ओली गिरफ्तारी पर नेपाल सरकार से कोर्ट ने मांगा जवाब
काठमांडू, नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने नवगठित बालेंद्र शाह सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के संबंध में स्पष्टीकरण मांगते हुए सोमवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
उच्चतम न्यायालय ने ओली की पत्नी राधिका शाक्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जवाब में यह आदेश जारी किया। शाक्य ने कल यह याचिका दायर कर उनकी तत्काल रिहाई की मांग की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति मेघराज पोखरेल की एकल पीठ ने पूर्व प्रधानमंत्री को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। ओली को पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए ‘जनरेशन जेड’ के विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई में संलिप्त रहने को लेकर 28 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।
हिंसा में 76 लोग मारे गए थे। यह गिरफ्तारी नवगठित बालेंद्र शाह सरकार द्वारा अपनी पहली मंत्रिमंडलीय बैठक में ‘जनरेशन जेड’ के विरोध प्रदर्शनों पर जांच आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लिये जाने के बाद हुई। राधिका शाक्य ने याचिका में दावा किया कि उनके पति को गैरकानूनी हिरासत में रखा गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता टिकाराम भट्टराई ने तर्क दिया कि तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी करके के पी शर्मा ओली को गिरफ्तार करना असंवैधानिक है।
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भट्टराई ने कहा कि गौरी बहादुर कार्की जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किसी को चुनिंदा रूप से गिरफ्तार करना अवैध है। इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर इसी तरह का कारण बताओ आदेश जारी किया था। ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को रविवार को काठमांडू जिला न्यायालय ने पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनकी गिरफ्तारी के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन जारी हैं। (भाषा)
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