हैदराबाद में साहित्य गरिमा पुरस्कार : रचनात्मकता का भव्य संगम

Ad

हैदराबाद, साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति हैदराबाद, कादम्बिनी क्लब हैदराबाद तथा ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में होटल अबोड (लकडी का पुल) के सभागार में साहित्य गरिमा पुरस्कार-2025 समारोह का आयोजन किया गया।
प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण प्रणव एवं महासचिव मोहित ने बताया कि आयोजन तीन सत्रों में किया गया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. शुभदा वांजपे ने की।

हैदराबाद में साहित्यकारों को सम्मानित करते अतिथि

विश्वजीत सपन (मुख्य अतिथि), डॉ. शिवशंकर अवस्थी (विशिष्ट अतिथि (नई दिल्ली), शांति अग्रवाल (विशिष्ट अतिथि), मानवेंद्र मिश्र (प्रबंध न्यासी) मंचासीन हुए। मंचासीन गणमान्यों के कर कमलों से सर्वप्रथम माँ शारदे की छवि एवं साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति की संस्थापिका स्व. डॉ. अहिल्या मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया। शुभ्रा मोहंतो ने निराला रचित सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। प्रवीण प्रणव ने स्वागत संबोधन में कहा कि डॉ अहिल्या मिश्र ने महिला रचनाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का ख्वाब देखा था और उसी ख्वाब को पूर्ण करना अब सा.ग.पु. समिति के कार्यकारिणी का कर्तव्य है। आप सभी के सहयोग से समिति का कार्य ऐसे ही आगे चलता रहेगा।

अतिथियों का परिचय डॉ. सुरभि दत्त, रवि वैद एवं एफ.एम. सलीम ने दिया। तत्पश्चात प्रो. ऋषभदेव शर्मा, के.पी. अग्रवाल, दीपक दीक्षित, डॉ. रमा द्विवेदी, जयश्री, डॉ. मदनदेवी पोकरणा के करकमलों से अतिथियों का शॉल माला से सम्मान किया गया। साहित्य गरिमा पुरस्कार का प्रतिवेदन मोहित ने प्रस्तुत करते हुए कहा कि अब तक समिति अपना कार्य जिस तरह से करती रही है वैसा ही आगे भी करती रहेगी। सिर्फ सम्मान का नाम बदलकर डॉ अहिल्या मिश्र स्मृति सम्मान किया गया है। इस वर्ष अहिन्दी भाषी महिला साहित्यकार डॉ मंजू रस्तोगी (चेन्नई) को यह पुरस्कार दिया जा रहा है। साथ ही विगत 2 वर्षों से अनेक विधाओं में प्रतिभाशाली साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है।

शॉल, प्रमाण पत्र व 21 हजार की राशि प्रदान

मंचासीन अतिथियों के करकमलों से डॉ मंजू रस्तोगी को खाट की निवाड़ काव्य संग्रह के लिए शॉल, माला, श्रीफल, मोमेंटो, प्रमाण पत्र एवं 21000 रुपए की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया। अपने वक्तव्य में डॉ. मंजू ने इस उपलब्धि से गौरवान्वित होने की बात कही और साहित्य लेखन को आगे भी जारी रखने की भावना व्यक्त की।

पुरस्कार की श्रृंखला में गरिमा सक्सेना को सिया सहचरी काव्य सम्मान, शिवप्रसाद जोशी को सिया सहचरी काव्य सम्मान, हरीशकुमार सिंह को श्री आचार्य कृष्णदत्त हिन्दी साहित्य व्यंग्य / लघुकथा लेखन पुरस्कार, डॉ निर्मला देवी चिट्टिल्ला को महाशहस्त्रावधानी डॉ. गरिकिपाटि नरसिम्हाराव तेलगु अनुवादक पुरस्कार, डॉ श्रीलक्ष्मी को महाशहस्त्रावधानि डॉ गरिकिपाटि नरसिम्हाराव हिन्दी अनुवादक पुरस्कार, डॉ अखिलेश पालरिया को शांति अग्रवाल कहानी /उपन्यास लेखन पुरस्कार, डॉ. प्रिया ए को रामकिशोरी स्मृति सम्मान, रेखा बैजल को चम्पाई माधव कदम हिन्दी लेखन पुरस्कार, के. राजन्ना को सृजनात्मक तकनीक हिन्दी सम्मान, पुष्पा वर्मा एवं भँवरलाल उपाध्याय को कादम्बिनी क्लब हैदराबाद साहित्य गौरव सम्मान, सस्मिता नायक को शुभ्रा मोहंतो संगीत साधना पुरस्कार से नवाजा गया। सभी पुस्कार ग्रहीताओं ने गदगद स्वर में सा.ग. पु. समिति का आभार व्यक्त किया।

