अक्सर जब किसी व्यक्ति के जीवन में हलचल होती है, तो जीवन में वाद-विवाद, कलह-क्लेश, अपेक्षाओं का पूरा न होना, परिस्थितयां अनुकूल न होना जैसी स्थितियां आती हैं, तब उस व्यक्ति का मन किसी भी कार्य में नहीं लगता है। उसके मन में नकारात्मक विचार घर करने लगते हैं, ऐसे में ज्योतिषीय उपायों का सहारा लेना उचित रहता है। जहां मनोविज्ञान व्यक्ति के व्यक्तित्व, उसकी मानसिक क्षमता, उस व्यक्ति के बारे में असंख्य जानकारी उपलब्ध कराता है, वहीं ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति के द्वारा व्यक्ति के मन की परतों को खोलकर भीतर छिपे रहस्यों को उजागर किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति की जन्म-कुण्डली में यदि चन्द्रमा निर्बल हो, पीड़ित हो, नीच अवस्था में हो, तो उस व्यक्ति को निर्णय लेने में कठिनाई होती है और जीवन में जरा-सी विपरीत परिस्थिति आने पर उसका मन तुरंत विचलित हो जाता है। विचलित मन के प्रभाव से व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। जब मन में नकारात्मक सोच-विचार ज्यादा आएं, तो व्यक्ति को स्वयं को किसी ऐसे कार्य में लगाने का प्रयास करना चाहिए, जिसमें उसकी रुचि हो। ज्योतिष शास्त्र में उपायों के द्वारा मन को सबल बनाने के विभिन्न तरीके बताये जाते हैं, जो व्यक्ति को नकारात्मक परिस्थिति से लड़ने और अपने अनुकूल बनाने में मददगार साबित होते हैं।
उपाय
- जन्मकुण्डली में चंद्रमा निर्बल होने पर शिव जी की शरण में जाना चाहिए। प्रत्येक सोमवार को शिवजी को जल एवं अक्षत चढ़ाने से व्यक्ति का मन शांत हो जाता है।
- पूर्णिमा को चांदी के अर्द्धचंद्रमा में मोती जड़वाकर धारण करने से सुरक्षा-कवच का कार्य होता है, जिससे व्यक्ति का मन विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहता है।
- प्रत्येक पूर्णिमा को व्रत रखकर सफेद वस्तुओं का दान करना भी श्रेयस्कर उपाय है, जिससे जन्म-कुण्डली में मौजूद पीड़ित चन्द्रमा को बल प्राप्त होता है।
- जन्मकुण्डली में चन्द्रमा यदि राहु के साथ स्थित हो, तो वह ग्रहण योग का सजृन करता है। अत प्रत्येक सोमवार दो बड़े बताशे का दान अवश्य करें।
- ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा माता का कारक है, अत कोई भी विपरीत परिस्थिति हो, तो अपनी माता से सलाह लेकर ही कार्य-व्यवहार करें और उनकी सेवा करने से नहीं चूकें।
