एनआईए ने म्यांमा मानव तस्करी मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया

नयी दिल्ली, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मानव तस्करी और साइबर धोखाधड़ी रैकेट के मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

इन आरोपियों में एक फरार संदिग्ध चीनी नागरिक भी शामिल है। यह रैकेट ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाता था। एजेंसी ने हरियाणा के पंचकूला स्थित एनआईए विशेष अदालत में बुधवार को दाखिल आरोपपत्र में कहा कि उसने तस्करों और दलालों के एक सुसंगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एजेंसी ने एक बयान में कहा कि आरोपियों – अंकित कुमार उर्फ ​​अंकित भारद्वाज, इश्तिखार अली उर्फ ​​अली और फरार चीनी नागरिक लीजा – पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आव्रजन अधिनियम की धारा 24 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

बयान में कहा गया है कि एनआईए की जांच में पता चला है कि तीनों व्यक्ति अपने कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर भारतीय युवाओं को म्यांमा के म्यावाडी क्षेत्र में मानव तस्करी के जरिए भेज रहे थे। यह मामला पहले हरियाणा पुलिस के पास था जिसे बाद में एनआईए ने अपने हाथ में लिया। एजेंसी के अनुसार, आरोपी भारतीय नागरिकों को बिना लाइसेंस के विदेश के लिए भर्ती करने और उन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में आपराधिक गतिविधियों के लिए गैरकानूनी तरीके से भेजने सहित कई अवैध गतिविधियों में लिप्त थे।

फर्जी क्रिप्टो ऐप से विदेशी नागरिकों को बनाया शिकार

एनआईए के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों अंकित कुमार और इश्तिखार अली ने युवाओं को थाईलैंड में “वैध नौकरी” का झांसा दिया। उसने बताया कि उन्होंने म्यांमा में चीनी नागरिक लीजा के साथ ऑनलाइन साक्षात्कार भी करवाए और लीजा को प्रामाणिक नौकरी दिलाने वाली अधिकारी के तौर पर पेश किया गया ताकि युवाओं को भरोसा हो सके कि उन्हें थाईलैंड में सुरक्षित नौकरी मिलेगी। एजेंसी के अनुसार, इसके बाद आरोपियों ने युवाओं को भारत से थाईलैंड के रास्ते अवैध रूप से म्यांमा भेजने की व्यवस्था की। उसने बताया कि म्यांमा पहुंचने पर इन युवाओं को साइबर ठगी करने वाली कंपनियों में जबरन काम करने पर मजबूर किया गया।

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एनआईए के अनुसार, वहां पीड़ित युवाओं से फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनवाए गए और अमेरिका, ब्रिटेन एवं कनाडा के लोगों से संपर्क करके फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ऐप के जरिए निवेश कराने को कहा गया। एजेंसी के अनुसार, मना करने पर पीड़ितों को बंदी बनाकर प्रताड़ित किया जाता था और रिहाई के लिए उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। (भाषा)

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