खरमास से रूक जाएँगे मांगलिक कार्य

इस साल 14 मार्च, शनिवार की देर रात 1 बजकर 8 मिनट पर ग्रहों के राजा सूर्य कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। अंग्रेजी कैलेंडर में रात को 12 बजे के बाद अगला दिन मान लिया जाता है। इस हिसाब से 15 मार्च की रात 1 बजकर 8 मिनट से खरमास शुरू हो रहा है। इसके 30 दिन बाद अर्थात 14 अप्रैल, मंगलवार को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही खरमास का समापन होगा।

सनातन धर्म शास्त्रां में खरमास को अशुभ माना गया है। खरमास भगवान सूर्य के गुरु की राशि धनु और मीन राशि में प्रवेश करने पर लगता है। ये एक माह की अशुभ अवधि मानी जाती है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, सूर्य जब धनु और मीन राशि में होते हैं, तो उनका प्रभाव और तेज कम हो जाता है।

इस दौरान गुरु के प्रभाव में भी कमी आ जाती है। खरमास के समय तमाम मांगलिक एवं शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं। खरमास के दौरान नया घर खरीदने और व्यापार शुरु करने से भी परहेज किया जाता है। मान्यता है कि खरमास में नया कारोबार शुरू करने पर उसमें बाधाएं आती हैं।

खरमास के दौरान गफह प्रवेश करने या नया घर बनवाने से घर-परिवार की सुख-शांति व सकारात्मकता पर प्रभाव पड़ता है। इस माह में सगाई या रिश्ता भी तय नहीं किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से संबंधों के बिगड़ने की आशंका बनी रहती है। खरमास में गाड़ी, गहनें तथा कीमती धातु आदि भी नहीं खरीदना चाहिए। इसके अतिरिक्त शुभ संस्कार जैसे- नामकरण, अन्नप्राशन, मुंडन, जनेऊ आदि भी करने से बचना चाहिए।

खरमास कार्य

रोज सूर्य को अर्घ्य दें। विष्णु सहस्रनाम, राम रक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा का पाठ करें। दान-पुण्य, तीर्थ यात्रा, व्रत और जप-तप करें। घर में साफ-सफाई रखें। नकारात्मक विचारों से दूर रहें। पुराने कर्ज चुकाएँ और लंबित कार्यों का निपटान करें। ऐसे कार्य करने के लिए खरमास को बहुत ही अच्छा समय माना गया है।

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