यह भी पढ़ें… हैदराबाद की श्रीदेवी जास्ती मिला स्विकी का शी द चेंज सम्मान

विजेताओं को नकद राशि व सम्मान सामग्री प्रदान

पुस्कार ग्रहीताओं का परिचय मोहिनी गुप्ता, सरिता दीक्षित, सरिता सुराणा, मोहित, डॉ संगीता शर्मा, ममता जायसवाल, मोहित, गीता अग्रवाल, नीतिश पांडे, मोनिका भट्ट, एफ.एम. सलीम, सुहास भटनागर ने प्रस्तुत किया। सभी पुरस्कार ग्रहीताओं को शॉल, माला, मोमेंटो, प्रमाण पत्र एवं क्रमश 15000, 11000, 5000 की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया। विश्वजीत सपन ने उद्बोधन देते हुए कहा कि डॉ. अहिल्या मिश्र को मैं माँ देवी के समान मानता हूँ और उनकी यादों के सहारे उनकी विरासत को आप यूँ ही आगे बढ़ाते रहें।

शांति अग्रवाल ने कहा कि डॉ अहिल्या मिश्र मेरी गुरु भी रहीं और बहन भी। उनकी ये धरोहर इसी तरह आगे बढ़े, यही कामना है। मानवेंद्र मिश्र ने कहा कि माँ ने यह अवार्ड शुरू किया था और मैं एक ट्रस्टी और उनका बेटा होने के नाते उनके सपने को ध्यान में जरूर रखूँगा। आप सभी का साथ ऐसे ही समिति को मिले, यहीं आशा करता हूँ। डॉ. शिवशंकर अवस्थी ने कहा कि डॉ. अहिल्या मिश्र ने लोगों को साहित्य से जोड़ा।

यह साहित्यिक पुरस्कार उच्च पुरस्कारों की श्रेणी में है। प्रो. शुभदा वांजपे ने अध्यक्षीय टीप्पणी में कहा कि आज का आयोजन भव्य है। सबके होठों पर मुस्कान अवश्य है पर आँखों में आँसू हैं। विभिन्न विधाओं में पुरस्कार घोषित कर समिति ने महत्वपूर्ण कार्य किया है। सुहास भटनागर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ प्रथम सत्र का समापन हुआ। सत्र का सफल संचालन एफ एम सलीम ने किया।

साहित्यकारों व सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही

दूसरे सत्र में प्रो. ऋषभदेव शर्मा (अध्यक्षता), महासहस्त्रावधानी डॉ गरिकिपाटि नरासिम्हाराव (मुख्य अतिथि), अवधेशकुमार सिन्हा (विशिष्ट अतिथि), प्रो. गोपाल शर्मा (आत्मीय अतिथि), अनिल कुमार झा (प्रबुद्ध साहित्यकार), सीमा कुमारी (असिस्टेंट डायरेक्ट, आकाशवाणी), मीना मुथा (कार्यकारी अध्यक्ष, कादम्बिनी क्लब) मंचासीन हुए। अतिथियों का सम्मान मिलिंद भारती, मानवेंद्र मिश्र, डॉ आशा मिश्र, सीताराम माने, राजकुमार यादव, शिवकुमार तिवारी आदि सदस्यों के करकमलों से किया गया।

