औलाद से सुलह का प्रयास किए बिना माता-पिता का अदालत में आना चिंताजनक
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों की उपेक्षा के कारण माता-पिता सुलह का कोई प्रयास किए बिना सीधे अदालत का रुख कर रहे हैं। यह कहा गया कि वे समस्या को सकारात्मक तरीके से हल करने के बजाय बच्चों से संपत्ति खाली कराने के आदेश की माँग कर रहे हैं।
सूर्यापेट ज़िले की एक 66 वर्षीय महिला ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, क्योंकि अधिकारियों ने उनके बेटे से संपत्ति वापस लेने के आग्रह को नजरअंदाज कर दिया था, जो उनकी परवाह नहीं करता था। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि बेटे को याचिकाकर्ता के कल्याण की परवाह नहीं है और वह वर्तमान में अपनी बेटी के साथ रह रही है। न्यायाधीश ने जवाब दिया कि इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ और कहा कि माता-पिता अपने बच्चों द्वारा उनकी देखभाल में लापरवाही का आरोप लगाते हुए तेजी से अदालत का रुख कर रहे हैं।
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न्यायाधीश ने कहा कि बेटे ने परवाह नहीं की, लेकिन अगर केवल एक ही बेटी है, तो वह भी जिम्मेदार होगी। न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि समझौता और बातचीत जैसे वैकल्पिक साधनों के बिना बच्चों से सीधे संपत्ति वापस लेने के लिए याचिकाओं की संख्या बढ़ रही है। न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई 15 अप्रैल तक स्थगित करते हुए सूर्यापेट के अधिकारियों को वर्तमान याचिका पर विस्तृत जानकारी पेश करने के आदेश दिए।
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