मंदिरों के निकट माँस विक्रय पर नीति निर्धारित करने का आदेश
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मंदिरों, विद्यालयों और अस्पतालों के निकट माँसाहार का उपयोग और बिक्री के संबंध में एक नीति निर्धारित करने के राज्य सरकार को आदेश दिए। अदालत ने सुझाव दिया कि इन क्षेत्रों से लगभग 100 मीटर दूरी पर इनकी बिक्री और उपयोग किया जाना चाहिए। मंदिरों के निकट इसका उपयोग करने या बिक्री करने से भक्तों की मनोभावनाओं को ठेस पहुँच सकती है। इसीलिए 100 मीटर की दूरी तक उपयोग और विनियोग रहित नीति को अमल में लाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि धार्मिक विश्वसनीयता, स्वच्छता, यातायात समस्या आदि तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नीति में दिशा-निर्देश रहने चाहिए। इस प्रकार दुकान लगाने के लिए अनुमति देने के स्तर से इन्हें नियंत्रित करने हेतु कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके लिए यातायात समस्या रहित एनओसी संबंधित पुलिस थाने के अधिकारी द्वारा जारी करने का नियम शामिल किया जाए, तो यह उचित रहेगा। इस संबंध में राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने के आदेश देते हुए गृह विभाग, म्युनिसिपल, शहरी विकास विभाग को नोटिस जारी किए।
महाराष्ट्र निवासी आईबीपीएन रामदास द्वारा उच्च न्यायालय में दायर याचिका, जिसमें उन्होंने नामपल्ली स्थित 720 वर्ग गज स्थल पर उनके व्यापार में अधिकारियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए आदेश देने का आग्रह किया था, पर हाल ही में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि याचिकाकर्ता जीएचएमसी और खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस प्राप्त कर व्यापार कर रहे हैं, लेकिन धीरज कुमार नामक व्यक्ति की सूचना पर बिना लाइसेंस के माँसाहार बेचने का हवाला देते हुए नामपल्ली पुलिस ने याचिकाकर्ता के कर्मचारी को हिरासत में ले लिया।
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पुलिस कार्रवाई केवल सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशानुसार
इसी भवन में एक और माँसाहारी शॉप संचालित की जा रही है, लेकिन पुलिस उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इस पर सरकार और जीएचएमसी की ओर से अधिवक्ता ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के होटल से 100 मीटर की दूरी पर हनुमान मंदिर है। एसआर लाइफ किचन के नाम से माँसाहार बेचा जा रहा है। कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशानुसार पुलिस कार्रवाई कर रही है।
इस दौरान न्यायाधीश ने हस्तक्षेप कर कहा कि क्या प्रार्थना स्थलों के निकट माँसाहार और इसका उपयोग करने पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध है या नहीं। इसका सरकार की ओर से किसी प्रकार का कोई उल्लेख न करने को गलत ठहराया। केवल आबकारी नियमों का ही पालन मंदिर, विद्यालय और अस्पतालों को लेकर किया जा रहा है, जिसके तहत इन क्षेत्रों से 100 मीटर की दूरी पर शराब की दुकानों को अनुमति नहीं दी जा रही है।
अदालत ने कहा कि जीएचएमसी अधिनियम में इस प्रकार का कोई नियम न होने की बात कही गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि उसने अभी व्यापार प्रारंभ नहीं किया है, जबकि सरकार का कहना है कि वहाँ कबाब सेंटर चलाया जा रहा है। इस प्रकार की परिस्थिति को लेकर सरकार को चार सप्ताह के भीतर दिशा-निर्देश निर्धारित करने के आदेश दिए। इसके साथ ही दिशा-निर्देश जारी होने तक याचिकाकर्ता के व्यापार को लेकर यथास्थिति बनाए रखी जानी चाहिए। इस आदेश के साथ याचिका पर सुनवाई पूर्ण कर ली गई।
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