सत्र में 6 पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। डॉ. अहिल्या मिश्र की दो कृति सृजनात्मक साहित्य लेखन पर दृष्टिपथ व हिन्दी साहित्येतिहास में बिखरे मोती एवं भाषा, अवधेशकुमार सिन्हा की कृति काली स्याही सूर्य शब्द, पुष्पक साहित्यिकी (डॉ. अहिल्या मिश्र स्मृति विशेषांक), द हँगिंग नूज (अनुवाद डॉ सी कामेश्वरी पी अजय भार्गव), करूँ तुझे शत-शत बार नमन (डॉ सुमनलता की कृति) का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों के करकमलों से संपन हुआ। डॉ सुषमा देवी, डॉ.बी. बाबाजी, डॉ रक्षा मेहता, डॉ सुपर्णा मुखर्जी, डॉ सी कामेश्वरी एवं डॉ सुरभि दत्त ने पुस्तक का परिचय दिया। परिचय प्रस्तोता का मंच की ओर से सम्मान किया गया।

महासहस्त्रावधानी डॉ. गरिकिपाटि नरसिम्हाराव ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमें अगली पीढ़ी को तैयार करना है। साहित्य में वारिस मिलना कठिन है। उनके तेलुगु संबोधन को डॉ सुमनलता ने हिन्दी में अनुवाद कर सभा को उनके विचारों से अवगत किया। अवधेश कुमार सिन्हा ने कहा कि डॉ. अहिल्या जी की कमी सदैव महसूस होती रहेगी। उन्होंने अपनी किताब काली स्याही सूर्य शब्द के अनुभव को साझा किया।

एआई के महत्व और साहित्य की दिशा पर चर्चा

डॉ अनिल कुमार झा और सीमा कुमारी ने भी समिति को साधुवाद दिया। प्रो गोपाल शर्मा ने भी एआई के महत्व पर प्रकाश डाला। मीना मुथा ने कादम्बिनी क्लब की संक्षिप्त जानकारी दी। प्रो ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि साहित्य लेखन को प्रेरणा देने का कार्य डॉ आहिल्या मिश्र ने किया और आगे भी यह कार्य निर्विवाद जारी रहेगा। लोकार्पित सभी किताबें पठनीय हैं। अवसर पर शुभ्रा मोहंतो द्वारा रिकॉर्ड की गयी सरस्वती वंदना की पेनड्राइव लोकार्पित की गयी। मंच की ओर से तेलंगाना हिन्दी भाषा साहित्य इकाई की ओर से डॉ सुरभि दत्त, डॉ राजीव सिंह ने प्रवीण प्रणव, मोहित, मीना मुथा एवं डॉ आशा मिश्र मुक्ता का सम्मान किया। शिल्पी भटनागर ने सत्र का संचालन किया।

डॉ. शिवशंकर अवस्थी की अध्यक्षता और मीना मुथा के संचालन में बहुभाषी कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। इंदू शेखर विशेष अतिथि रहे। इसमें अल्का चौधरी, शिवकुमार तिवारी कोहिर, सुषमा त्रिपाठी, दर्शन सिंह, मोहिनी गुप्ता, डॉ सुरभि दत्त, पुष्पा वर्मा, दीपक दीक्षित, सीताराम माने, सत्यनारायण ककड़ा, शशि राय, डॉ राजीव सिंह, मोहित, सूरज कुमारी गोस्वामी, डॉ संगीता शर्मा, नीतीश पांडे, रवि वैद, प्रियंका पांडे, सुनीता लुल्ला आदि ने मारवाड़ी, सिंधी, पंजाबी, मराठी, हिन्दी आदि भाषाओ में रचनाएं पढ़ीं। डॉ. अवस्थी ने हैदराबाद की संस्कृति और साहित्यिक वातावरण को सराहा।

टी. वसंता, पुष्पा कीमती, डॉ. चक्रपाल सिंह, उमा सविता सोनी, डॉ. किरण सिंह, सुमन मलिक प्रदीप झा, रेखा वर्मा, चंद्रलेखा कोठारी, डॉ. अनिल कुमार मिश्रा समेत करीब 110 सदस्यों की उपस्थिति रही। संस्था की ओर से पुलिन अग्रवाल को विशेष धन्यवाद दिया गया। डॉ. आशा मिश्र मुक्ता ने सत्र का धन्यवाद दिया। राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। अवसर पर मध्याह्न भोजन व अल्पाहार की व्यवस्था की गई।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Ad

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button