मूसी बनेगी ग्रोथ इंजन : 21 किमी के पहले चरण पर 7 हजार करोड़ खर्च

हैदराबाद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि मूसी पुनरुद्धार परियोजना किसी के खिलाफ नहीं है और किसी को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से इसे नहीं बनाया गया है। हालाँकि कुछ लोग जानबूझकर जनता को परेशान करने के उद्देश्य से और कुछ लोग अधूरी जानकारी के साथ इस परियोजना के खिलाफ गलत प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का पहला चरण 21 किलोमीटर का होगा और इसके विकास के लिए 6,500 से 7 हजार करोड़ तक खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गांधी प्रतिमा पर 5 हजार करोड़ खर्च होने का गलत आरोप लगा रहे है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बापू घाट के विकास पर लगभग 250 करोड़ ही खर्च होंगे और इसमें गांधी प्रतिमा पर खर्च होने वाले 70 करोड़ भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मूसी पुनरुद्धार परियोजना राज्य के लिए ग्रोथ इंजन बनेगा। राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि 16 मार्च से आरंभ होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में मूसी पुनरुद्धार परियोजना पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने इस परियोजना को रोकने का प्रयास करने वाले विपक्षी नेताओं से इस चर्चा में भाग लेकर सरकार को निर्माणात्मक सुझाव देने की हिदायत दी।

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार ने जहरीले मूसी नदी का पुनरुद्धार करने का निर्णय लिया है। इसके मद्देनजर मूसी रिवर फ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमआरडीसीएल) द्वारा एक स्टार होटल में मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना की जानकारी देने मूसी इनवाइट्स कार्यक्रम आयोजित किया गया। सीएस ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर एमआरडीसीएल के प्रबंध निदेशक नरसिम्हा रेड्डी ने मूसी पुनरुद्धार परियोजना पर एक विस्तृत पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण दिया।

मूसी पुनरुद्धार कार्यक्रम में कई मंत्री और नेता शामिल

इस कार्यक्रम में विधानसभा स्पीकर प्रसाद कुमार, विधान परिषद अध्यक्ष गुत्ता सुखेंदर रेड्डी, उप-मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का सहित कई मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य आदि  ने भाग लिया। तत्पश्चात सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि वह जिम्मेदारी से मूसी नदी का पुनरुद्धार करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विदेश में कई नदियों का दौरा किया और उनका अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि वह दो साल तक विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ हर पहलू की अच्छी तरह से जाँच की है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद एक महान विरासत शहर है। कई देश विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

इसके मद्देनजर अगर हम हैदराबाद शहर का विकास नहीं करेंगे, तो भावी पीढ़ी हमें क्षमा नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र में 12 वर्षों से शासन करने वाले और राज्य में 10 वर्ष शासन करने वाले भी आज मूसी पुनरुद्धार परियोजना को रोकने का प्रयास कर रहे है, लेकिन परियोजना को रोकने से समस्या का समाधान नहीं मिलेगा। अगर इस परियोजना में कुछ गलतियाँ है, तो बताएँ। उन्होंने कहा कि मानव गलतियों से ही मूसी नदी आज जहरीली बन गयी है।

मूसी प्रदूषण से गरीब और नलगोंडा के लोग सबसे अधिक प्रभावित

इससे शहर में नदी के किनारे रहने वाले गरीब  लोगों के साथ-साथ नलगोंडा जिले वासी भयानक सजा भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से केवल मूसी नदी का पुनरुद्धार ही नहीं होगा, बल्कि हमारे इतिहास का भी पुनरुद्धार होगा। उन्होंने इस परियोजना को रोकने का प्रयास कर रहे विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्हें मूसी नदी के किनारे तीन महीने बिताने की चुनौती दी। तब ही इस परियोजना को रोकने का प्रयास करने वालों को गरीबों की परेशानियाँ समझ में आयेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से 10 हजार से अधिक गरीब परिवार विस्थापित होंगे। इन सभी परिवारों की जानकारी सरकार के पास है और उन्हें सरकार अनाथ नहीं छोड़ेगी। प्रत्येक विस्थापित परिवार को घर देने के साथ-साथ सरकार की ओर से सभी प्रकार के सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मूसी में बाढ़ आने पर हजारों लोग बेघर हो जाते हैं। बाढ़ इसलिए आ रही है क्योंकि हम उन इलाकों पर कब्ज़ा कर रहे हैं जहां पानी बहता है। मूसी पुनरुद्धार परियोजना से शहर को बाढ़ की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया राज्य सरकार हैदराबाद शहर वासियों की प्यास बुझाने के लिए कई कदम उठा रही है। अब हमने गोदावरी से 20 टीएमसी पानी हैदराबाद लाने का प्रयास कर रहे है। इसमें पेयजल की आपूर्ति के लिए 17.5 टीएमसी और मूसी नदी पुनरुद्धार के लिए 2.5 टीएमसी को उपयोग करने का योजना बनायी गयी है। हैद्रा के जरिए हैदराबाद शहर में तालाबों का पुनरुद्धार भी कर रहे हैं। इसके लिए लोग हमारा गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं।  

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परियोजना के प्रमुख घटक

मूसी नदी विकास प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक नरसिम्हा रेड्डी ने बताया कि मूसी नदी के पुनरुद्धार और विकास के लिए सरकार ने जो महत्वपूर्ण योजना तैयार की हैं, उसके स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, आधारभूत संरचना विकास और बहुद्देश्यीय बफर जोन महत्वपूर्ण घटक हैं। नरसिम्हा रेड्डी ने बताया कि सीवेज रोकथाम के अंतर्गत अशोधित मलजल को नदी में जाने से रोकने के लिए बड़े ट्रंक पाइपलाइन और विशेष सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे।

