बालिका को चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी को सौंपने का आदेश
हैदराबाद, बच्चों की तस्करी करने वाले गैंग की जांच के तहत उच्च न्यायालय ने महिला और शिशु कल्याण विभाग को आदेश दिया है कि वह लड़की शरण्या को उसके गोद लेने वाले माता-पिता से छुड़ाकर चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी को सौंप दे और लड़की की हालत पर पूर्ण विवरण के साथ रिपोर्ट पेश करे। इस आदेश के साथ ही मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च तक स्थगित कर दी गई।
नलगोंडा के एम. वेंकन्ना और श्रावंती दंपत्ति, जिन्हें कोई बच्चे नहीं थे, ने यादगिरी नाम के एक व्यक्ति के ज़रिए कन्या शिशु (शरण्या) को गोद लिया था। यादगिरी के खिलाफ बच्चों को बेचने की शिकायत के आधार पर आपराधिक दर्ज किया गया था। मामले की जांच के तहत, शरण्या को चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी को सौंप दिया गया था। वेंकन्ना ने इसे चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की।
इस याचिका पर एकल न्यायाधीश ने सुनवाई करते हुए कहा कि कन्या शिशु को उसके माता-पिता के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा गोद लेना अमान्य है। उन्होंने वेंकन्ना दंपत्ति से कहा कि चूंकि उक्त व्यक्ति पर बच्चों की तस्करी का मामला चल रहा है, इसलिए बच्चे को सौंपने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता है। वेंकन्ना ने इन आदेशों को चुनौती देते हुए एक अपील दायर की। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जीएम मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई की।
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कानूनी प्रक्रिया के बिना गोद लेने की बात स्वीकार
अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि बच्चे को कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए गोद नहीं लिया गया था। बच्चे की भलाई, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए मीडिएटर को एक तय रकम भी दी गई थी। उन्होंने कहा कि बच्चे की देखभाल की ज़िम्मेदारी अपील करने वाले को वापस सौंप दी जाए।
अधिवक्ता ने खंडपीठ के ध्यान में उच्चतम न्यायालय का आर्टिकल 142 के ज़रिए पूरे न्याय के लिए हाल ही में दिये गये एक फैसले को लाया और कहा कि न्यायालय अपने सामने मौजूद खास मामले के बारे में साफ आदेश जारी कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह दूसरे मामलों पर लागू नहीं होगा। महिला और शिशु कल्याण विभाग के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि दंपत्ति ने बच्चे की तस्करी करने वाले गैंग के एक आरोपी से बच्चा गोद लिया था। अधिकारियों की जांच में पता चला कि 16 बच्चों को निसंतान दंपत्तियों को भारी रकम में बेचा गया था, इस दलील के साथ उन्होंने दायर अपील को खारिज करने का आग्रह किया। दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने अधिकारियों को बच्चे की हालत पर एक रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया और सुनवाई टाल दी।
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