महाशिवरात्रि का लघु रूप है मासिक शिवरात्रि

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चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 17 मार्च, मंगलवार की सुबह 9 बजकर 23 मिनट से शुरु हो रही है, जो 18 मार्च, बुधवार की सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। चैत्र मासिक शिवरात्रि का व्रत 17 मार्च, मंगलवार को रखा जाएगा।

पूजा मुहूर्त

18 मार्च, बुधवार की रात 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक।

हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस दिन शिव परिवार की विधिवत पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा है। मासिक शिवरात्रि का महत्व महाशिवरात्रि जैसा ही होता है, लेकिन इसकी पूजा विधि अपेक्षाकृत सरल होती है।

पूजा विधि

सुबह स्नान करके भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजाघर या शिवालय में शिवलिंग का अभिषेक करें। शिवलिंग पर जल या गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान ॐ नम शिवाय मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है।

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धार्मिक मान्यता है कि शिवरात्रि की रात शिवलिंग में भगवान शिव विशेष रूप से विराजमान रहते हैं, इसलिए इस समय पूजा और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। अगले दिन सुबह भगवान शिव की पूजा करने के बाद व्रत का पारण करके सामर्थ्यानुसार जरूरतमंदों को दान दिया जाता है।

नियम

वत के दिन सात्विक भोजन करें। मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें। क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहने का प्रयास करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। भगवान शिव के मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करें।

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