बापू घाट के विकास के अंतर्गत मूसी और इसा नदियों के संगम पर गांधी सरोवर का निर्माण किया जाएगा। यहां विश्वस्तरीय स्मारक और सार्वजनिक स्थल विकसित किए जाएंगे। बहुउद्देश्यीय बफर ज़ोन में नदी किनारे लोगों के लिए पार्क, साइकिल ट्रैक और वॉकवे जैसी सुविधाओं के साथ सुलभ रिवरफ्रंट विकसित किए जाएंगे। जल प्रवाह की स्थिरता के लिए मूसी नदी में साल भर स्वच्छ जल प्रवाह बनाए रखने के लिए गोदावरी का पानी लाया जाएगा।

इस परियोजना के कारण लगभग 1,000 परिवारों के विस्थापन की स्थिति बनी है और जलवायु परिवर्तन से होने वाली शहरी बाढ़ का खतरा भी बढ़ रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सभी विभाग मिलकर एक समन्वित योजना पर काम कर रहे हैं।  नरसिम्हा रेड्डी ने कहा कि प्रस्तावित योजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि उपयोग में बदलाव और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य भी रखती है। हैदराबाद को ब्लू और ग्रीन इकोनॉमी के रूप में विकसित किया जाएगा। क्षेत्र की लगभग 1,000 झीलों को एक स्वच्छ और बहती हुई नदी प्रणाली से जोड़ा जाना चाहिए। इस परियोजना में मूसी नदी को शहर की रीढ़ मानते हुए भविष्य की पीढ़ियों को बाढ़ जैसी आपदाओं से सुरक्षित रखने और लोगों के लिए आकर्षक तथा सुलभ नदी तट उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है।

ऐतिहासिक स्थलों की मैपिंग

55 किलोमीटर लंबी मूसी नदी के कायाकल्प प्रोजेक्ट के तहत कई ऐतिहासिक स्थलों की पहचान की गई है। अधिकारी इन स्थलों को नदी के किनारे हेरिटेज टूरिज्म और सांस्कृतिक पहलों के ज़रिए आपस में जोड़ने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। इस योजना में जिन मुख्य इमारतों की मैपिंग की गई है, उनमें गोलकोंडा किला, कुतुब शाही मकबरे, तारामती बारादरी, श्री वीरभद्र स्वामी देवालयम, पुराना पुल, गवर्नमेंट सिटी कॉलेज, मक्का मस्जिद, चारमीनार, तेलंगाना हाई कोर्ट की इमारत, उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल और कोठी स्थित ब्रिटिश रेजिडेंसी शामिल हैं।  

हेरिटेज कॉन्सेप्ट मैप का अनावरण शुक्रवार को मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक ई.वी. नरसिम्हा रेड्डी ने किया। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मूसी नदी हैदराबाद के कुछ सबसे पुराने ऐतिहासिक इलाकों से होकर गुज़रती है, खासकर पुराने शहर के आसपास, जहाँ नदी के किनारों पर कई मशहूर स्मारक और नागरिक संस्थान विकसित हुए हैं।

मूसी नदी के कायाकल्प की इस योजना का मकसद नदी के किनारे के लगभग 55 किलोमीटर के हिस्से को फिर से संवारना और विकसित करना है। इसमें नदी की सफाई, पर्यावरण का सुधार, नदी के किनारे का विकास और आम लोगों की पहुँच को आसान बनाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। अधिकारी इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि नदी के किनारे या उससे जुड़े ऐतिहासिक ढाँचों को किस तरह एक बड़े हेरिटेज टूरिज्म नेटवर्क में शामिल किया जाए, ताकि शहर की ऐतिहासिक पहचान भी बनी रहे।

पाँच चरणों में पुनरुद्धार

राज्य सरकार ने पांच चरणों में मूसी पुनरुद्धार परियोजना लागू करने का निर्णय लिया है। एमआरडीसीएल के प्रबंध निदेशक नरसिम्हा रेड्डी ने मूसी पुनरुद्धार परियोजना पर दिये पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के दौरान कहा कि शहर में मूसी नदी का बहाव क्षेत्र 55 किलोमीटर है। इसमें मूसा और ईसा नदियों का संगम स्थान बापू घाट तक 21 किलोमीटर तक पहले चरण होगा। इसके बाद दूसरे चरण 6 किमी, तीसरा चरण 4 किमी, चौथा चरण 8 किमी और पांचवें चरण 16 किलोमीटर का होगा।

गंडीपेट से लेकर गौरेल्ली तक शहर से होते हुए एक एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण करने का प्रस्ताव भी है। इससे विजयवाड़ा जाने वाले लोग शहर के यातायात से बच सकते हैं और समय भी बचेगा। इस प्रस्तुतीकरण में सीएम रेवंत रेड्डी की विदेश यात्रा भी दिखायी दिये, जिसके दौरान उन्होंने उन क्षेत्रों के रिवरफ्रंटों का  दौरा किया। इस अवसर पर एआई द्वारा निर्मित एक फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें पुनरुद्धार परियोजना के पूरा होने के बाद मूसी नदी की सुंदर स्थिति को दर्शाया गया।  

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