एनएमडीसी अनुसंधान एवं विकास केंद्र और आईआईटी हैदराबाद के मध्य समझौता
हैदराबाद, एनएमडीसी के अनुसंधान एवं विकास केंद्र ने भारत के खनिज और धातु क्षेत्र के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद (आईआईटीएच) के साथ समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। खनिज प्रसंस्करण और संबद्ध क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एनएमडीसी के अधिशासी निदेशक (आरएंडडी) संजीव साही और आईआईटी हैदराबाद के डीन (प्रायोजित अनुसंधान और परामर्श) ने आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी.एस. मूर्ति की उपस्थिति में समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह साझेदारी फील्ड की विशेषज्ञता और अकादमिक उत्कृष्टता के बीच मजबूत सहयोग का प्रतिनिधित्व करती है। एनएमडीसी और आईआईटी हैदराबाद साथ मिलकर लौह अयस्क बेनीफिशिएशन और एग्लोमेरेशन, हरित इस्पात निर्माण प्रौद्योगिकियों, स्वदेशी कच्चे माल का उपयोग कर वैकल्पिक लौह निर्माण और खनन व धातुकर्म प्रक्रियाओं के उन्नत मॉडलिंग तथा सिमुलेशन में अनुसंधान को आगे बढ़ाएँगे। यह सहयोग प्राथमिक और माध्यमिक स्रोतों से महत्वपूर्ण और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के उत्खनन में नए रास्ते भी बनाएगा, जिससे भारत की खनिज सुरक्षा और संसाधन उपलब्धता सुदृढ़ होगी।
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खनन में डिजिटल परिवर्तन और माइनिंग 4.0 तकनीक को बढ़ावा
खनन क्षेत्र में तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन के साथ संरेखित, एमओयू स्वायत्त वाहन चालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), माइनिंग 4.0 फ्रेमवर्क और ड्रोन सक्षम सर्वेक्षण, निगरानी में अनुसंधान तथा पायलट पहलों को चलाएगा। एनएमडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी ने समझौते ज्ञापन पर कहा कि आईआईटी हैदराबाद के साथ साझेदारी उद्योग-अकादमिक गठजोड़ नवाचार के प्रति एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
आईआईटी हैदराबाद की अनुसंधान उत्कृष्टता और एनएमडीसी की डोमेन विशेषज्ञता का लाभ उठाकर यह साझेदारी खनन, खनिज प्रसंस्करण और उभरते क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाएगी, जो सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत के विजन में योगदान देगी। यह साझेदारी नवाचार संचालित विकास हेतु एनएमडीसी की प्रतिबद्धता और अनुसंधान को प्रभावशाली औद्योगिक अनुप्रयोगों में बदलने में आईआईटी हैदराबाद की भूमिका को रेखांकित करती है।
दोनों संस्थान आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय विज़न में योगदान देंगे। विशेष रूप से यह सहयोग एक ऐतिहासिक क्षण में आया है, क्योंकि एनएमडीसी के अनुसंधान एवं विकास केंद्र ने भारत के खनिज विकास के इतिहास में समर्पित योगदान के 50 वर्ष पूरे किए हैं, जो अनुसंधान में उत्कृष्टता की अपनी विरासत और तकनीकी उन्नति के निरंतर प्रयासों को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।
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