भव्य रूप से मनाया गया भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव

हैदराबाद, श्री जैन सेवा संघ के तत्वावधान में भगवान महावीर का 2625वाँ जन्म कल्याणक महोत्सव भव्य रूप से नुमाइश मैदान में आयोजित किया गया। विभिन्न धार्मिक तथा सेवा कार्यों के बीच आयोजित कार्यक्रम में विश्व शांति के लिए भगवान महावीर के सिद्धांतों तथा शिक्षाओं को आत्मसात करने का आह्वान किया गया। अवसर पर कहा गया कि महावीर स्वामी के सिद्धांत पहले जितने प्रभावी थे, आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उनकी शिक्षाएं आधुनिक युग में व्याप्त कई विडंबनाओं तथा समस्याओं का समाधान करते हुए मानवता की रक्षा करने वाली हैं।  

श्री पार्श्व गोयम कृपा प्राप्त जैनाचार्य विजय अभयसेन सूरीश्वरजी म.सा, पू.आ. श्री ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. के समुदायवर्ती पू. मुनिराज श्री चन्द्रयशविजयजी म.सा. आदि ठाणा 2, महाशतावधानी मुनिराज श्री अभिनंदनचंद्र सागरजी म.सा. आदि ठाणा 5, अचलगच्छी गच्छाधिपति कलाप्रभ सागर सूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती साध्वी श्री तत्वपूर्णाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 3, पू. श्रीमद् विजय कल्पतरु सूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती साध्वी पू. कुमुदश्रीजी म.सा. की शिष्या पू. कल्पज्ञाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 5, सागर समुदाय पू. श्री हेमप्रभाजी म.सा. की सुशिष्या पू. भव्यपूर्णाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 3, पू. श्री भावरत्नाश्रीजी म.सा की शिष्या पू. सुकृतरत्नाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 3 के सानिध्य में आयोजित 2625वें भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव-2026 के मुख्य अतिथि तेलंगाना के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. अजहरुद्दीन एवं विशेष अतिथि बीआरएस के वरिष्ठ नेता तथा विधायक टी. हरीश राव एवं तलसानी श्रीनिवास यादव थे।  

जियो और जीने दो को आत्मसात करें : अजहरुद्दीन

मो. अजहरुद्दीन ने जन्म कल्याणक महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए भगवान महावीर के सिद्धांत जियो और जीने दो को आत्मसात करने पर विशेष रूप से बल दिया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाओं के मूल में मानवता है, लेकिन आज के समय में सहिष्णुता तथा क्षमा जैसे भाव कम होते जा रहे हैं। इसके चलते वैश्विक स्तर पर विभिन्न प्रकार की विसंगतियों से दो-चार होना पड़ रहा है।

आज जब दुनिया युद्ध, आतंकवाद और आपसी कलह से जूझ रही है, महावीर स्वामी का जियो और जीने दो के संदेश का प्रसार शांति का एकमात्र मार्ग है। मो. अजहरुद्दीन ने श्री जैन सेवा संघ द्वारा दी जा रही सेवाओं तथा गतिविधियों की सराहना करते हुए मंत्रालय द्वारा यथासंभव सहयोग का आश्वासन दिया। जन्म कल्याणक महोत्सव पर उन्होंने हैदराबाद की गंगा-जमुनी परंपरा के अक्षुण रहने की कामना की।  

मानवता के संरक्षण का आधार है अहिंसा : हरीश राव

टी. हरीश राव ने जन्म कल्याणक महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए भगवान महावीर के सिद्धांतों को वास्तव में जीने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा तथा सद्भाव जैसे गुण हमारे जीवन जीने का तरीका होना चाहिए। आज के समय में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष और टकराव से कुछ भी हासिल नहीं होता है।

