परिपूर्णता प्रदान करता है भारतीय शास्त्राय संगीत : जिष्णु देव वर्मा

हैदराबाद, तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि भारतीय शास्त्राय संगीत केवल मनोरंजन नहीं है, श्रोता के खालीपन को भरते हुए उसे परिपूर्णता का अनुभव प्रदान करता है। उपनिषदों एवं अन्य ग्रंथों में परिपूर्णता प्राप्त करने के जो माध्यम बताए गये हैं, उनमें संगीत भी एक है।

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा आज यहां माधापुर स्थित सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (सीसीआरटी) एंफीथिएटर में जारी 53वें जय हो पंडित जसराज पंडित मोतीराम पंडित मणिराम संगीत समारोह की अंतिम शाम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में योग, ध्यान, धर्म और संगीत परिपूर्णता प्राप्त करने के माध्यम रहे हैं। शास्त्राय संगीत का उद्देश्य ही यही रहा है। उन्होंने कहा कि देश के विकास का लक्ष्य विरासत के बिना पूरा नहीं हो सकता है। विरासत नहीं है तो विकास अर्थहीन और दिशाहीन हो जाता है। पारंपरिक शास्त्राय संगीत देश की विरासत है।

राज्यपाल ने कहा कि पश्चिमी दुनिया ने लचीलेपन और कठोरता को एक साथ पाने को असंभव बताया था, लेकिन भारतीय शास्त्राय संगीत ने यह संभव बनाया है। यह अनुशासन के प्रदर्शन से साधना के स्तर तक जाता है। यही कारण है कि साधना जैसा शब्द अंग्रेज़ी में है ही नहीं। उन्होंने कहा कि पंडित जसराज, भीमसेन जोशी और रवि शंकर जैसे कलाकार प्रैक्टिशनर या परफार्मर नहीं थे, बल्कि वे साधक थे। उनकी साधना में अध्यात्म के तत्व शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संगीत जीवन को परिपूर्ण बनाता है, यह पंडित जसराज ने सिद्ध कर दिया था, क्योंकि वे चार साल की आयु से ही इसकी साधना में लग गये थे।

पंडित जसराज के राग और गायकी ने संगीत में अद्वितीय पहचान बनाई

संगीत को शाश्वत बताते हुए उन्होंने कहा कि राग एक होने के बावजूद महान कलाकारों ने अपनी अलग अलग गायकी से पहचान बनायी। उन्होंने सिद्ध किया कि संगीत शरीर और आत्मा दोनों को सुख देता है। कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी के सहयोग से संगीत मार्तंड पंडित जसराज के रिकॉर्डेड गायन के साथ नये दौर के प्रतिष्ठित कलाकारों की प्रस्तुति ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

लगभग 50 कलाकारों द्वारा नृत्य की प्रस्तुति इस कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने तेलंगाना के बतुकम्मा और गुजरात के डांडिया सहित विभिन्न सांस्कृतिक बिंब प्रस्तुत किये। गायक कलाकारों में पं. रतन मोहन शर्मा, केदार पंडित, अंकिता जोशी, स्वर शर्मा और अक्षत पारीख की गायन प्रस्तुतियाँ मनभावन रही। साथ ही लोकेश आनंद, अभिनय रायवंडे, अभिजीत बारटक्के, स्वीकर कट्टी, सत्येंद्र सिंह सोलंकी, सुखद मुंडे, सूर्यकांत सुर्वे, देवेंद्र चिटनिस, दिव्या तावड़े, अपूर्वा द्रविड़, संदीप कुलकर्णी और पुरती जोशी एवं अन्य सह-कलाकारों को भी संगीत प्रेमियों ने तालियों की गड़गड़ाहट में प्रतिसाद दिया। इससे पूर्व पंडित जसराज के जीवन और हैदराबाद से उनके संबंध पर एक वीडियो भी प्रस्तुत किया गया।

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