चोरी के प्रयासों के लंबे इतिहास के बाद लूव्र डायरेक्टर का इस्तीफा
पेरिस, दुनिया के सबसे चर्चित लूव्र संग्रहालय से अक्टूबर में बेशकीमती गहनों की चोरी की घटना के बाद संग्रहालय की निदेशक लॉरेंस दे कार्स ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। गहनों की चोरी की घटना के बाद दुनिया के सबसे अधिक देखे जाने वाले इस संग्रहालय में सुरक्षा चूक, कर्मचारियों के असंतोष और कथित टिकट घोटाले को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे,
निदेशक लॉरेंस दे कार्स ने एक चुनौतीपूर्ण वर्ष के बाद पद छोड़ा। पूर्व शाही महल रहे इस प्रतिष्ठित संस्थान को अपोलो गैलरी से आभूषण चोरी, “मोना लिसा” के पास फरवरी मध्य में पाइप फटने की घटना, पानी के रिसाव से दुर्लभ पुस्तकों को नुकसान, कर्मचारियों के असहयोग और भीड़भाड़ व स्टाफ की कमी को लेकर अचानक हड़ताल जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा।
हाल के सप्ताहों में तब दबाव और बढ़ गया जब फ्रांसीसी अधिकारियों ने संग्रहालय से जुड़े एक दशक से जारी कथित टिकट धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा किया, जिससे लूव्र संग्रहालय को लगभग एक करोड़ यूरो (करीब 1.18 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दे कार्स का इस्तीफा स्वीकार करते हुए इसे “जिम्मेदारी का कदम” बताया और कहा कि इस समय लूव्र को सुरक्षा उन्नयन, आधुनिकीकरण और अन्य प्रमुख परियोजनाओं के लिए “शांति” और नई गति की आवश्यकता है। फ्रांस के सांस्कृतिक जगत में कई लोगों का मानना है कि यह इस्तीफा उस सवाल का जवाब है कि चोरी जैसी बड़ी घटना के बाद अब तक कोई शीर्ष अधिकारी क्यों नहीं हटा?
चोरों ने 19 अक्टूबर को मात्र आठ मिनट से भी कम समय में 8.8 करोड़ यूरो (करीब 10.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर) मूल्य के बेशकीमती गहने अपोलो गैलरी ‘डी’अपोलोन’ से चुरा लिए थे। इस गैलरी में फ्रांसीसी राजसी रत्नों का संग्रह प्रदर्शित है। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमजोरियों को उजागर कर दिया।
इस दिनदहाड़े हुई चोरी को देश की सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा में हाल के समय की सबसे शर्मनाक चूक माना गया। बाद में कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन चोरी किए गए आभूषण अब तक बरामद नहीं हो सके हैं। यूरोप के प्रमुख संग्रहालय निदेशकों में से एक दे कार्स ने चोरी के दिन ही इस्तीफा देने की पेशकश की थी, जिसे उस समय संस्कृति मंत्री ने अस्वीकार कर दिया था। घटना के बाद उन्होंने इसे लूव्र के लिए “दुखद, क्रूर और हिंसक वास्तविकता” बताया था और कहा था कि प्रभारी होने के नाते इस्तीफा देना उन्हें उचित लगा।

लूव्र संग्रहालय में चोरी और डकैती के प्रयासों का एक लंबा इतिहास रहा है। वर्ष 1911 में हुई घटना में मोनालिसा की पेंटिंग फ्रेम से गायब हो गई थी। इसे विन्सेन्जो पेरुगिया नामक एक पूर्व कर्मचारी ने चुरा लिया था, जो संग्रहालय के अंदर छिप गया और पेंटिंग अपने कोट के नीचे छिपाकर बाहर निकल गया। पेंटिंग दो साल बाद फ्लोरेंस में बरामद की गई। लूव्र में मेसोपोटामिया, मिस्र से लेकर दुनिया भर की प्राचीन वस्तुओं, मूर्तिकला और चित्रकला की 33,000 से अधिक कृतियां प्रदर्शित हैं।(भाषा)
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