शांति और अहिंसा ही मानवता के संरक्षण का मुख्य आधार हैं। उन्होंने तेलंगाना को सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक बताया, जहां विभिन्न धर्म सह-अस्तित्व में हैं। उन्होंने कहा कि तेलंगाना कई शताब्दियों से जैन और बौद्ध तीर्थ स्थलों का केंद्र रहा है। अवसर पर हरीश राव ने श्री जैन सेवा संघ द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण सहित अन्य क्षेत्रों में दी जा रही अनुकरणीय सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि तेलंगाना राज्य के विकास में जैन समाज का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि इस समाज को बीआरएस का सहयोग सदैव रहेगा।  

समारोह को संबोधित करते हुए तलसानी श्रीनिवास यादव ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाएं तथा सिद्धांत कालजयी हैं। यह किसी विशेष युग, जाति या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के स्वभाव और कल्याण के लिए हैं। उन्होंने कहा कि हजारों साल पहले दिए गए उनके संदेशों में आज की वैश्विक समस्याओं का समाधान समाहित है।  

योगेश सिंघी ने महावीर के आदर्श अपनाने की अपील की

श्री जैन सेवा संघ हैदराबाद के मार्गदर्शक योगेश सिंघी ने अपने संबोधन में भगवान महावीर के आदर्शों को अपनाने की अपील की। उन्होंने पूर्व बीआरएस सरकार द्वारा श्री जैन सेवा संघ को दिए गए महत्वपूर्ण सहयोग के लिए विधायक टी. हरीश राव तथा तलसानी श्रीनिवास यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष हुकुमचंद सावला ने मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा कि भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन उपलक्ष्य में सही समय में हाथ उठाने की आदत का संकल्प लेना चाहिए।

इससे समस्या का निदान भी हमारे हाथ में ही होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की मान्यता है कि विश्व एक बाजार है, लेकिन भारत की मान्यता है कि विश्व एक परिवार है। हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म मोक्ष भूमि भारत में हुआ है। जैन दर्शन में जातिवाद तथा ऊंच-नीच के भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। जैन दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सार्वभौमिकता है।

समाज तथा मानवता के कल्याण के लिए सभी पंथों को एकजुट होकर महावीर स्वामी के संदेशों का नाद करना चाहिए। जैन धर्म से जुड़े ऐतिहासिक तथा समसामयिक चरित्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने गौरवशाली तथा समृद्ध इतिहास से परिचित कराया जाना चाहिए। विश्व शांति के लिए अहिंसा को एकमात्र मार्ग बताते हुए कहा कि इसे कर्म के साथ-साथ वाणी द्वारा भी धारण किया जाना चाहिए। किसी भी समस्या का निराकरण सार्थक संवाद द्वारा किया जा सकता है। हुकुमचंद सावला ने कहा कि वाणी में संयम और व्यवहार में अहिंसा लाकर विश्व शांति की संकल्पना को साकार किया जा सकता है।  

समाज की एकता सर्वोपरि : विजय अभयसेनजी

जैनाचार्य विजय अभयसेन सूरीश्वरजी म.सा. ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि विरासत की बात करना बहुत आसान है, लेकिन उसे सहेज कर रखना कठिन है। म.सा. ने कहा कि त्याग तथा आपसी तालमेल के साथ-साथ साम-दाम-दंड-भेद अपनाकर भी समाज की अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। अपने समाज की एकता को सर्वोपरि रखते हुए उसे बरकरार रखना हम सभी का कर्तव्य है।

मुनिराज श्री अभिनंदन चंद्र सागरजी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में विभिन्न प्रकार के विवादों से परे उठकर एकजुट होने की सबसे अधिक आवश्यकता है। जब कोई समुदाय संगठित होता है, तभी वह अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा कर पाता है। म.सा ने जैन समाज द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यदि हमें अपनी भावी पीढ़ियों को सुरक्षित और सुसंस्कृत रखना है, तो केवल धार्मिक स्थलों का निर्माण पर्याप्त नहीं है। मूल्य आधारित शिक्षण संस्थानों की व्यापक संख्या में स्थापना करनी होगी।

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महावीर के संदेश वरदान : चंद्रयशविजयजी

