थित भूदान यज्ञ बोर्ड से संबंधित 1 लाख 74 हजार एकड़ भूमि पर श्वेत पत्र जारी करने की माँग की। वहीं खम्मम जिला वेलुगुमटला भूदान यज्ञ बोर्ड भूमि पीड़ितों को संपूर्ण न्याय दिलाने जस्टिस ईश्वरय्या के नेतृत्व में फैक्ट फाईंंडिंग कमेटी का गठन करने की घोषणा की।
खम्मम के वेलुगुमट्ला पीड़ितों को न्याय दिलाने की माँग को लेकर गत 9 मार्च की रात से आमरण अनशन पर बैठे के. कविता व धर्म समाज पार्टी (डीएसपी) नेता विशारदन महाराज के अनशन को जस्टिस ईश्वरय्या ने नींबू पानी पिलाकर समाप्त करवाया।

कविता ने कहा कि राज्य सरकार ने पीड़ितों को पट्टे देने का निर्णय किया है, इसलिए वह अनशन को केवल विराम दे रही हैं। यह कमेटी पीड़ितों के पास जाकर उनसे सरकार के निर्णय पर सहमति है या नहीं, पूछेगी। यदि कमेटी की रिपोर्ट में पीड़ितों को न्याय न मिलने संबंधी जानकारी प्राप्त हुई, तो फिर से आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने आंदोलन में डटकर सामना करने के लिए एससी, एसटी, बीसी जेएसी, धर्म समाज पार्टी (डीएसपी) के साथ तेलंगाना जागृति के कार्यकर्ताओं का धन्यवाद दिया।

आंदोलन के दबाव में सरकार को झुकना पड़ा

कविता ने कहा कि सबके आंदोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वेलुगुमटला में 62 एकड़ भूदान यज्ञ बोर्ड की भूमियों पर से भूमि मालिकों को हटाना उनके घरों को ढहाना केवल एक प्रयोग था। राज्यभर की भूदान जमीनों पर बुरी नजर डाल चुकी सरकार ने समझा कि यदि खम्मम में कोई विरोध नहीं हुआ, तो राज्य की 1 लाख 74 हजार एकड़ भूदान भूमि पर भी इसी प्रकार रवैया अपनाया जाएगा।

कविता ने सरकार से इसलिए राज्यभर की भूदान यज्ञ बोर्ड से संबंधित भूमियों पर श्वेत पत्र जारी करने की माँग की। उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए प्रश्न किया कि निजी संपत्ति में घुसकर भूमि मालिकों के घरों पर आधी रात में बुल्डोजर चलाने की कांग्रेस सरकार ने हिम्मत कैसे की? क्या राज्य में लोकतंत्र है या नहीं? उन्होंने कहा कि संविधान की प्रति हाथों में लेकर घूमने वाले सांसद राहुल गांधी कांग्रेस सरकार पर कदम उठाएँ और सरकार जनता से सार्वजनिक क्षमा माँगे।

कविता ने कहा कि स्थानीय पुलिस आयुक्त ने खुद आधिकारिक तौर पर माना कि खम्मम के वेलुगुमट्टला भूमि मालिकों को हटाया गया है। अब राहुल गांधी बताएँ उनकी सरकार ने कैसे भूमि मालिकों को उन्हीं के घरों को ढहाकर सड़क पर लाने की हिम्मत की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहले भूमि मालिकों को कब्जेदार कहा, अब बेशर्मी से खुद मालिक बता रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पीड़ितों के आंदोलन के आगे झुकते हुए पट्टे देने की घोषणा तो की है, लेकिन सरकार को चाहिए कि समय बर्बाद किए बिना फिजिकल ले आउट बनाकर जिनकी भूमि उन्हें दी जाए, वहीं कई भूमि मालिकों ने 5 से 10 लाख व 30 लाख रुपये खर्च करके घर बनाए थे।

75 गज जमीन और 5 लाख मुआवजे पर सवाल

अब सरकार कहती है कि केवल 75 गज भूमि देकर 5 लाख रुपये दिए जाएँगे। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि जिनके घर ढहाए गए हैं, जिन्हें बेघर किया गया है, उन्हीं स्थानों पर घर बनाकर दिए जाएँ और उचित राशि भी दी जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों ने 750 में से केवल 311 लोगों को मात्र पट्टे देने की माँग नहीं की, बल्कि सभी के साथ न्याय करने की माँग की थी। उन्होंने मुख्य विपक्षी दल बीआरएस की आलोचना करते हुए कहा कि भारास ने तीन साल बाद सत्ता में आने पर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया और चली गई, लेकिन न्याय तुरंत चाहिए था।

कविता ने कहा कि जागृति ने पीड़ितों को न्याय दिलाने तक अनशन करने की घोषणा की और आंदोलन जारी रखा जो सफल रहा। उन्होंने कहा कि प्रजा पालना के नाम पर प्रजा वेदना को जनता देख रही है। यदि कोई कब्जेदार मालिक के घर में घुसकर कब्जा करता है, तो उस पर केस दर्ज किया जाता है। अब उसी प्रकार वेलुगुमट्ला पीड़ितों को उनके घरों से बाहर निकालकर आवासों को ढहाने वाले जिला कलेक्टर या कोई अधिकारी हो, उन पर केस दर्ज किए जाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का यह विराम मात्र है, पीड़ितों के पक्ष में युद्ध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि तेलंगाना जागृति सत्ता में आएगी, तो भूदान यज्ञ बोर्ड की भूमियाँ गरीबों में बाँटी जाएगी।

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