मीन संक्रांति सूर्यदेव का होगा मीन राशि में प्रवेश
संक्रांति मुहूर्त
पुण्य काल- सुबह 6 बजकर 31 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक।
महापुण्य काल- सुबह 6 बजकर 31 मिनट से सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक।
मीन संक्रांति का क्षण– दोपहर 1 बजकर 8 मिनट तक।
शुभ योग
15 मार्च, रविवार को मीन संक्रांति में शनि, शुक्र एवं सूर्य की युति हो रही है, जिससे त्रिग्रही योग, पादित्य योग, समसप्तक योग बनेगा। इस दिन सूर्य मीन राशि में जाएंगे, वहीं यहां पहले से ही शुक्र और शनि विराजमान हैं। मीन राशि में शुक्र और सूर्य की युति से पादित्य योग का निर्माण होगा। इस योग को ज्योतिष में काफी शुभ माना जाता है। शनि और सूर्यदेव मिलकर समसप्तक योग का निर्माण करते हैं।
मीन संक्रांति वह समय होता है, जब सूर्यदेव राशि-परिवर्तन करके मीन राशि में प्रवेश करते हैं। विक्रम पंचांग में यह संक्रांति विशेष मानी जाती है, क्योंकि इसके बाद सूर्य अगले चरण में मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे नए सौर वर्ष की शुरुआत होती है। मीन संक्रांति से मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। इसके बाद खरमास शुरू हो जाता है।
मीन संक्रांति के दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान करें। सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को एक तांबे के लोटे में जल, थोड़ा सिंदूर, लाल फूल और अक्षत डालकर अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के दौरान सूर्य मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद सूर्य चालीसा और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। अंत में कपूर या घी के दीपक से सूर्य देव की आरती करें।
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