मुनिराज श्री चंद्रयशविजयजी म.सा ने कहा कि भगवान महावीर के संदेश आज भी वरदान के समान हैं। वे जब अपनी मां के गर्भ में थे, राज्य की सुख-शांति तथा समृद्धि आदि में वृद्धि हुई। इसी कारण उनका नाम वर्धमान रखा गया। भगवान महावीर का जन्म सर्व कल्याण के लिए हुआ था। नाम प्रधानता के कारण आज भी उनके नाम का स्मरण समग्र जीव का कल्याण करने वाला है।

अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य के पांच मूल सिद्धांतों का वर्णन करते हुए म.सा ने कहा कि महावीर स्वामी का संदेश था कि प्रत्येक जीव को बचाने या उसे जीवन देने का प्रयास करना चाहिए। आज संसार में जितनी भी विषमताएं व्याप्त हैं, उनका सर्वप्रमुख कारण हिंसा, असत्य तथा आवश्यकता से अधिक भौतिक वस्तुओं संचित करने की लालसाएँ आदि हैं। महावीर स्वामी के सिद्धांत और शिक्षाएं आधुनिक युग की विभिन्न समस्याओं का समाधान देने वाली हैं।  

महावीर स्वामी के अहिंसा और जियो-जीने दो संदेश का महत्व

इसके पूर्व श्री जैन सेवा संघ हैदराबाद के अध्यक्ष उमेश कुमार बागरेचा ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि भव्य रूप …
महावीर स्वामी के संदेशों की प्रासंगिकता समय के साथ और भी बढ़ गई है। वर्तमान की स्थितियों को देखते हुए तथा मानवता की रक्षा के लिए अहिंसा परमो धर्म तथा जियो और जीने दो का संदेश विश्व में फैलाना आवश्यक है। अपने संबोधन में उमेश कुमार बागरेचा ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने के लिए संघ के वरिष्ठ नेतृत्व, मार्गदर्शकों तथा लाभार्थियों सहित सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।  

श्री जैन सेवा संघ हैदराबाद के महामंत्री विमलचंद मुथा ने कहा कि यह संस्था भगवान महावीर की शिक्षाओं और जैन धर्म के मूल दर्शन पर आधारित है तथा समाज में सेवा, त्याग, संगठन शांति तथा सद्भाव जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। उन्होंने संस्था द्वारा जैन समाज के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा प्रस्ताव हैदराबाद में एक अहिंसा सर्किल के निर्माण का है, ताकि शांति और अहिंसा के प्रति जागरूकता का प्रसार किया जा सके।

सिद्दिअम्बर बाजार और मोजमजाही मार्केट से नुमाइश मैदान तक यात्रा

महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर नुमाइश मैदान में आयोजित समारोह से पूर्व श्री महावीर स्वामी जैन श्वेतांबर मंदिर, फीलखाना से गाजे-बाजे, भजन मंडली सहित विभिन्न झांकियों तथा नारों के साथ भव्य वरघोड़ा निकाला गया। यह सिद्दिअम्बर बाजार, उस्मानगंज, मोजमजाही मार्केट से होते हुए कार्यक्रम स्थल नुमाइश मैदान में पहुंच कर धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। कार्यक्रम में स्वामी वात्सल्य के लाभार्थी शांतिलाल-ऊषा बडोला, खुशबू-सुनील चोपडा, गीत चोपडा, रोशनी-कैप्टन आदर्श गोलेच्छा, शौर्या, अंश गोलेच्छा परिवार का सम्मान संघ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।

धर्मसभा से पूर्व माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन लाभार्थी केवलचंद-मीनादेवी, अमित-शीतल, सुमित-सुचित्रा, आर्यन, योगीराज, संयम रिया सांची सान्वी रियावाला सेठ मुणोत परिवार ने किया। ध्वजारोहण लाभार्थी मीठालाल उज्जवल, विनोद आशीष धैर्य, तेजस मखाणा परिवार ने किया। धर्म सभा में तिलक द्वारा बहुमान का लाभ झूंबरमल चुकादेवी सुरेश-चंदन रौनक सुराणा परिवार ने लिया।

