शिक्षा से विरासत बचा रहा नगा समाज: मोदी
नयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को नगालैंड की पारंपरिक मोरूंग शिक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रथा के माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जा सकती है।
नगालैंड की मोरूंग प्रणाली एक पारंपरिक सामुदायिक शिक्षा मॉडल है, जो सामाजिक, सांस्कृतिक और जीवन कौशल सीखने के केंद्र के रूप में कार्य करता है। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि नगा समुदाय शिक्षा के माध्यम से अतीत को संरक्षित करने और भविष्य को तैयार करने का एक प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के लोग अपनी आदिवासी परंपराओं का बहुत सम्मान करते हैं तथा वे इस पर गर्व तो करते ही हैं, साथ ही अपने रुख को आधुनिक भी रखते हैं।
आने वाली पीढ़ियों के लिये एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है
नगा जनजाति में मोरूंग शिक्षा की एक पारंपरिक व्यवस्था थी, इसमें, बुजुर्ग लोग अपने अनुभवों से युवाओं को पारंपरिक ज्ञान, इतिहास और जीवन के कौशल के बारे में बताते थे। उन्होंने कहा, ‘‘समय के साथ यह प्रणाली अब मोरूंग की शिक्षा की अवधारणा में बदल गया है। इसके माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जाती है।
मोदी ने कहा, ‘‘इसमें समुदाय के बुजुर्ग उन्हें कहानियां, लोकगीत और पारंपरिक खेलों के साथ जीवन के कौशल सिखाते हैं। इस तरह हमारा नगालैंड अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए, बच्चों की शिक्षा को आगे ले जा रहा है। आपको भी अपने क्षेत्र में ऐसे प्रयासो के बारे में पता चले, तो मुझे जरूर साझा कीजिएगा।’’
प्रधानमंत्री ने नगालैंड के चिजामी गांव से सामने आए एक बेहद प्रेरणादायक प्रयास के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि चिजामी गांव की महिलाएं मिलकर 150 से अधिक तरह के पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रख रही हैं। उन्होंने कहा कि इन बीजों को एक सामुदायिक बीज बैंक में संरक्षित किया जा रहा है, जिसे गांव की महिलाएं ही चलाती हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘इनमें चावल, बाजरा, मक्का, दालें, सब्जियां और कई तरह की जड़ी-बूटियां शामिल हैं। यह एक ऐसा प्रयास है, जिसमें ज्ञान भी सुरक्षित है, परंपरा भी जीवित है और आने वाली पीढ़ियों के लिये एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है।’’
‘‘आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब ऐसे प्रयास हमें यह बताते हैं कि समाधान हमेशा कहीं दूर नहीं होता। कई बार हमारे अपने पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रयास ही हमें सबसे मजबूत रास्ता दिखाते हैं।’’
मछुआरे आत्मनिर्भर भारत की नींव- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे मछुआरे भाई-बहन सिर्फ समुद्र के योद्धा नहीं हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर भारत की एक मजबूत नींव भी हैं. वे सुबह होने से पहले समुद्र की लहरों से जूझते हुए, अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुट जाते हैं. ऐसे मेहनतकश मछुआरों का जीवन आज कई तरह से आसान बनाया जा रहा है. चाहे बंदरगाहों का विकास हो या मछुआरों के लिए बीमा, ऐसी कई पहल उनके बहुत काम आ रही है.”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हम जानते हैं कि समंदर में उनकी गतिविधियों को मौसम का रुख बहुत प्रभावित करता है. इसे देखते हुए तकनीक के जरिए भी उनकी पूरी मदद की जा रही है. मुझे बेहद खुशी है कि ऐसे प्रयासों से हमारा मत्स्य पालन क्षेत्र न केवल समृद्ध हो रहा है, बल्कि कुछ नया करने का जज्बा भी भर रहा है. आज मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल के क्षेत्र में नए-नए नवाचार हो रहे हैं और हमारे मछुआरे भाई-बहन आत्मनिर्भर बन रहे हैं.”
महिला मधुआरे के लिए कितान मुश्किल है जीवन- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, “ओडिशा के सम्बलपुर की सुजाता भूयान जी एक गृहणी थीं, लेकिन वह कुछ नया करके अपने परिवार की और मदद करना चाहती थीं. इसलिए कुछ वर्ष पहले उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू की. शुरुआती दिन उनके लिए आसान नहीं थे. मौसम में होने वाले बदलाव, मछलियों के खाने का प्रबंध और घर की जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाने जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन उनका हौसला अडिग था. केवल दो-तीन वर्ष के भीतर उन्होंने अपने प्रयास को एक फलते-फूलते उद्योग में बदल दिया. आज उनकी सफलता समुदाय की महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई. ”
प्रधानमंत्री ने कहा, “इसी तरह लक्षद्वीप में मिनीकॉय के हाव्वा गुलजार जी की कहानी हमारी माताओं-बहनों की अद्भुत संकल्प-शक्ति को सामने लाती है. दरअसल वे एक फिश प्रोसेसिंग यूनिट चलाती थीं. लेकिन उन्हें लगा कि उनके पास एक अच्छा कोल्ड स्टोरेज हो तो वे और बेहतर कर सकती हैं, इसलिए, उन्होंने कोल्ड स्टोरेज यूनिट लगाने का फैसला किया. आज यही उनकी ताकत बन चुका है. अब वे बेहतर प्लानिंग के साथ कारोबार कर पा रही हैं.”भाषा
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