विधानसभा व उपचुनाव के लिए 1100+ पर्यवेक्षक तैनात

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 नई दिल्ली। बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा होने के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने पर्यवेक्षकों से 18 मार्च तक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचने व उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए है।

आयोग ने इसके साथ ही पर्यवेक्षकों से लोगों से मिलने के लिए प्रतिदिन अपना समय निर्धारित करने को कहा है ताकि उम्मीदवार, राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधि निर्धारित समय पर चुनाव से जुड़ी शिकायतें उनके सामने रख सकें।

पांचों चुनावी राज्यों में 1111 पर्यवेक्षक तैनात

आयोग ने इस बीच बंगाल, तमिलनाडु सहित पांचों चुनावी राज्यों में 1111 पर्यवेक्षक तैनात किए है। इनमें सबसे अधिक 478 पर्यवेक्षक अकेले बंगाल में तैनात किए है। इनमें 294 सामान्य, 84 पुलिस और 151 व्यय पर्यवेक्षक है।

वहीं तमिलनाडु में 327, असम में 136, केरल में 108 और पुडुचेरी में 38 पर्यवेक्षक तैनात किए है। पांचों राज्यों में तैनात किए गए 1111 पर्यवेक्षकों में से 557 सामान्य, 188 पुलिस और 366 व्यय पर्यवेक्षक शामिल है। आयोग ने पहली बार पांच राज्यों में बड़ी संख्या में पुलिस पर्यवेक्षक लगाए है।

आयोग इस दौरान सबसे अधिक जोर हिंसा व प्रलोभन मुक्त चुनाव कराने पर है। ताकि मतदाता बगैर किसी डर या पक्षपात के अपना वोट डाल सकें। गौरतलब है कि इन पांच राज्यों के चुनाव की 15 मार्च को हुई घोषणा के बाद इन राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हुई है। बंगाल सहित कई राज्यों में राजनीतिक दलों से अपने प्रत्याशी भी घोषित कर दिए है।

दूसरे दिन भी एक्शन में आयोग, हटाए बंगाल और केरल के अधिकारी

चुनाव की घोषणा के दूसरे दिन भी निर्वाचन आयोग एक्शन में दिखा। आयोग ने निष्पक्ष व शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए बंगाल और केरल के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों को हटा दिए है।

आयोग ने इस दौरान बंगाल के 13 जिलों के एसपी व एसएसपी को हटा दिया है, वहीं आईजी स्तर के भी छह अधिकारियों को हटाते हुए उनकी जगह नए अधिकारियों की तैनाती दी है। आयोग इसके साथ ही केरल के भी कई जिलों के निर्वाचन अधिकारी व पुलिस अधिकारियों को हटा दिया गया है।

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