अहिंसा रैली को हरी झंडी दिखाने का लाभ उगमराज गौतमचंद महेन्द्र अखिल अंकित आकाश निकुंज शौर्य कटारिया ने लिया। पंडाल एवं बैकड्राप का लाभ भंवरीबाई मूलचंद अनिल सीमा, सुनील अनुराधा कावडिया ने लिया। पंडाल का लाभ पारसमल दिलीप मोहित रौकन भंडारी, संघवी कमलाबाई छगनलाल कोठारी, शांतिदेवी दिलीप लीना सेठिया परिवार ने लिया।  

सेल्फी प्वाइंट और प्रवेश द्वार के लाभ विभिन्न परिवारों ने लिया

इसके अलावा जय जिनेन्द्र का लाभ जैनरत्न भंवरलाल पद्मचंद बसंत राजेन्द्र बाफणा परिवार ने, पैसेज का लाभ संघवी सुकन्याबाई मोतीलाल योगेश खरगांधी परिवार, सेल्फी प्वाइंट का लाभ बाबूलाल नितिन आशीष अमित सिरोडिया, प्रवेश द्वार का लाभ राजेन्द्र कुमार विनोद विक्रम अनुराग कीमती, अमृत कुमार सैलेश विशाल आंचलिया, मोहलाल रमेश कपिल अभिषेक बागरेचा, हिमांशु बापणा-कल्पतरु ज्वेलर्स, कैलाश कुमार भक्तिराज चांदमल भंडारी, प्रेमराज शांतिलाल अशोक कुमार धर्मेन्द्र गुगलिया, जैन कंस्ट्रक्शन ने लिया।

कार्यक्रम में विशेष सहयोगी संघवी अन्नराज शिवराज सोनी, मनोज कुमार परमार, भगवतीलाल मुकेश सुराणा, ज्ञानमल मनोज तातेड, गुमानचंद उमेशचंद मनीष नाहर, जवरीलाल विजयराज सेठिया, मंगलचंद संजय कुमार कटारिया, संघवी विमलादेवी मांतीलाल चौधरी, राकेश तालेडा, पुष्पराज विजेन्द्र भंडारी, संपतराज भंवरलाल भंडारी, प्रमुख सहयोगी अमरचंद उमेश कुमार सुमित कुमार बागरेचा, केवलचंद विमलचंद अभिषेक मुथा, सोभागचंद सुनील संदीप नाबेडा, मुख्य सहयोगी इन्द्रमणिदेवी अशोक कुमार बरमेचा, जवाहरमल योगेश कुमार गौरव जतिन सिंघी, शांतिलाल अशोक कुमार धर्मेन्द्र गुगलिया, शिवराज मीठालाल गौतमचंद सेहलोत, महावीर बैंक, वर्धमान बैंक, पंचकेसरी बडेरा ज्वेलर्स एवं संघवी जीवराज विमलचंद नाहर ने दिया। सभी लाभार्थियों का सम्मान अतिथियों एवं संघ के पदाधिकारियों व कार्यकारी सदस्यों द्वारा किया गया। मंच संचालन राजेश बलाई, प्रवीण बंदामुथा एवं वर्षा संचेती द्वारा किया गया।  

कार्यक्रम को सफल बनाने में मार्गदर्शक मंडल के चेयरमैन योगेश कुमार सिंघी, श्री जैन सेवा संघ के अध्यक्ष उमेश कुमार बागरेचा, प्रधान संयोजक सुनील कावडिया, दिलीप भंडारी, दिलीप सेठिया, महामंत्री विमलचंद मुथा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश भंडारी, उपाध्यक्ष विनोद मखाणा, सह-मंत्री योगेश सोनी, सुनील कावडिया, कोषाध्यक्ष सुरेश सुराणा, कार्यकारिणी सदस्य अमित मुणोत, आनंद बोहरा, अनिल कातरेला, डॉ. अनीष पोकरणा, आशीष भंसाली, अशोक कोठारी, अशोक मुथा, अशोक संचेती, अशोक सोनी, अविनाश भंडारी, भरत चौधरी, धर्मेन्द्र समदरिया, घेवरचंद कोठारी, हुकमचंद कोटेचा, किशोर बैदमुथा, महावीर मुणोत, माणकचंद पोकरणा, मनोज तातेड़, मोहनलाल बागरेचा द्वारा दी गई।

