धूम्रपान निषेध दिवस पर पीआईबी ने की मीडिया वार्ता

‘मधुमेह तथा रक्तचाप की तरह टीबी पर मुखर चर्चा आवश्यक’

हैदराबाद, सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अधिकारी एस. जीतेंद्र ने कहा कि जिस प्रकार लोग मधुमेह तथा रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य समस्याओं पर खुलकर बात करते हैं, उसी प्रकार तपेदिक (टीबी) को लेकर सामाजिक मुखरता आवश्यक है। टीबी के बारे में खुलकर बात करने से इससे जुड़े पूर्वाग्रहों तथा भ्रांतियों को दूर करते हुए स्वास्थ्य समस्या के बोझ को कम किया जा सकता है।

टीबी और धूम्रपान जागरूकता कार्यक्रम में वक्ता और अधिकारी

पीआईबी हैदराबाद द्वारा धूम्रपान निषेध दिवस के उपलक्ष्य में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ वार्ता का आयोजन किया गया। सीजीओ टॉवर्स में धूम्रपान-मुक्त जीवन की शुरुआत एक धूम्रपान-मुक्त दिन से होती है थीम पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य तंबाकू के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता का प्रसार कर लोगों को धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना था। अतिथि वक्ताओं ने विचार साझा करते हुए कहा कि टीबी से कोई भी प्रभावित हो सकता है, इसलिए सभी को सचेत एवं सजग रहने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने टीबी जैसे रोगों से सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक पोषण पर बल दिया।

तंबाकू का सेवन टीबी महामारी बढ़ाने में सहायक

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार डॉ. जी. श्रीगना ने कहा कि तंबाकू का सेवन सीधे तौर पर टीबी महामारी को बढ़ावा देता है। वर्ष 2024 के आँकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर टीबी प्रभावितों में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा भारत का है। इसके अलावा भारत उन देशों में शामिल है, जहाँ धूम्रपान छोड़ने की दर सबसे कम है। स्वस्थ हृदय तथा फेफडे जीवन के लिए सबसे आवश्यक हैं। इसलिए धूम्रपान को छोड़ते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना अनिवार्य है।

टीबी और धूम्रपान जागरूकता कार्यक्रम में वक्ता और अधिकारी

इससे न केवल हम सुरक्षित रहेंगे, अपितु आस-पास वालों का जीवन भी सुरक्षित रखेंगे। तंबाकू उत्पादों के सेवन की लत छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए टोल फ्री राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1800112356 स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि वार्ता जैसे संवादात्मक कार्यक्रम जमीनी स्तर पर जागरूकता पैदा करने में सहायक सिद्ध होंगे। टीबी प्रभावितों की सकारात्मक कहानियों को साझा करते हुए व्यापक जन-जागरूकता का प्रसार किया जा सकता है।

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समाज और सूचना के बीच अंतर को पाटना आवश्यक

एस. जीतेंद्र ने कहा कि आज भी लोग टीबी को शर्म या कलंक के कारण छुपाते हैं। इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती समाज तथा सूचना के बीच का बड़ा अंतर है। इसे पाटने के लिए आवश्यक है कि इससे जुड़ी भ्रांतियों तथा मिथकों पर खुलकर चर्चा की जाए। उन्होंने टीबी के उपचार में सरकारी व्यवस्थाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी रोगियों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क जाँच और दवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। पोषण सहायता के लिए निर्धारित वित्तीय सहायता दी जाती है।

टीबी और धूम्रपान जागरूकता कार्यक्रम में वक्ता और अधिकारी

सीबीसी तथा पीआईबी हैदराबाद की अतिरिक्त महानिदेशक श्रुति पाटिल ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि धूम्रपान मुक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए सक्रिय जनभागीदारी सबसे आवश्यक है। पीआईबी हैदराबाद के उपनिदेशक डॉ. मानस कृष्णकांत ने धूम्रपान निषेध दिवस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी प्रकार के तंबाकू आधारित उत्पादों का सेवन पूरे समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

तंबाकू उत्पादों के सेवन को लेकर वैश्विक स्तर पर भारत का दूसरा स्थान है। यह आँकड़ा भविष्य के लिए एक गंभीर समस्या है। इस कड़ी में मार्च के दूसरे बुधवार को धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जाता है, ताकि इस लत को छोड़ने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा सके। कार्यक्रम में तंबाकू नियंत्रण हीरो पुरस्कार से सम्मानित तथा तेलंगाना फूड एंड सप्लाइज विभाग के रघुनंदन माचना ने अपने अनुभव साझा किए। अवसर पर पीआईबी, सीबीसी तथा अन्य संगठनों के अधिकारी, कर्मचारी व अन्य उपस्थित थे। (श्रद्धा विजयलक्ष्मी)

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