लोकसभा अध्यक्ष ने 64 देशों के संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया
नई दिल्ली। दुनिया के 60 से अधिक देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय मैत्री समूहों का गठन करते हुए कूटनीति के साथ मजबूत राजनीतिक कदम भी उठाया है।
जिस तरह से इन मैत्री समूहों में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है, वह दलीय मतभिन्नता के ऊपर ऐसे सेतु की भूमिका निभा सकता है, जो विश्व में सशक्त भारतीय लोकतंत्र के साथ ही भारत की एकजुटता का संदेश भी दे सकता है।
इन देशों के साथ बना समूह
लोकसभा अध्यक्ष का यह कदम भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उसी प्रयास से प्रेरित दिखाई देता है, जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद विश्व के सामने भारत का मजबूत पक्ष रखने के लिए बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल को दूसरे देशों में भेजा गया था।
लोकसभा अध्यक्ष ने जिन देशों के साथ ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें अमेरिका, यूके, रूस, यूरोपीय संसद, श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इजराइल, मालदीव, दक्षिण कोरिया, नेपाल, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, आस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित 60 देश शामिल हैं।
सबसे महत्वपूर्ण इन मैत्री समूहों के गठन में रखी गई सत्ता पक्ष और विपक्ष की भागीदारी है, जो भारतीय लोकतंत्र का सुदर्शन कराती है।
इन नेताओं को चुना गया
समूहों में वरिष्ठ नेताओं में रवि शंकर प्रसाद, पी. चिदंबरम, अखिलेश यादव, प्रो. रामगोपाल यादव, अनुराग सिंह ठाकुर, शशि थरूर, अभिषेक बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, केसी वेणुगोपाल, डा. एम. थंबीदुरई, टीआर बालू, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, डा. निशिकांत दुबे, भर्तृहरि महताब, डॉ. डी. पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लब कुमार देब, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, डॉ. सस्मित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत एकनाथ शिंदे, पीवी मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल सहित कई अन्य नेता शामिल हैं।
बताया गया है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधे बात करने का अवसर देना है। वे अपने अनुभव साझा करेंगे, एक-दूसरे से सीख सकेंगे और नियमित संपर्क के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाएंगे। इससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी और आपसी समझ बेहतर होगी।
वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर होगी चर्चा
इन समूहों के माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियों, संस्कृति और आज की वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। ये मैत्री समूह नियमित संवाद, अध्ययन यात्राओं और संयुक्त बैठकों के माध्यम से दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देंगे। इस तरह भारत की संसद देशों के बीच एक सेतु के रूप में और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सशक्त आवाज के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगी।
उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजे थे। अलग-अलग दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एक साथ लाकर यह संदेश दिया गया कि देश की सुरक्षा और हितों के मामले में भारत एकजुट है। इस पहल से संवाद, समावेश और सामूहिक जिम्मेदारी में विश्वास को दर्शाया गया।
लोकसभा द्वारा 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह गठित करने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में जहां 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूहों का गठन किया गया है, वहीं निकट भविष्य में कई अन्य देशों के साथ इन समूहों के गठन के प्रयास किए जाएंगे। (भाषा)
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