जल व्यवस्था का प्रबंध जीतो हैदराबाद चैप्टर द्वारा किया गया

कार्यक्रम को सफल बनाने में नवल बाफणा, राजेश साभद्रा, राकेश सुराणा, सज्जनराज गांधी, सुनील बोहरा, सुरेश कोठारी, त्रिलोक झाबक, उमेश नाहर, विजयराज आंचलिया, विजय सुराणा, विक्रम श्रीश्रीमाल, दिलीप भंडारी, के. महावीर तातेड़, संतोष मरलेचा, प्रवीण पांडया; संयोजक मंडल के महेन्द्र पितलिया, ज्ञानचंद रांका, अशोक चाणोदिया, सुरेश गुंदेचा, नितिन सिरोहिया, दीपक सांखला, विकास चौरडिया, अजय कोठारी, राजेश चौधरी, निकेश ढेलडिया, प्रदीप गांधी, महावीर बागरेचा, अरिहंत नाबरिया, हेमंत मुथा, महावीर गुगलिया, प्रवीण पांड्या, रिद्धीश जागीरदार, राजेश भंडारी ने सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम में जल व्यवस्था जीतो हैदराबाद चैप्टर द्वारा दी गई।

महोत्सव के लिए बनायी गयी स्वागत समिति में अशोक बरमेचा, संजय कटारिया, नवरतनमल गुन्देचा, विजयभाई संघवी, उत्तमचन्द भलगट, अशोक संकलेचा, प्रकाशचन्द लोढा, पन्नालाल नाहटा, वजीरचन्द झाबक, अखराज कोठारी, विनोद कीमती, विजयराज सेठिया, निर्मल सिंघवी, गौतमचन्द गुगलिया, योगेश कुमार सिंघी, अशोक मुथा, कुशल कांकरिया, अशोक बोहरा, योगेश खरगांधी, चम्पालाल भण्डारी, अन्नराज बाफणा, आनंदस्वरूप बोरा, पन्नालाल संचेती, मोतीलाल भलगट, धनराज पिरोदिया, पारसमल कोचेटा, महेन्द्र रांका, मनीष दुगड़, सुरेश गादिया, अशोक नाबरिया, सुभाषचन्द गोलेछा, गौतमचन्द गोलेछा, बिजराज श्रीश्रीमाल व फतेहराज श्रीश्रीमाल ने योगदान दिया।

स्वागत समिति में विनोद संचेती, महेन्द्र कटारिया, राजेश गुगलिया, भरत भंसाली, घेवरचन्द बंदामुथा, जयप्रकाश मखाना, कैलाश भंडारी, विनोद मखाना, गौतमचंद चाणोदिया, नेमीचंद बुबकिया, शीलकुमार जैन, सुरेन्द्रकुमार बांठिया, सज्जनराज नाहर, अर्थ संग्रह समिति में योगेश कुमार सिंघी, उमेश नाहर, राजेशकुमार साभद्रा, योगेश सोनी, अविनाश भंडारी, भरत भंसाली, नौरतनमल गुन्देचा, अशोक बरमेचा, अरुण भलगट, बसंत बाफणा, जे. पारसमल कटारिया, अभय सुराणा, रामलाल ढेलडीया, कैलाश गोवाणी, सुभाष पिरोदिया, दिनेश मुथा, दिलीप श्रीश्रीमाल, जवाहरमल भंसाली, सुनील कावडिया, योगेश सोनी, सुरेशकुमार सुराना, अशोकचंद कटारिया, प्रवीण नाहटा, अशोकचंद तातेड, उमेश कुमार बागरेचा, कैलाश भण्डारी, विमलचंद मुथा, विनोद मखाना, सुरेशकुमार सुराना, अमित मुणोत व वरघोडा संयोजक समिति में योगेश सोनी ने योगदान दिया।

महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के लिए स्वागत समिति सक्रिय

स्वागत समिति में विक्रम चौधरी, आशीष भंसाली, पंडाल व्यवस्था समिति के मनोज तातेड, राकेश सुराना, अनिल कातरेला, डॉ. अनीष पोकरणा, हुकमचन्द कोटेचा, नवल बाफना, सज्जनराज गांधी, विक्रम श्रीश्रीमाल, सुनील बोहरा, सुरेश कोठारी, त्रिलोक झाबक, संतोष मरलेचा, माणकचंद पोकरणा, अशोकचंद तातेड, संतोष मरलेचा, महेन्द्र तातेड, स्टॉल वितरण व्यवस्था समिति में गौतमचंद सुराणा, योगेश झाबक, अरुण खिंवसरा, भोजन व्यवस्था समिति में सुभाष रांका, विनोदचंद लुणावत, सुभाष पिरोदिया, अशोकचंद संचेती, मोहनलाल बागरेचा, अमित मुणोत, पवन पाण्ड्या, दिलीप भंसाली, उमेश नाहर, विजय आंचलिया, महावीर तातेड कोरा, अशोकचंद संचेती, अशोक सोनी, विनोद पितलिया, ललितकुमार बंदामुथा, सुशील बोहरा, अमित श्रीश्रीमाल, नवीन गांधी, श्रवण कोठारी ने योगदान दिया।

मंच व्यवस्था समिति में सुरेश कुमार कोठारी, सुनील कावडिया, डॉ. अनीष पोकरणा, भरत भंसाली, सुरेश गुंदेचा, स्मृति चिन्ह समिति के सुनील बोहरा, नरेन्द्र लुंकड, वैय्यावछ एवं विहार व्यवस्था समिति के विक्रम ढल्ला, विजयराज ओस्तवाल, रोहित मुथा, हितेश चाणोदिया, अनिल गुलेच्छा, आनंद पितलिया, महेन्द्र मखाणा, गौतमचंद माण्डोत, नवरतन मखाणा, प्रतीक कटारिया, जिनेन्द्र लुंकड, विकास माण्डोत, नवलकुमार बाफना, कैलाश भण्डारी, विनोद मखाना, राकेश सुराना, अनिल कातरेला, देवेन्द्र कटारिया, सज्जनराज नाहर, ज्ञानचंद कोचेटा, गजराज कवाड व अशोककुमार सिंघवी ने सहयोग प्रदान किया। 

मंच व्यवस्था समिति में ज्ञानचंद रांका, राजेश चौधरी, राजकुमार बोकाडिया, सुरेन्द्रकुमार नाबरिया, गिरीराज सिंघी, राजकुमार कोठारी, गजेन्द्र कोचेटा, कुशलराज पोकरणा, संजय सिंघी, अनिल आंचलिया, राजेश सोनी, महेन्द्र कटारिया, उमेश कोठारी, रमण धोका, अनिल कावड़िया, अशोक चाणोदिया, दिलीप गादिया, अनिल नावेडा, कमलचंद सुराना, जितेन्द्रकुमार भण्डारी, सुशील तातेड, सज्जन आंचलिया, संतोष कटारिया, गजेन्द्र कोचेटा, कान्तिलाल बागरेचा, महेन्द्र पारख,  चिराग बागरेचा, प्रतीक बागरेचा, विकास चाणोदिया ,राजेन्द्र कटारिया, पुरस्गारी व्यवस्था में आदिजिन मण्डल, श्री नानक प्राज्ञ संघ, श्री नानक प्राज्ञ युवा संघठन, श्री महावीर मित्र मण्डल, श्री जिनेश्वर युवा संगठन, श्री जैन सेवा समिति, श्री जैन नवयुवक मण्डल, जैन रॉक स्टार प्रचार प्रसार समिति में प्रवीण पाण्ड्या एवं रिद्धीश जागीरदार ने सहयोग प्रदान किया। 

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