मेजिस्ट्रेट को वेश्यालय की संपत्ति जब्त करने का अधिकार

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हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि वेश्यावृत्ति के आरोप पर संपत्ति जब्त करने का अधिकार केवल मेजिस्ट्रेट के पास है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस को ऐसी संपत्ति जब्त करने का अधिकार नहीं है। रंगारेड्डी ज़िले के शेरीलिंगमपल्ली मंडल के गुट्टला बेगमपेट स्थित पाँच मंजिला वी.आर. रॉयल विस्टा भवन के मालिक अल्लूरी सीतारामाराजू ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उनके मकान को जब्त करने को चुनौती दी। उनके मकान में किराएदार वेश्यालय संचालित कर रहा था, जिसके चलते पुलिस ने उनका मकान जब्त कर लिया।

इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस ई.वी. वेणुगोपाल ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपनी आजीविका के लिए घर किराए पर दिया है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को वहाँ की दैनिक गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि भवन में चल रही अवैध गतिविधियों के लिए केवल किराएदार ही जिम्मेदार है। याचिकाकर्ता को नोटिस दिए बिना और स्पष्टीकरण प्राप्त किए बिना जब्ति की कार्रवाई की गई।
सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि भवन में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए ही इसे जब्त किया गया।

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पुलिस सूचना पर मजिस्ट्रेट ही जारी करेगा नोटिस

दलील सुनने के पश्चात न्यायाधीश ने फैसला सुनाया और स्पष्ट किया कि अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 के तहत वेश्यावृत्ति की गतिविधियों के संबंध में पुलिस द्वारा दी गई सूचना के आधार पर नोटिस जारी करने और परिसर को जब्त करने का अधिकार केवल मेजिस्ट्रेट के पास है।

पुलिस के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान मामले के रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता भवन का मालिक है और उसने जान-बूझकर किराएदारों को अवैध गतिविधियाँ करने की अनुमति दी, ऐसा कोई सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई भी सबूत नहीं है कि याचिकाकर्ता के इस स्पष्टीकरण पर विचार किया गया हो कि वह दैनिक गतिविधियों में शामिल नहीं है।

न्यायाधीश ने आगे कहा कि केवल इसलिए कि वह भवन का मालिक है, इसे वहाँ हो रही अवैध गतिविधियों के लिए उसकी सहमति नहीं माना जाना चाहिए और इस तरह की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत और आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने भवन को जब्त करने में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की। न्यायाधीश ने भवन को जब्त करने के लिए लगाई सील तुरन्त हटाने और भवन याचिकाकर्ता को सौंपने के आदेश दिए। यदि पुलिस को लगता है कि भवन को जब्त करना आवश्यक है, तो वे कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकते हैं।

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