ओयू की मेजबानी में एआईयू सेंट्रल जोन वाइस चांसलर मीट आरंभ

हैदराबाद, उस्मानिया विश्वविद्यालय की मेजबानी में दो दिवसीय एआईयू सेंट्रल जोन वाइस चांसलर मीट 2025-26 गुरुवार को आरंभ हुई। असोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के सहयोग से आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों को स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधानों के निर्माता बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने उद्घाटन भाषण में नवाचार के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता व क्वांटम प्रौद्योगिकी का संगम केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि शैक्षणिक आवश्यकता है।

हमारे विश्वविद्यालयों को प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता होने से हटकर स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधानों के निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा, जो भारतीय नैतिकता और मूल्यों को प्रतिबिंबित करते हों। उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुमार मोलुगरम ने स्वागत वक्तव्य देते हुए नैतिक व सांस्कृतिक अखंडता को बनाए रखते हुए एआई और क्वांटम प्रौद्योगिकियों के माध्यम से उच्च शिक्षा में परिवर्तन लाने की बात पर बल दिया। उन्होंने मौजूदा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग की रणनीतिक पुनर्व्यवस्था की घोषणा की।

स्मार्ट सिटी व परिवहन के लिए एआई केंद्र की रणनीतिक पहल

राज्यपाल ने कहा कि यह स्मार्ट शहरों, बुद्धिमान परिवहन, विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों तथा स्केलेबल बुनियादी ढाँचे के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का संस्थागत केंद्र होगा। इस रणनीतिक पहल से ओयू भारत के उन अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल हो जाएगा, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता को राष्ट्रीय अवसंरचना, स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों और औद्योगिक परिवर्तन को समर्थन देने वाली प्रमुख क्षमता के रूप में संस्थागत रूप देते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि यह केंद्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र और अंतर-विश्वविद्यालयीय पहलों को समर्थन देने वाले एक राष्ट्रीय शैक्षणिक और प्रौद्योगिकी संसाधन मंच के रूप में कार्य करने के लिए संरचित है। यह भारत एआई मिशन, विकसित भारत 2047, स्मार्ट सिटीज मिशन, राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, तेलंगाना एआई मिशन सहित राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप, केंद्र लचीले बुनियादी ढाँचे, बुद्धिमान स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों, स्मार्ट गतिशीलता, चिकित्सा बुनियादी ढाँचे के अनुकूलन और टिकाऊ औद्योगिक प्रणालियों को सक्षम बनाने वाली स्वदेशी एआई प्रौद्योगिकियों का विकास करेगा।

टीजीसीएचई के अध्यक्ष प्रो. वी. बालकिस्ता रेड्डी ने अपने संबोधन में राज्य के रणनीतिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कक्षाओं से एआई और क्वांटम-सक्षम पारिस्थितिकी तंत्रों की ओर डिजिटल छलांग अब कोई विकल्प नहीं रह गई है। हमारा मिशन यह सुनिश्चित करना है कि तेलंगाना का उच्च शिक्षा ढाँचा इस तकनीकी क्रांति में सबसे आगे रहते हुए अकादमिक सिद्धांत और वैश्विक औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाट सके।

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विश्वविद्यालयों की सामूहिक शक्ति से नवाचार बढ़ाने की अपील

असोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक ने भारतीय विश्वविद्यालयों की सामूहिक शक्ति पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि एआई-संचालित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित कर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कल के भारत के नेताओं को वैश्विक मंच पर नेतृत्व करने के लिए आवश्यक कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस से लैस किया जाए। असोसिएशन के महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि शिक्षा शास्त्र और शासन में एआई को एकीकृत करना एक बहुत बड़ा कार्य है।

यह सम्मेलन उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए वैश्विक नियामक ढाँचों का पालन करते हुए एआई में नैतिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए रोडमैप तैयार करेगा। जानकारी देते हुए कहा गया कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के लिए ज्ञान व नवाचार विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। अवसर पर यूनिवर्सिटी न्यूज़ का विशेष अंक जारी किया गया। उद्घाटन सत्र का समापन उस्मानिया विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो.जी. नरेश रेड्डी के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

इस सम्मेलन में तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा ओड़िशा के विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुलपतियों तथा वरिष्ठ शैक्षणिक प्रशासकों सहित लगभग 120 प्रतिनिधि भाग लेंगे।

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