हर घर पधारें प्रभु महावीर
प्रभु महावीर के जन्म-कल्याण के पावन अवसर पर
लेखनी के माध्यम से अर्पित करती हूं श्रद्धा के अक्षर है
वीतराग देवार्य प्रभु वर्धमान अरिहन
जग में बरसाए ज्ञान के मोती ज्योति सुमन
त्रिशला माता के लाल, सिद्धार्थ राजा के दुलार
शत-शत नमन वंदन करता, है उन्हें सारा संसार
शांति के स्थापक हैं, ये अहिंसा की मूरत
चल रहा है जग में, प्रभु महावीर का रथ
प्रभु महावीर के चरणों में, जीवन हो अर्पण
हम सबका जीवन हो, पावन जैसे हो दर्पण
बारंबार वंदन उन्हें अहिंसा, सत्य गुणों को अपनाया
विश्व कल्याण के लिए, अपना राजमहल बिसराया
सुनकर प्रभु की वाणी को, बने महान आराधक
आत्मसात कर जीवन में बनें, हम उत्तम साधक
उनके उपदेशों पर चलकर, हम अपना जीवन धन्य करें
केवल अपना ही न सोचें, औरों के भी कष्ट हरें
जैनकुल में जन्म लिए, धन्य है हमारा जीवन
जहां त्याग, तपस्या से, खिलते हैं सुगंधित सुमन
महावीर के उपदेशों का, मिलकर करें प्रचार
जैन धर्म की शिक्षा है, जीवन का आधार
समस्त विश्व में गूंजती है, एक ही आवाज़
‘जीयो और जीने दो’ का, गूंज रहा है साज़
धर्म की राह पर चलकर, जगाएँ विनय विवेक
जपकर नवकार मंत्र, जीवन आपका होगा नेक
मनोकामना प्रीत की, हर घर पधारें प्रभु महावीर
इस पवित्र दिवस पर बरसें, खुशियां मन गंगा का नीर।
प्रीति पितलिया (हैदराबाद)
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