हिंसा छोड़कर मुख्य धारा में शामिल हों माओवादी : शिवधर रेड्डी
हैदराबाद, तेलंगाना पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने सीपीआई (माओवादी) पार्टी के भूमिगत नेताओं और कैडर से हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होकर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने भी माओवादियों से हिंसा का मार्ग छोड़ अपने परिवार के पास लौटने और समाज में शांतिपूर्वक जिन्दगी अपनाने की अपील की है।
यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में शिवधर रेड्डी ने बताया कि तेलंगाना पुलिस के लगातार प्रयास की वजह से तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग रैंक के 721 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर जीवन की मुख्य धारा को अपना लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में चार सेंट्रल कमेटी सदस्य, 19 स्टेट कमेटी सदस्य और 36 डिवीजनल कमेटी सदस्य शामिल है।
शिवधर रेड्डी ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य सरकार की ओर से नीति के तहत आर्थिक सहायता और अन्य दूसरी सुविधाएँ दी जा रही हैं, जिससे वे अपने गाँव में सम्मानजक जिन्दगी गुजार सकें। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में माओवादी दलों में सक्रिय तेलंगाना के माओवादी नेता मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (72), पुसुनूरी नरहरि उर्फ संतोष (57), वार्ता शेखर उर्फ मंगतू (51), जोडे रत्ना बाई उर्फ सुजाता (68), नक्का सुशीला उर्फ रेला (51) और रंगा बोयना भाग्या उर्फ रूपी (43) से विशेष अपील की जा रही है कि वे आत्मसमर्पण कर पुनर्वास योजना का लाभ उठाएँ।
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गणपति के इलाज के लिए सरकार देगी मेडिकल सुविधा
डीजीपी ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार सेंट्रल कमेटी सदस्य गणपति के लिए हैदराबाद में एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट की सुविधा देगी, जिन्हें कथित तौर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। उन्होंने गत 7 मार्च को हुए संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गणपति से की गई अपील का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के समक्ष 7 मार्च को 130 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास योजना को देखते हुए अन्य राज्यों के माओवादी आत्मसमर्पण करने की इच्छा जता रहे हैं।
भूमिगत माओवादी नेताओं के परिवारों से भी आग्रह किया जा रहा है कि वे भी आत्मसमर्पण के लिए अपील करते हुए अपने परिवार के सदस्यों को मनायें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समस्याओं को प्रजा तांत्रिक तरीके से निपटाया जा सकता है, न कि हिंसा से। उन्होंने पुन एक बार माओवादी कैडर से हिंसा का रास्ता छोड़कर राज्य के विकास में भागीदार बनने की अपील की।
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