कोदाड़ लॉकअप मौत मामले में पीड़ित का दोबारा पोस्टमॉर्टम
हैदराबाद, तेलंगाना के सूर्यापेट ज़िले के कोदाड़ में पुलिस हिरासत में हुई दलित युवक की मौत के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निर्देशों के बाद शुक्रवार को कर्ला राजेश के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम करवाया गया। एनसीएससी के आदेश पर दिल्ली से आई अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की विशेष चिकित्सा टीम ने पोस्टमार्टम किया। इस मामले को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है और मृतक के परिजनों तथा विपक्षी दलों द्वारा हिरासत में यातना के आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि राजेश स्थानीय पेट्रोल पंप पर काम करता था।
उसे नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में चिलकुर पुलिस ने मुख्यमंत्री राहत कोष की राशि के कथित दुरुपयोग के मामले में हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, इस मामले के मुख्य आरोपी ने अवैध रूप से धन स्थानांतरित करने के लिए राजेश के बैंक खाते का उपयोग किया था। पुलिस का दावा है कि राजेश ने खाते से राशि निकाली और उसे मुख्य आरोपी को सौंप दिया। जांच के दौरान उसे 4 नवंबर से 8 नवंबर 2025 के बीच पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया था।
हालांकि, राजेश के परिजनों ने आरोप लगाया कि कोदाड़ के निरीक्षक प्रताप लिंगैया और उप-निरीक्षक सुरेश रेड्डी ने हिरासत के दौरान उसे प्रताड़ित किया। बताया गया कि हिरासत में छह दिन पूरे होने के बाद उसने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की। जेल अधिकारियों ने उसे अस्पताल में भर्ती करवाया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। राजेश की मौत के बाद परिजनों और कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए और इसे हिरासत में हिंसा का मामला बताते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
यह भी पढ़ें… सोना खरीदने का झांसा देकर गोल्ड बिस्कुट लेकर भागने वाला अरेस्ट
निरीक्षक प्रताप लिंगैया को निलंबित, उप-निरीक्षक मुख्यालय से जुड़े
घटना सामने आने के लगभग तीन सप्ताह बाद कड़ी कार्रवाई करते हुए निरीक्षक प्रताप लिंगैया को निलंबित कर दिया गया, जबकि उप-निरीक्षक सुरेश रेड्डी को मुख्यालय से संबद्ध किया गया। 22 दिसंबर को दोनों अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दो अलग अलग मामले दर्ज किए गए। एक जेल प्रशासन की शिकायत के आधार पर हिरासत में मौत से संबंधित और दूसरा राजेश के परिवार की याचिका पर, जिसमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने भी कोदाड़ में राजेश के परिवार से मुलाकात की थी और कांग्रेस सरकार पर पुलिस अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया था। पूर्व बीआरएस सरकार के दौरान आड्डागुडूर थाने में दलित महिला मरियम्मा की मौत का हवाला देते हुए रामाराव ने कहा कि उस समय 35 लाख रुपये की अनुग्रह राशि, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इसके विपरीत जिम्मेदारों को संरक्षण दे रही है। बीआरएस नेता ने राजेश के परिवार को पार्टी की ओर से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की और कानूनी व राजनीतिक समर्थन जारी रखने का भरोसा दिलाया।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



