नवरात्रि : दुर्गा कवच पाठ से होती है साधक के शारीरिक अंगों की रक्षा
माना जाता है कि नवरात्रि में सच्चे मन से की गई पूजा और भक्ति से मां दुर्गा सभी कष्टों को दूर करती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। मान्यता है कि इन नौ दिनों में शक्ति की आराधना से भक्ति, शक्ति और आस्था के साथ आरोग्य का वरदान माता देती हैं। हमारे शरीर के हर अंग पर मां आदि शक्ति की एक शक्ति विराजमान रहती है और उनकी रक्षा करती हैं।
नवरात्रि में दुर्गा कवच का पाठ बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मार्कंडेय पुराण में वर्णित दुर्गा सप्तशती का एक शक्तिशाली हिस्सा है, जिसे ब्रह्माजी ने ऋषि मार्कंडेय को बताया था। दुर्गा कवच मां दुर्गा के नौ रूपों द्वारा साधक के पूरे शरीर की रक्षा करता है।
यह स्तोत्र ना केवल शारीरिक रक्षा करता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है। धर्म शास्त्रों में वर्णित है कि दुर्गा सप्तशती के नित्य पाठ करने से भय, नकारात्मकता की समस्या, शत्रु, रोग से मुक्ति मिलती है। यह आरोग्य, समृद्धि, मनोकामना पूर्ति, सुख-शांति और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है।
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दुर्गा कवच से भय और रोगों से मिलती है सुरक्षा
दुर्गा सप्तशती के कवच में उल्लेखित है कि दुर्गा के विभिन्न रूप भक्तों के अलग-अलग अंगों की रक्षा करते हैं। यह कवच साधक को हर प्रकार के भय से मुक्त रखता है और सभी रोगों का नाश करता है। सच्चे मन से पाठ करने वाले को हर संकट से सुरक्षा मिलती है। नवरात्रि में सुबह या शाम इस कवच का पाठ करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।दुर्गा सप्तशती के कवच में उल्लेखित है कि चामुंडा देवी सिर की रक्षा, माता शैलजा आंखों की, विशालाक्षी कानों की रक्षा करती हैं।
माहेश्वरी माता नाक, महाकाली मुंह की, महा सरस्वती जीभ की और वाराही देवी गर्दन की रक्षा करती हैं। माता अंबिका हृदय की रक्षा करती हैं और माता कौमारी भुजाओं की रक्षा करती हैं। दुर्गा सप्तशती के कवच में बताया गया है कि माता चंडिका हाथों की, नारायणी उदर की, देवी महालक्ष्मी जांघों की, देवी भैरवी घुटनों की, महाकाली पिंडलियों (जांघों के पीछे) की तो ब्रह्मांड की देवी (दुर्गा) पैरों और पूरे शरीर की रक्षा करती हैं।
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